IIT Delhi Students Protest: IIT दिल्ली में छात्र ऋषिकेश की मौत के बाद चल रहा प्रदर्शन फिलहाल रोक दिया गया है। छात्रों और संस्थान के बीच बातचीत के बाद जांच कमेटी बनाने पर सहमति बनी। हालांकि, छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कैमरों के जरिए निगरानी किए जाने का आरोप लगाया है।
IIT Delhi Students Protest: छात्र की मौत के बाद शुरू हुआ था प्रदर्शन-
IIT दिल्ली में छात्र ऋषिकेश की मौत के बाद पिछले कई दिनों से छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों की मांगों में मेंटल हेल्थ सुविधाओं से जुड़े मुद्दे और मामले की स्वतंत्र जांच समेत कई मांगें शामिल थीं। संस्थान की ओर से छात्रों के साथ बातचीत की गई और जांच समिति बनाने पर सहमति बनी। इसके बाद छात्रों ने फिलहाल अपना प्रदर्शन रोक दिया है।
IIT Delhi Students Protest: सादे कपड़ों में पुलिस पर निगरानी का आरोप-
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद कैंपस में उनकी निगरानी की जा रही थी। छात्रों के मुताबिक, कैमरों से प्रदर्शन की रिकॉर्डिंग की गई और सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस के जवान भी कैंपस में मौजूद थे। छात्रों ने दावा किया कि प्रशासन की ओर से पुलिस की इस मौजूदगी के बारे में पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वीडियोग्राफी का विरोध करने वाली एक छात्रा के साथ धक्का-मुक्की हुई।
छात्रों ने उपद्रव के आरोपों का दिया जवाब-
प्रदर्शनकारी छात्रों पर नियमों का उल्लंघन करने और उपद्रव की कोशिश करने के आरोप भी लगाए गए थे। छात्रों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन अनुशासित और शांतिपूर्ण था। छात्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान लोगों की आवाजाही वाले रास्तों को बाधित नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि नारों में किसी तरह की भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया और प्रदर्शन के दौरान छात्रों की प्राइवेसी का ध्यान रखा गया।
जांच समिति की मांग पर बनी सहमति-
छात्रों की कई मांगों को संस्थान की ओर से स्वीकार कर लिया गया है। बाहरी जांच समिति के गठन और समिति के अध्यक्ष के चयन में छात्रों की भूमिका पर सहमति बनी है। इसके अलावा समिति में छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने और ऋषिकेश की मौत की जांच को समिति के दायरे में रखने की बात भी स्वीकार की गई है।
मेंटल हेल्थ नियम सार्वजनिक करने पर भी सहमति-
छात्रों की मांग थी कि IIT दिल्ली में मेंटल हेल्थ सपोर्ट से जुड़े सभी नियम सार्वजनिक किए जाएं। संस्थान ने इस मांग को भी स्वीकार कर लिया है। वहीं, प्रशासनिक लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने की मांग पर जांच समिति निष्पक्षता के आधार पर फैसला करेगी।
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