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History of Independent India: आजाद भारत में पहली बार क्या-क्या हुआ? जानिए देश के इतिहास की ये खास उपलब्धियां

History of Independent India: आजाद भारत में पहली बार क्या-क्या हुआ? जानिए देश के इतिहास की ये खास उपलब्धियां

History of Independent India: 15 अगस्त 1947 भारत के इतिहास का वह ऐतिहासिक दिन है, जब देश ने करीब दो सदियों की ब्रिटिश हुकूमत से आजादी हासिल की। आजादी के बाद भारत के सामने एक नए राष्ट्र के निर्माण की बड़ी चुनौती थी। देश को लोकतांत्रिक व्यवस्था देने से लेकर सरकार, संविधान, चुनाव और राष्ट्रीय प्रतीकों तक कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसी दौर में कई ऐसी चीजें पहली बार हुईं, जिन्होंने आधुनिक भारत की नींव मजबूत की।

आजादी के बाद बने देश के पहले प्रधानमंत्री

स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने का गौरव पंडित जवाहरलाल नेहरू को मिला। उन्होंने 15 अगस्त 1947 को देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। आजादी के साथ ही भारत को उसकी पहली केंद्रीय सरकार मिली, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद समेत कई प्रमुख नेता शामिल थे।आजादी के शुरुआती दौर में सरकार के सामने देश के बंटवारे, शरणार्थियों के पुनर्वास, रियासतों के एकीकरण और आर्थिक चुनौतियों जैसी कई बड़ी समस्याएं थीं। इसके बावजूद भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए।

History of Independent India: गणतंत्र बनने पर मिला पहला राष्ट्रपति

26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और देश का संविधान लागू हुआ। इसी के साथ डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति बने। उन्होंने इस पद पर रहते हुए नवगठित गणराज्य की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।भारत के गणतंत्र बनने के साथ ही देश ने खुद को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित किया और शासन की नई संवैधानिक व्यवस्था शुरू हुई।

History of Independent India: पहली बार जनता ने चुनी अपनी सरकार

आजाद भारत में पहला आम चुनाव 1951-52 में कराया गया। यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक था। उस समय देश में करोड़ों लोगों को पहली बार अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिला।यह चुनाव आसान नहीं था। देश का क्षेत्रफल विशाल था, बड़ी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती थी और चुनाव कराने के लिए संसाधन भी सीमित थे। इसके बावजूद भारत ने सफलतापूर्वक दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनावों में से एक का आयोजन किया।

तिरंगे को मिली राष्ट्रीय ध्वज की पहचान

भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने अपनाया था। इसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ बीच में नीले रंग का अशोक चक्र रखा गया।आजादी से पहले ही तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार कर लिया गया था, ताकि स्वतंत्र भारत की अपनी राष्ट्रीय पहचान हो सके। 15 अगस्त 1947 को यही तिरंगा स्वतंत्र भारत की नई पहचान बनकर सामने आया।

History of Independent India: आजाद भारत का पहला बजट

स्वतंत्र भारत का पहला बजट आर.के. षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। यह बजट आजादी और देश के विभाजन के बाद पेश किया गया था, इसलिए इसमें उस समय की आर्थिक चुनौतियों की झलक साफ दिखाई देती थी।इस बजट में सरकार की अनुमानित आय करीब 171.15 करोड़ रुपये और अनुमानित खर्च करीब 197.29 करोड़ रुपये रखा गया था। यह स्वतंत्र भारत की नई आर्थिक व्यवस्था की शुरुआत का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।

History of Independent India: स्वतंत्र भारत का पहला डाक टिकट

आजाद भारत का पहला डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी किया गया था। इस टिकट पर तिरंगे के साथ ‘जय हिंद’ लिखा था और उस पर 15 अगस्त 1947 की तारीख भी अंकित थी।यह डाक टिकट सिर्फ डाक भेजने का माध्यम नहीं था, बल्कि आजादी की याद और नए भारत की राष्ट्रीय भावना का प्रतीक भी बन गया। उस समय इसकी कीमत साढ़े तीन आना थी।

आजादी के बाद शुरू हुआ नए भारत का सफर

15 अगस्त 1947 के बाद भारत ने सिर्फ एक स्वतंत्र देश के रूप में अपनी यात्रा शुरू नहीं की, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं के निर्माण की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम उठाए। पहले प्रधानमंत्री से लेकर पहले राष्ट्रपति, पहले आम चुनाव, राष्ट्रीय ध्वज और पहले बजट तक कई ऐसी उपलब्धियां रहीं, जिन्होंने आने वाले भारत की नींव तैयार की।यही वजह है कि स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों का इतिहास आज भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उस दौर में लिए गए

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