Nagchandreshwar Temple: सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के मौके पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। साल में सिर्फ एक दिन खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। इसी दौरान हरसिद्धि मंदिर के सामने बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र में भीड़ का दबाव बढ़ गया, जिससे कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई।
13 श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती
तबीयत बिगड़ने के बाद करीब 13 लोगों को उनके परिजन और सुरक्षाकर्मी उज्जैन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। फिलहाल सभी का इलाज जारी है। डॉक्टर भर्ती श्रद्धालुओं की हालत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।सावन के तीसरे सोमवार पर भगवान महाकाल और नागचंद्रेश्वर मंदिर के विशेष दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उज्जैन पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं की भारी संख्या के कारण मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के रास्तों पर भी काफी भीड़ है। अब तक करीब 5.50 लाख श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर चुके हैं।
इन श्रद्धालुओं की बिगड़ी तबीयत
भीड़ के बीच तबीयत बिगड़ने वाले श्रद्धालुओं में सागर पिता मांशीष, निवासी किसनपुरा, उम्र 15 वर्ष; सजीव नोनू चौधरी, निवासी दरभंगा, बिहार, उम्र 36 वर्ष; खुशी पिता माधव राव, निवासी बड़ा गणेश, ग्वालियर, उम्र 20 वर्ष; हरीशचंद पिता अशोक, निवासी वासना, गुजरात, उम्र 26 वर्ष; तुलसी पिता जय प्रकाश, निवासी गुजरात, उम्र 15 वर्ष और जय पिता जय धवन, निवासी गुजरात, उम्र 12 वर्ष शामिल हैं।इसके अलावा लखन गोविन्द और सोनम सिंह की भी तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है।

साल में केवल एक दिन खुलते हैं पट
नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। नागपंचमी के अलावा पूरे साल मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं। इसी वजह से नागपंचमी के दिन यहां दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है और देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उज्जैन पहुंचते हैं।इस बार नागपंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई।
नागचंद्रेश्वर मंदिर की खासियत
नागचंद्रेश्वर मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की एक दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। इसमें भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ नाग की शेषनाग वाली आकृति पर विराजमान दिखाई देते हैं।मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार नागपंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। पूरे साल मंदिर के पट बंद रहते हैं। इसी विशेष परंपरा के कारण नागपंचमी पर यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
आधी रात से शुरू होती है विशेष पूजा
नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर विशेष पूजा की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रात 12 बजे से पूजा शुरू होती है और दोपहर 12 बजे के बाद नाग देवता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।नागचंद्रेश्वर मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार नागराज रक्षक ने भगवान शिव की तपस्या की थी। कहा जाता है कि उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें यहां निवास करने का वरदान दिया था। इसी वजह से मंदिर में नागराज को विशेष महत्व दिया जाता है।
कालसर्प दोष से मुक्ति की मान्यता
नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन और पूजा को लेकर एक और धार्मिक मान्यता प्रचलित है। माना जाता है कि नागपंचमी पर यहां दर्शन-पूजन करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल सकती है। श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाओं के साथ जीवन की बाधाओं से छुटकारे की प्रार्थना भी करते हैं।नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग होने से इस बार उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ गई। भगवान महाकाल और नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ के कारण मंदिर क्षेत्र और आसपास के मार्गों पर लगातार दबाव बना रहा। इसी दौरान हरसिद्धि मंदिर के सामने बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र में कुछ श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
ये भी पढ़ें… राघुबीर नगर में ई-रिक्शा बैटरी फटने से गोदाम में आग, दो की मौत








