Stock Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत ही भारी बिकवाली के साथ हुई। BSE Sensex करीब 800 अंक तक टूटकर 76,155 के आसपास पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 269 अंक गिरकर 23,786 के स्तर तक आ गया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की करीब 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। बाजार की गिरावट सिर्फ घरेलू वजहों से नहीं आई। इसके पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड बढ़ना, कमजोर ग्लोबल बाजार और रुपये की कमजोरी जैसे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
सवाल: सबसे पहले बाजार क्यों घबराया?
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बाजार को डर है कि संघर्ष लंबा खिंचा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। खास चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, क्योंकि यह वैश्विक तेल व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। यानी युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा. तेल महंगा हुआ तो पूरी दुनिया में महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है।
Stock Market Crash Today: सवाल: कच्चा तेल बाजार के लिए इतना बड़ा खतरा क्यों है?
2. Brent Crude करीब $96 तक पहुंचा
अमेरिका-ईरान तनाव के बाद Brent crude में तेज उछाल आया। बुधवार को यह करीब $95-$96 प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। WTI भी करीब $91 के आसपास कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। इसलिए तेल महंगा होने का मतलब है- महंगा तेल, आयात बिल बढ़ेगा, रुपये पर दबाव ,महंगाई का जोखिम और कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। यही वजह है कि तेल की कीमत बढ़ते ही बाजार में खासकर ऑटो, पेंट, केमिकल और दूसरी तेल-निर्भर कंपनियों में दबाव बढ़ जाता है.
सवाल: बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार क्यों गिरता है?
3. दुनिया भर में Bond Yield बढ़ी
वैश्विक बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड ऊंचे स्तरों पर पहुंची, जबकि जापान की 10-वर्षीय यील्ड 3% तक पहुंच गई—जो कई दशकों का ऊंचा स्तर है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा मतलब है कि सुरक्षित निवेश से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक हो जाता है। ऐसे में निवेशक जोखिम वाले शेयरों से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर जा सकते हैं। इसके अलावा ऊंची यील्ड का मतलब कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होना भी है। इससे भविष्य की कमाई और वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है।
Stock Market Crash Today: सवाल: क्या सिर्फ भारत का बाजार गिरा?
4. दुनिया भर के बाजारों में बिकवाली
भारत में गिरावट वैश्विक बाजारों की कमजोरी के बीच आई। अमेरिका में Dow Jones करीब 0.79%, S&P 500 करीब 0.71% और Nasdaq करीब 1.03% गिरकर बंद हुए। एशिया में जापान का Nikkei करीब 3% और दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 3.7% तक नीचे गया। इसका मतलब साफ है- बाजार की चिंता सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर नहीं है, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में जोखिम बढ़ा है।
सवाल: रुपये की कमजोरी ने दबाव कैसे बढ़ाया?
5. रुपया 94.97 प्रति डॉलर पर खुला
बुधवार को रुपया 2 पैसे कमजोर होकर 94.97 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। बढ़ते तेल दाम और मजबूत डॉलर ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ाया। रुपये की कमजोरी भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महंगे डॉलर का मतलब आयातित सामान और खासकर कच्चे तेल की लागत बढ़ना हो सकता है। हालांकि, RBI बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?
बुधवार के शुरुआती कारोबार में IT सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। Nifty IT करीब 2% टूटा, जबकि ऑटो और रियल्टी इंडेक्स भी करीब 2% नीचे रहे। Midcap और Smallcap शेयरों में भी बिकवाली दिखाई दी। Sensex के प्रमुख शेयरों में Infosys, TCS, HCL Tech, IndiGo और M&M में खास दबाव देखा गया।
Stock Market Crash Today: 5 लाख करोड़ रुपये आखिर ‘डूबे’ कैसे?
यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए। 5 लाख करोड़ रुपये किसी बैंक खाते से निकलकर कहीं नहीं गए। यह मुख्य रूप से शेयर बाजार में कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण यानी Market Capitalisation में आई कमी है। मान लीजिए किसी कंपनी के शेयर की कीमत 1,000 रुपये से गिरकर 900 रुपये हो गई। कंपनी के करोड़ों शेयर बाजार में हैं, इसलिए प्रति शेयर 100 रुपये की गिरावट से कंपनी का कुल बाजार मूल्य अरबों रुपये घट सकता है। इसी तरह जब बड़ी संख्या में कंपनियों के शेयर एक साथ गिरते हैं तो BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप तेजी से कम हो जाता है। इसे आम भाषा में कहा जाता है-‘निवेशकों की 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई।’
क्या बाजार की गिरावट आगे भी जारी रह सकती है?
फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक तीन चीजों पर निर्भर करेगी- अमेरिका-ईरान तनाव कितना बढ़ता है, कच्चा तेल $100 के पार जाता है या नहीं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल कैसी रहती है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है और बॉन्ड यील्ड भी बढ़ती है तो भारतीय शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव आ सकता है। वहीं तनाव कम होने और तेल की कीमतों में नरमी आने पर बाजार में राहत की वापसी संभव है।
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