MODI SCO YATRA: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए किर्गिस्तान के बिश्केक का दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। यह सम्मेलन ऐसे समय हुआ जब वैश्विक स्तर पर युद्ध, आतंकवाद, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। खास बात यह भी रही कि SCO अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। भारत ने इस मौके पर संगठन के अगले 25 वर्षों के एजेंडे में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों को प्रमुख आधार बनाने की बात रखी।
पुतिन से मुलाकात, यूक्रेन युद्ध पर भारत का संदेश
बिश्केक में मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। मोदी ने यूक्रेन में जारी युद्ध को खत्म करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत सभी शांति प्रयासों का समर्थन करता है। यह मुलाकात इस लिहाज से भी अहम रही क्योंकि यह 2026 में दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी।
MODI SCO YATRA: आतंकवाद और कनेक्टिविटी पर भारत का फोकस
SCO सम्मेलन में मोदी ने आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बिना दोहरे मापदंड के कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही भारत ने कनेक्टिविटी को व्यापार और विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाओं में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए। मोदी ने SCO सहयोग को ‘Security, Connectivity and Opportunity’ यानी सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर के तीन स्तंभों पर आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
MODI SCO YATRA: जानिए SCO क्या है?
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना 15 जून 2001 को चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के साथ सदस्य देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाना है। आज SCO में 10 पूर्ण सदस्य हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।
भारत कब बना सदस्य?
भारत को 2005 में SCO में पर्यवेक्षक का दर्जा मिला था। इसके बाद भारत ने पूर्ण सदस्यता के लिए प्रक्रिया पूरी की और जून 2017 में अस्ताना शिखर सम्मेलन में भारत पूर्ण सदस्य बना। तब से भारत संगठन की बैठकों और सुरक्षा, आर्थिक तथा सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है।
सुरक्षा के लिहाज से क्यों अहम?
SCO भारत के लिए आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर महत्वपूर्ण मंच है। संगठन में चीन, रूस, पाकिस्तान और मध्य एशिया के देश शामिल हैं। भारत यहां आतंकवाद, कट्टरपंथ और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर इन देशों के साथ सीधे बहुपक्षीय संवाद कर सकता है। SCO की क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना (RATS) भी सुरक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
व्यापार और कनेक्टिविटी का फायदा
भारत के लिए SCO का महत्व केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार, ऊर्जा, परिवहन और कनेक्टिविटी बढ़ाना भारत की प्राथमिकताओं में है। 2023 में भारत की SCO अध्यक्षता के दौरान ‘SECURE’ दृष्टिकोण सुरक्षा, आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी, एकता, संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया गया था।
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