पूर्व प्रधानमंत्री व किसान नेता चौधरी चरण सिंह के पोते व भारत सरकार में मंत्री जयंत चौधरी पर तंज कसते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि हमने जिन्हें चवन्नी से रुपया बनाया वे भी छोड़ गए। इसके बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। आखिर रुपया किसको किसने बनाया? यानी किसकी कीमत किसने बढ़ाई.. बीता कल बताता है कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव को नेता बनाने वाले चौधरी चरण सिंह ही थे। दोनों के बीच गुरू-शिष्य का रिश्ता था। लेकिन आज मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव, चरण सिंह के पोते जयंत चौधरी को चवन्नी से रुपया बनाने की बात कर रहे हैं।
चौधरी चरण सिंह और मुलायम सिंह यादव के बीच के तालमेल के बारे में बतायें उससे पहले जान लें कि अखिलेश यादव का बयान आखिर क्यों आया? साल 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान रालोद व समाजवादी दल गठबंधन से चुनावी में मैदान में थे। उसी समय जंयत चौधरी ने प्रचार के दौरान कहा था कि ‘मैं चवन्नी नहीं जो पलट जाऊंगा’ और उसके बाद समाजवादी पार्टी के समर्थन से ही जयंत राज्यसभा पहुंचे थे। शायद, इसी एहसान को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा हो कि हमने चवन्नी से रुपया बनाया वे फिर भी छोड़ गए।
चौधरी परिवार ने जिस मुलायम सिंह को नेता बनाया आज उन्ही का बेटा अखिलेश ओच्छी बात बोल रहा है। बात है साल 1974 की है जब मुलायम सिंह यादव ने किसानों के बड़े नेता चौधरी चरण सिंह की भारतीय क्रांति दल का साथ पकड़ा और जसवंतनगर से चुनाव जीता। यहीं से दोनों के बीच राजनीतिक रिश्ता मजबूत हुआ। चरण सिंह की राजनीति किसानों के हित में और कांग्रेस-विरोधी धड़े के इर्द-गिर्द घूमती थी। मुलायम को उन्होंने यूपी में अपने भरोसेमंद युवा नेताओं में जगह दी थी। आपातकाल के बाद यूपी में जनता पार्टी की सरकार बनी और मुलायम सिंह यादव को मंत्री बनाया गया। यानी मुलायम का राज्य स्तर पर बड़ा राजनीतिक कद बनाने में चरण सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण थी। लेकिन आज मुलायम के बेटा अखिलेश यादव तंज कस रहे हैं कि जयंत चौधरी को चवन्नी से रुपया बनाया।

1980 के चुनाव में कांग्रेस की वापसी हुई और मुलायम चुनाव हार गए। इसके बाद चरण सिंह ने अपनी राजनीति को लोक दल के रूप में आगे बढ़ाया और मुलायम को संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका मिली। मुलायम विधान परिषद पहुंचकर यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। 1982 में वह लोक दल के यूपी संगठन में प्रमुख भूमिका में आए और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर कांग्रेस के खिलाफ मजबूत चेहरा बन गए। यानी कि मुलायम सिंह यादव को जिस चौधरी परिवार ने इस मुकाम तक पहुंचाया आज वही समाजवादी रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पर तंज कस रहे हैं।
फिलहाल इस बयान को लेकर जाट समाज से ताल्लुक रखने वाले जयंत चौधरी कोई पलटवार नहीं किया है लेकिन जाट समाज बेहद नाराज दिखाई पड़ रहा है। यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों में किसान, मजदूर और खासतौर पर जाटों की यह नाराजगी अखिलेश यादव को झेलनी पड़ सकती है। क्योंकि यह पशि्चमी यूपी में बड़ी संख्या में जाट समाज है जिनका दर्जनों सीटों में सीधी प्रभाव रहता है। तो इस बयान का खामियाजा अखिलेश यादव को भुगतना पड़ सकता है। लोगों का मानना है कि यह तंज अपमानित करने वाला है।








