Saharanpur Mosque Dispute: कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद पक्ष के पास ऐसे दस्तावेजी सबूत हैं, जो अदालत में उनके पक्ष को मजबूत करते हैं।
कार्रवाई में नियम और कानून की अनदेखी की गई- इमरान मसूद
इमरान मसूद ने कहा कि मस्जिद को गिराने की कार्रवाई में नियम और कानून की अनदेखी की गई है। उन्होंने दावा किया कि किसी संपत्ति को सार्वजनिक संपत्ति घोषित करने से पहले यह साबित करना जरूरी है कि वह सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति है। मसूद के मुताबिक, उपलब्ध दस्तावेजों में अभी भी अब्दुल खान और वाहिद खान के नाम दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद मामले को लेकर उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के सामने रखे जाएंगे और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा। कांग्रेस सांसद ने प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती देने की तैयारी की बात कही है।
Saharanpur Mosque Dispute: क्या है सहारनपुर मस्जिद विवाद?
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन और मस्जिद पक्ष के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। खबर के मुताबिक, प्रशासन ने 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पब्लिक प्रिमाइसेज एक्ट (PP Act) के तहत मामला दायर किया था।

सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसके साथ ही करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश भी दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत का रुख किया। जिला जज सत्येंद्र कुमार ने भी सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने शनिवार तड़के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।
नेताओं को किया गया था नजरबंद
कार्रवाई से पहले शुक्रवार को प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर को सील कर दिया था। विरोध की आशंका को देखते हुए सपा और कांग्रेस के कुछ नेताओं को नजरबंद किए जाने की भी खबर है। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन और सहारनपुर सांसद इमरान मसूद को भी कथित तौर पर हाउस अरेस्ट किया गया था। मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद अब इमरान मसूद के सुप्रीम कोर्ट जाने के ऐलान से यह मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
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