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Sitapur Gov School: योगी सरकार में बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर, पढ़ाई के साथ बच्चों के सपनों को मिल रही नई उड़ान

Sitapur Gov School: योगी सरकार में बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर, पढ़ाई के साथ बच्चों के सपनों को मिल रही नई उड़ान

Sitapur Gov School: सरकारी स्कूलों को लेकर अक्सर तस्वीर ऐसी दिखाई जाती है, जहां बच्चों की पढ़ाई सिर्फ किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित रह जाती है। लेकिन जब हमारी टीम सीतापुर के इस विद्यालय के परिसर में पहुंची, तो यहां का नजारा कुछ अलग ही नजर आया। योगी आदित्यनाथ सरकार की शिक्षा को लेकर बदलती सोच और बेहतर शैक्षणिक माहौल पर जोर का असर यहां साफ दिखाई देता है।स्कूल की दीवारों से लेकर कक्षाओं तक बच्चों के सपनों, उनकी कल्पनाओं और उनकी प्रतिभा की झलक नजर आई। कक्षा में कदम रखते ही बच्चों के चेहरों पर पढ़ाई के साथ उत्साह और उमंग साफ दिखाई दी। कहीं बच्चे कविता की लय पर झूमते नजर आए, तो कहीं अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते दिखाई दिए।यहां पढ़ाई को सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए यादगार अनुभव बनाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य यही है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी बेहतर अवसर, आधुनिक संसाधन और अपनी प्रतिभा को निखारने का मंच मिले।सीतापुर के इस विद्यालय की कहानी सिर्फ किताबों से पढ़ाई की नहीं, बल्कि उन सपनों की है जिन्हें ये बच्चे अपने साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

किताबों से आगे बढ़कर सपनों को पहचानने की कोशिश

इस स्कूल में बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान देने तक बात सीमित नहीं है। उन्हें बड़े सपने देखने और उन सपनों को पूरा करने का हौसला भी दिया जा रहा है। कक्षा की दीवार पर लगी कल्पना चावला की तस्वीर बच्चों को यही संदेश देती नजर आती है कि सपना बड़ा हो तो उसे पूरा करने का हौसला भी बड़ा होना चाहिए।कक्षाओं में बच्चों को अलग-अलग जिम्मेदारियों और भविष्य के पेशों से भी रूबरू कराया जा रहा है। कोई बच्चा किसान बनने का सपना देख रहा है, तो कोई डॉक्टर, वकील या पुलिस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहता है। यानी छोटी उम्र में ही बच्चों को भविष्य की तस्वीर दिखाने की कोशिश की जा रही है।स्कूल की खास बात यह भी नजर आई कि यहां पढ़ाई के साथ बच्चों को पौधों की देखभाल जैसी गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। फलों के नाम से वाक्य बनवाने से लेकर पौधों की जिम्मेदारी तक, बच्चों को सीखने के साथ-साथ जिम्मेदारी का एहसास भी कराया जा रहा है।कक्षा में मौजूद शिक्षकों से बातचीत में यह भी सामने आया कि बच्चों की जिज्ञासा को दबाने के बजाय उनके सवालों का जवाब उनके स्तर के अनुसार देने की कोशिश की जाती है। यही वजह है कि बच्चे पढ़ाई में रुचि लेते हुए दिखाई दिए।

Sitapur Gov School: हाईटेक क्लास से लेकर योग और गतिविधियों तक, हर कदम पर सीख

स्कूल की हाईटेक कक्षा में बच्चों के भविष्य के सपनों को एक अलग अंदाज में दिखाया गया है। अलग-अलग कटआउट के पीछे खड़े बच्चे खुद को अपने सपनों के पेशे में देख रहे हैं। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई वकील तो कोई देश की रक्षा करने वाला अधिकारी।इसके साथ ही बच्चों को योग, प्राणायाम, खेल और रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। गतिविधि कक्ष में बच्चे खेल-खेल में सीखते और अपनी सोचने-समझने की क्षमता को विकसित करते दिखाई दिए। वहीं बच्चों को अखबार पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि पढ़ाई के साथ उनमें देश-दुनिया को समझने और जागरूक रहने की आदत विकसित हो।स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मिड-डे मील के तहत बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जाता है। अलग-अलग दिनों में दाल, रोटी, सब्जी, चावल और फल जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ दिए जाने की बात सामने आई।दरअसल, किसी भी बच्चे के सपनों को उड़ान तभी मिलती है जब उसे सही दिशा दिखाने वाला शिक्षक और प्रेरणा देने वाला माहौल मिले। इस सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के साथ वही माहौल देने की कोशिश होती दिखाई दे रही है।अब सवाल सिर्फ इतना है कि क्या सरकारी स्कूलों की यह बदलती तस्वीर उस सोच को बदल पाएगी, जो सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों के मन में बनी हुई है? अगर बच्चों को ऐसा ही माहौल, ऐसे शिक्षक और अपने सपनों को पहचानने का अवसर मिलता रहा, तो शायद आने वाले समय में इन्हीं कक्षाओं से देश के डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, वकील और नेता निकलेंगे।

