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जंतर-मंतर पर SIR को लेकर घमासान, पुलिस से बहस और धक्कामुक्की के बीच उठे कई बड़े सवाल

जंतर-मंतर पर SIR के विरोध में प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर SIR के विरोध में प्रदर्शन

Delhi SIR Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिली। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और सोशल मीडिया से जुड़े लोग मौजूद थे। वीडियो में कई लोगों को पुलिसकर्मियों से बहस करते, माइक सामने करते और धक्कामुक्की करते देखा गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर खबर इंडिया के पत्रकार रोहित अत्री ने मौके से स्थिति दिखाई और प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाए। वहीं, प्रदर्शन में शामिल लोगों ने SIR की प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए इसे निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की मांग की।

Delhi SIR Protest: पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्कामुक्की

खबर इंडिया के मुताबिक, जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था। मौके पर कई सोशल मीडिया से जुड़े लोग भी मौजूद थे। वीडियो में आरोप लगाया गया कि कुछ लोग लगातार पुलिसकर्मियों से बहस और धक्कामुक्की कर रहे थे। पुलिस की ओर से उन्हें नियंत्रित करने या हिरासत में लेने की कोशिश किए जाने पर कुछ लोग पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आए।वीडियो में यह भी कहा गया कि कुछ लोग पुलिस अधिकारियों के बेहद करीब जाकर उनके सामने माइक कर सवाल पूछ रहे थे। कुछ जगहों पर पुलिसकर्मियों को घेरने की स्थिति भी दिखाई दी। पुलिस की ओर से लोगों को पीछे हटाने की कोशिश की जा रही थी।

माइक लेकर पुलिस से सवाल करने पर विवाद

मौके पर मौजूद पत्रकार ने कहा कि कुछ लोग खुद को मीडिया से जुड़ा बताकर पुलिस की कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे थे। वीडियो में एक बुर्का पहने महिला को पुलिस द्वारा ले जाते हुए दिखाया गया। इसी दौरान उसके पास मौजूद एक व्यक्ति ने उसे माइक दिया और महिला ने खुद को पत्रकार बताया।वीडियो में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या केवल हाथ में माइक होने से कोई व्यक्ति पत्रकार हो जाता है और क्या मीडिया की पहचान का इस्तेमाल पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए किया जाना उचित है।

Delhi SIR Protest: प्रदर्शन के तरीके पर उठे सवाल

वीडियो में यह सवाल उठाया गया कि अगर लोग किसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें पुलिस से धक्कामुक्की करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। पत्रकार ने कहा कि पुलिस प्रदर्शन को व्यवस्थित रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात है, ऐसे में पुलिसकर्मियों को लगातार निशाना बनाने का कारण समझ से परे है।वीडियो में यह भी कहा गया कि पहले पुलिस के साथ बहस या धक्कामुक्की की जाती है और कार्रवाई होने के बाद पुलिस पर तानाशाही का आरोप लगाया जाता है। इसे लेकर प्रदर्शन के तरीके और सोशल मीडिया पर सामने आने वाले वीडियो के बीच अंतर होने की बात कही गई।

प्रदर्शन में शामिल युवक ने ‘मर्द’ शब्द पर रखी अपनी बात

मौके पर एक युवक हर्षद से भी बातचीत हुई, जिसने बताया कि वह दिल्ली का रहने वाला है और इससे पहले भी SIR के विरोध से जुड़े प्रदर्शन में शामिल हो चुका है। जब उससे ‘मर्द’ शब्द को लेकर सवाल किया गया तो उसने कहा कि उसे यह शब्द पसंद नहीं है।युवक ने कहा कि वह खुद को एक सामान्य पुरुष मानता है और पुरुषों का सम्मान करता है, लेकिन उसे ‘मर्द’ कहे जाने पर आपत्ति है। उसके मुताबिक, उसे भाई या बहन कहने में कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि उसके लिए बहन शब्द अपमानजनक नहीं है।उसने कहा कि उसके आसपास के पुरुष पितृसत्ता का समर्थन नहीं करते और खुद को पुरुष के रूप में देखते हैं। उसने देश की सीमाओं पर तैनात जवानों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे खुद को ‘मर्द’ नहीं बल्कि ‘वीर’ मानते हैं।उसने भगवान शिव का उदाहरण देते हुए कहा कि शिव पुरुष बने, मर्द नहीं। वहीं, महिषासुर को ‘मर्द’ बताए जाने और देवी द्वारा उसके वध का भी उल्लेख किया।

Delhi SIR Protest: कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण की मौजूदगी पर सवाल

