Fever in Children: बच्चों में बुखार होना आम बात है। सर्दी-जुकाम, गले में संक्रमण और वायरल इंफेक्शन समेत कई कारणों से बच्चों को बुखार हो सकता है। ज्यादातर मामलों में तापमान कुछ दिनों में सामान्य हो जाता है, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकते हैं।
Fever in Children: 100.4°F या उससे ज्यादा तापमान को माना जाता है बुखार-
National Health Service (NHS) के मुताबिक, बच्चों में 100.4°F (38°C) या इससे ज्यादा तापमान बुखार माना जाता है। ज्यादातर मामलों में बुखार 1 से 4 दिनों के भीतर सामान्य हो जाता है। अगर बुखार के बावजूद बच्चा पानी पी रहा है, सामान्य रूप से प्रतिक्रिया दे रहा है और कुछ हद तक एक्टिव है, तो स्थिति आमतौर पर कम चिंताजनक होती है।
Fever in Children: इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज-
बुखार के दौरान अगर बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त हो, जगाने पर भी प्रतिक्रिया न दे या लगातार रोता रहे, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। इसके अलावा सांस लेने में परेशानी या सांस लेने के लिए ज्यादा जोर लगाना भी चिंता का विषय है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है-
अगर बच्चे का बुखार 102°F या इससे ज्यादा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। इसके अलावा इन स्थितियों में भी चिकित्सकीय सलाह जरूरी है:
बुखार 2-3 दिनों से ज्यादा समय तक बना रहे।
बच्चा पानी या दूध नहीं पी रहा हो।
शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें।
सांस लेने में परेशानी हो।
बच्चा बहुत चिड़चिड़ा या सुस्त हो।
बुखार के साथ त्वचा पर दाने निकल आएं।
बच्चा 3 महीने या उससे कम उम्र का हो।
मानसून में बढ़ सकता है बुखार का खतरा-
मानसून के दौरान नमी, दूषित पानी और मच्छरों के कारण बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डेंगू और मलेरिया के अलावा चिकनगुनिया और टाइफाइड भी बुखार का कारण बन सकते हैं। फ्लू में बुखार के साथ खांसी, गले में खराश, नाक बहना और शरीर में दर्द हो सकता है। वायरल इंफेक्शन में भी बुखार के साथ नाक बहने और खांसी जैसी समस्या हो सकती है।
बच्चे को बुखार हो तो क्या करें-
बुखार के दौरान बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी और दूसरे तरल पदार्थ जैसे सूप देते रहें। बच्चे को बहुत ज्यादा कपड़ों या कंबल में न लपेटें। बुखार कम करने की दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दें। अगर बुखार लगातार बना रहे, बार-बार लौटे या बच्चे की हालत बिगड़ती दिखे, तो घरेलू उपचार के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
यह भी पढ़े- पंजाब में स्कूल शिक्षकों की सैलरी में 120% का इजाफा, भगवंत मान का बड़ा फैसला