Sitapur Gov School: पिंक बॉक्स और आईना, किताबों से आगे बच्चों को सिखाई जा रही जिंदगी की समझ

स्कूल में हमारी नजर सिर्फ पढ़ाई तक नहीं रुकी। यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी बात खुलकर रखने और अपनी परेशानियों का समाधान खोजने का तरीका भी सिखाया जा रहा है। बच्चों के लिए बनाए गए पिंक बॉक्स के जरिए वे ऐसी बातें भी शिक्षकों तक पहुंचा सकते हैं, जिन्हें सामने आकर कहने में उन्हें झिझक महसूस होती है। खासकर बच्चियों के लिए यह पहल उन्हें अपनी समस्याएं साझा करने और सही मार्गदर्शन पाने का भरोसा देती दिखाई दी।इसी के साथ विद्यालय में एक आईना भी लगाया गया है, जहां बच्चे खुद को देखकर अपनी साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना सीखते हैं। आईने के सामने बच्चे यह देख सकते हैं कि उनके नाखून कटे हुए हैं या नहीं, बाल ठीक और साफ हैं या नहीं, चेहरे पर साफ-सफाई है या नहीं और वे स्कूल के लिए साफ-सुथरे होकर आए हैं या नहीं। यह छोटी सी पहल बच्चों में स्वच्छता, आत्मविश्वास और खुद की देखभाल की आदत विकसित करने का एक सहज तरीका नजर आई।यानी यहां बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं दिया जा रहा, बल्कि उन्हें अपनी बात रखना, अपनी समस्याओं को समझना और खुद को साफ-सुथरा व व्यवस्थित रखना भी सिखाया जा रहा है।

यहां बच्चे सिर्फ विद्यार्थी नहीं, अपनी छोटी-सी सरकार भी चलाते हैं

इस स्कूल की एक और खास पहल ने हमारा ध्यान खींचा। हर साल स्कूल में बच्चों के बीच चुनाव कराया जाता है। मतदान के बाद सबसे ज्यादा वोट पाने वाला बच्चा विद्यालय का प्रधानमंत्री बनता है और बाकी बच्चों को अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी दी जाती है। कोई पुस्तकालय संभालता है, कोई स्वास्थ्य, कोई जल व्यवस्था तो कोई खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों की जिम्मेदारी।इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक सिर्फ मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। बच्चों को खुद बैठक करने, फैसले लेने और अपनी जिम्मेदारी निभाने का मौका दिया जाता है। यानी लोकतंत्र की किताब पढ़ाने के बजाय बच्चों को लोकतंत्र का अनुभव कराया जा रहा है।

Sitapur Gov School: बच्चों के हाथ में सिर्फ किताब नहीं, जिम्मेदारी भी

टीम वर्क के जरिए बच्चों में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा रही है। यहां बच्चों को बैज दिए जाते हैं और अपनी जिम्मेदारी खुद निभाने का मौका मिलता है। यही वजह है कि स्कूल की कई छोटी-बड़ी व्यवस्थाओं में बच्चे खुद आगे बढ़कर हिस्सा लेते दिखाई देते हैं।स्कूल में पढ़ाई से पीछे रह जाने वाले या नियमित रूप से स्कूल न आने वाले बच्चों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाता। ऐसे बच्चों को पढ़ाने और स्कूल तक लाने में मदद की जाती है, ताकि कोई बच्चा शिक्षा से दूर न रह जाए।

Sitapur Gov School: शिक्षा के साथ सेहत पर भी पूरा जोर

बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जा रही है। स्कूल में फर्स्ट एड बॉक्स की व्यवस्था है, ताकि चोट लगने या अचानक जरूरत पड़ने पर बच्चों को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया जा सके।वहीं बच्चों को शत-प्रतिशत उपस्थिति के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टार ऑफ द मंथ’ जैसी पहल भी दिखाई दी। पूरे महीने नियमित रूप से स्कूल आने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाता है। छोटी-सी पहल है, लेकिन बच्चों के अंदर स्कूल आने औरबेहतर प्रदर्शन करने का उत्साह पैदा करती है।

मिड-डे मील में सिर्फ खाना नहीं, पोषण का भी ध्यान

स्कूल की रसोई और मिड-डे मील व्यवस्था को देखने पर भी तस्वीर पहले से अलग नजर आई। बच्चों के लिए हर दिन के हिसाब से मेन्यू निर्धारित है। दाल, सब्जी, चावल और रोटी जैसे भोजन के साथ अलग-अलग दिनों में अलग मेन्यू रखा जाता है, ताकि बच्चों को संतुलित और पौष्टिक भोजन मिल सके।गुरुवार को दाल-रोटी, शुक्रवार को तहरी और अन्य दिनों में तय मेन्यू के अनुसार भोजन दिया जाता है। सोमवार को बच्चों को फल भी वितरित किए जाते हैं। यानी कोशिश सिर्फ बच्चों का पेट भरने की नहीं, बल्कि उन्हें पोषण देने की भी दिखाई देती है।और यही इस सरकारी स्कूल की सबसे बड़ी तस्वीर है—जहां एक तरफ बच्चों के हाथ में किताब है, तो दूसरी तरफ जिम्मेदारी; एक तरफ पढ़ाई है, तो दूसरी तरफ नेतृत्व; और एक तरफ सपनों की उड़ान है, तो दूसरी तरफ उन सपनों को पूरा करने की तैयारी।

