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छात्रों पर दर्ज FIR रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने Article 142 का किया इस्तेमाल

Article 142 Supreme Court:

Article 142 Supreme Court: पेपर लीक के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों को लेकर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया है।

Article 142 Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की FIR-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी शिकायतों को किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इन मामलों को पूरी तरह बंद माना जाएगा। यह आदेश पांच राज्यों की ओर से FIR रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। कोर्ट ने छात्रों को राहत देते हुए कहा कि 20 से 26 जुलाई के बीच हुई घटनाओं को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।

Article 142 Supreme Court: क्या है संविधान का Article 142-

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए विशेष शक्ति देता है। इसके तहत अदालत किसी लंबित मामले में ऐसा आदेश या निर्देश जारी कर सकती है, जिसे वह न्याय पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी समझती है। इस शक्ति का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब सामान्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए किसी मामले में पूर्ण न्याय करना संभव न हो। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 142 के तहत जारी किए गए आदेश पूरे भारत में लागू होते हैं।

2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR की अनुमति-

सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द करने के साथ एक अहम अपवाद भी रखा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी है। सरकार ने इन लोगों के बारे में गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड होने का दावा किया है। हालांकि, इनके खिलाफ कार्रवाई तभी आगे बढ़ सकेगी, जब जांच में यह सामने आए कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने किसी व्यक्ति को शारीरिक नुकसान पहुंचाया या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर अपराध किए थे।

छात्रों को मिली बड़ी राहत-

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों को आगे नहीं बढ़ाने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है

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