प्रदर्शन में कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल तथा वकील प्रशांत भूषण की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया। वीडियो में कपिल सिब्बल के जंतर-मंतर पहुंचने को SIR के मुद्दे से जोड़ते हुए सवाल उठाया गया।वहीं, प्रदर्शनकारियों की ओर से SIR की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई गईं। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।

गांधी के विचार और प्रदर्शन के तरीके पर बहस

मौके पर मौजूद एक प्रदर्शनकारी से गांधी जी की तस्वीर हाथ में होने और प्रदर्शन में हो रही धक्कामुक्की को लेकर सवाल किया गया। इस पर उसने कहा कि गांधीवादियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और अहिंसा के रास्ते को दिखाया था।उसने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ भी कठोर व्यवहार किया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग छात्रों और एनएसयूआई से जुड़े छात्रों का जिक्र किया।उससे छत्तीसगढ़ और झारखंड में छात्रों के आंदोलनों तथा पंजाब के एलपीयू में हुए लाठीचार्ज को लेकर भी सवाल किया गया। जवाब में उसने कहा कि जहां भी किसी के साथ अन्याय होता है, वहां जवाबदेही तय होनी चाहिए और वह किसी भी सरकार के खिलाफ होने वाले अन्याय का विरोध करता है।

Delhi SIR Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि SIR की प्रक्रिया में जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लेकर भी सवाल-जवाब हुए। प्रदर्शनकारी से पूछा गया कि जब मौजूदा सरकार ने पहले की सरकारों की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाकर सत्ता हासिल की थी, तो अब मौजूदा सरकार से भी जवाब क्यों नहीं मांगा जाना चाहिए।इस पर प्रदर्शनकारी ने कहा कि आज दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, इसलिए मौजूदा व्यवस्था से सवाल करना जरूरी है।

SIR को लेकर निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने SIR को असंवैधानिक बताते हुए इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मतदाता सूची की जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी का भी जिक्र किया और कहा कि वह लगातार SIR को लेकर निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। बातचीत में तेलंगाना का भी उल्लेख किया गया, जहां पिछले एक साल से SIR को लेकर सवाल उठाए जाने की बात कही गई।वहीं, 2018 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा कथित फर्जी मतदाताओं को हटाने की बात का भी जिक्र हुआ। प्रदर्शनकारियों ने चिंता जताई कि फर्जी मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से बाहर हो सकते हैं।

Delhi SIR Protest: मतदाता सूची से नाम हटने को लेकर उठे सवाल

एक प्रदर्शनकारी ने अपने गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उसने 247 वोटों के कटने की बात कही और कुछ नामों का भी जिक्र किया। उसका कहना था कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया गया है तो उसके मामले की जांच होनी चाहिए।इसी मुद्दे पर यह सवाल भी उठाया गया कि अगर फर्जी मतदाताओं की पहचान की जा रही है तो वास्तविक मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी होगी।

सुप्रीम कोर्ट को लेकर भी हुई तीखी बहस

प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट को लेकर भी तीखी बहस देखने को मिली। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि देश स्वतंत्र है और लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार है। उसने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट को लेकर सवाल उठाने पर उन्हें अपनी बात रखने से क्यों रोका जाए।उसने यह भी सवाल उठाया कि अगर प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर ध्यान दिया जाता तो लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिए क्यों आते। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर भी उसने नाराजगी जताई।वहीं, मौके पर मौजूद पत्रकार ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हो रही धक्कामुक्की और तनावपूर्ण स्थिति पर सवाल उठाया।

Delhi SIR Protest: पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा

वीडियो में कई जगह पुलिसकर्मियों को भीड़ के बीच पीछे हटते हुए दिखाया गया। पुलिस की ओर से लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए कहा जा रहा था। कुछ लोगों के ऊंचाई वाली जगहों पर चढ़ने पर भी पुलिस ने उन्हें नीचे उतारने की कोशिश की।इसका कारण यह बताया गया कि अगर कोई व्यक्ति गिरकर घायल होता है तो इसकी जिम्मेदारी भी पुलिस पर आ सकती है। इसी वजह से पुलिस लोगों को नियंत्रित करने की कोशिश करती दिखाई दी।प्रदर्शन के दौरान गांधी जी की तस्वीर, अहिंसा, SIR, मतदाता सूची, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही जैसे कई मुद्दे चर्चा में रहे। वीडियो के अंत में प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी और ‘जय श्री राम’ के नारे भी सुनाई दिए।