Sitapur Gov School: किताबों से आगे: योग, अखबार और गतिविधियों से संवर रही बच्चों की दुनिया

सरकारी स्कूल में पढ़ाई का मतलब अब सिर्फ किताबें पढ़ना और परीक्षा की तैयारी करना नहीं रह गया है। स्कूल की कक्षा से निकलकर जब हम आगे बढ़े तो यहां शिक्षा का एक अलग और सकारात्मक अंदाज देखने को मिला। बच्चों को किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें योग, रचनात्मक गतिविधियों और अखबार पढ़ने जैसी उपयोगी आदतों से जोड़ा जा रहा है। कोशिश यही है कि पढ़ाई के साथ बच्चों का शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास भी हो, ताकि वे आगे चलकर जागरूक, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

योग से बढ़ रहा बच्चों का आत्मविश्वास

विद्यालय में बच्चों को अलग-अलग योगासन और प्राणायाम कराया जाता है। सुबह की शुरुआत योग और शारीरिक गतिविधियों के साथ कर बच्चों में अनुशासन और एकाग्रता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षकों के मुताबिक योग से बच्चों का ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनके शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।योग के दौरान बच्चे पूरे उत्साह के साथ अलग-अलग आसनों का अभ्यास करते नजर आए। बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को राज्यपाल की ओर से सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख किया गया, जिससे बच्चों में आगे बढ़ने और बेहतर प्रदर्शन करने का उत्साह दिखाई देता है। योग को यहां केवल व्यायाम के तौर पर नहीं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास और अनुशासन को मजबूत करने के माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है।

Sitapur Gov School: किताब के साथ अखबार भी पढ़ रहे बच्चे

कक्षा में बच्चों के हाथों में अखबार देखकर शिक्षा की एक और तस्वीर सामने आई। बच्चों को रोजमर्रा की घटनाओं के साथ देश-दुनिया में हो रही गतिविधियों की जानकारी से जोड़ने के लिए समाचार-पत्र पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।अखबार पढ़ने की इस आदत से बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ाने के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और अपने आसपास की दुनिया को समझने की कोशिश की जा रही है। बच्चे खबरों को पढ़ते हैं, उनके बारे में चर्चा करते हैं और सवाल पूछते हैं। इससे उनमें सोचने-समझने और अपनी बात रखने की क्षमता भी विकसित करने का प्रयास दिखाई देता है।यानी इस विद्यालय में शिक्षा का दायरा सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। योग से शरीर और मन को मजबूत करने, अखबार से दुनिया को समझने और गतिविधियों से रचनात्मकता को बढ़ाने की कोशिश—इन सभी पहलुओं को जोड़कर बच्चों के सर्वांगीण विकास की तस्वीर यहां दिखाई देती है।

Sitapur Gov School: एक्टिविटी रूम में खेल-खेल में सीख रहे बच्चे

इसके बाद हमारी नजर एक्टिविटी रूम पर गई, जहां बच्चे अलग-अलग गतिविधियों के जरिए सीखते दिखाई दिए। कहीं बच्चे हाथों से काम कर रहे थे, तो कहीं अलग-अलग खेल और गतिविधियों के जरिए अपनी सोचने-समझने की क्षमता को विकसित कर रहे थे।यहां पढ़ाई का तरीका ऐसा रखा गया है कि बच्चे सिर्फ सुनें नहीं, बल्कि खुद करके सीखें। गतिविधियों के जरिए बच्चों में आपसी सहयोग, रचनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और बच्चों को पढ़ाई के साथ उनकी प्रतिभा निखारने के अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है।पूरे स्कूल का जायजा लेने के बाद एक बात साफ नजर आई—यहां कोशिश सिर्फ बच्चों को पढ़ाने की नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व को तैयार करने की भी है। आधुनिक कक्षाओं से लेकर पुस्तकालय, पोषणयुक्त मिड-डे मील, योग, खेल, गतिविधियां और बच्चों की भागीदारी तक, अलग-अलग पहल को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।कंधों पर भारी स्कूल बैग और आंखों में सुनहरे सपने लिए ये बच्चे जब स्कूल से घर की ओर बढ़ते हैं, तो उनके साथ सिर्फ आज की पढ़ाई नहीं जाती, बल्कि कल को बेहतर बनाने की उम्मीद भी जाती है।सरकारी स्कूल की यह तस्वीर यही सवाल छोड़ती है—अगर बच्चों को पढ़ाई के साथ सपने देखने, सवाल पूछने, जिम्मेदारी निभाने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले, तो क्या यही छोटे-छोटे कदम आने वाले भारत की बड़ी तस्वीर नहीं बदल सकते?

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