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Bengal BJP Challenge: बंगाल में सत्ता के तीन महीने बाद भाजपा के सामने नई चुनौती

Bengal BJP Challenge:

Bengal BJP Challenge: भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई जीतकर पहली बार सरकार बनाई, लेकिन तीन महीने के भीतर ही पार्टी के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। अब भाजपा के सामने अपनी सरकार चलाने के साथ-साथ संगठन की पहचान और अनुशासन बनाए रखने की परीक्षा है।

Bengal BJP Challenge: ‘तृणमूलीकरण’ रोकना बड़ी चुनौती-

पार्टी के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि उसका संगठन उसी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा न बन जाए, जिसके खिलाफ भाजपा ने वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस को घेरा था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने जबरन वसूली, डराने-धमकाने और दूसरी अवैध गतिविधियों को लेकर नेताओं और कार्यकर्ताओं को कई बार चेतावनी दी है।

Bengal BJP Challenge: पूर्व तृणमूल नेताओं की एंट्री से नाराजगी-

भाजपा को अपने कुछ कार्यकर्ताओं की नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं में पूर्व तृणमूल नेताओं और बागी नेताओं को भाजपा में शामिल किए जाने को लेकर असंतोष है। इनमें कुछ ऐसे नेता भी हैं, जिन्हें भाजपा ने पिछली सरकार के कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक संस्कृति को लेकर निशाना बनाया था।

विधायकों को भी दी गई सख्त चेतावनी-

हाल ही में भाजपा विधायकों और जिला अध्यक्षों के संगठनात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम में शमिक भट्टाचार्य ने चुने हुए प्रतिनिधियों को अनुशासन में रहने की चेतावनी दी। उन्होंने विधायकों से कहा कि वे अपनी विधानसभा सीटों पर मुख्यमंत्री की तरह व्यवहार न करें। उन्होंने फ्लैट की नाप-जोख करने, दुकानों या घरों पर ताला लगाने और स्थानीय मामलों में अनावश्यक दखल देने जैसी गतिविधियों से दूर रहने को कहा। उनका स्पष्ट संदेश था कि ऐसा कोई काम न हो, जिससे जनता को भाजपा और तृणमूल में अंतर नजर न आए।

गलत रास्ते पर चलने वालों का रिकॉर्ड रखने का दावा-

शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी गलत रास्ते पर चलने वाले नेताओं का रिकॉर्ड रख रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नेताओं ने अपना व्यवहार नहीं सुधारा तो उचित समय पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी विधायक या सांसद को नहीं बख्शने की बात भी कही गई है।

22 पदाधिकारियों पर हुई कार्रवाई-

प्रदेश भाजपा ने हाल में 22 पदाधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें मंडल स्तर के कई नेता भी शामिल हैं। इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जबरन वसूली, तृणमूल कांग्रेस के कार्यालयों पर कब्जे की कोशिश और पार्टी-विरोधी गतिविधियों जैसे आरोपों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

पुराने राजनीतिक नेटवर्क से दूरी का संदेश-

भाजपा का बंगाल में राजनीतिक विस्तार तृणमूल कांग्रेस के कथित कट-मनी, सिंडिकेट और जबरन वसूली के नेटवर्क से मुक्ति दिलाने के वादे पर भी आधारित रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को इन गतिविधियों से दूर रखना बेहद अहम हो गया है।

‘हम पिछली सरकार जैसे नहीं हैं’-

मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि भाजपा पिछली सरकार जैसी नहीं है और पार्टी जो कहती है, उसे लागू करती है। उन्होंने जबरन वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा के लिए असली खतरा सिर्फ तृणमूल नेताओं का पार्टी में शामिल होना नहीं है। चुनौती यह है कि भाजपा और तृणमूल के बीच का राजनीतिक अंतर कहीं उसके अपने कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की नजर में ही कम न हो जाए

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