UN World Map: संयुक्त राष्ट्र में दुनिया का नक्शा नए तरीके से पेश करने के प्रस्ताव को भारत समेत 164 देशों का समर्थन मिला है। 4 सितंबर को यह प्रस्ताव पारित हुआ, लेकिन इसके तीन दिन बाद ही भारत ने एक नक्शे को लेकर आपत्ति जताई। विवाद की वजह ‘इक्वल अर्थ मैप प्रोजेक्शन’ से जुड़ा एक राजनीतिक नक्शा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों को पाकिस्तान और चीन के क्षेत्र में दिखाया गया है। भारत की आपत्ति के बाद पाकिस्तान भी इस मुद्दे में कूद गया और जम्मू-कश्मीर पर भारत के दावे को बेबुनियाद बताया। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि दुनिया को नए नक्शे की जरूरत क्यों पड़ी, भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट क्यों दिया और फिर कश्मीर को लेकर आपत्ति क्यों जताई।
UN World Map: पुराने वर्ल्ड मैप में क्या गड़बड़ी है?
मौजूदा विश्व नक्शे को देखकर आमतौर पर रूस अफ्रीका से बड़ा दिखाई देता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। अफ्रीका का क्षेत्रफल रूस से बड़ा है। इसी तरह पुराने नक्शे में अफ्रीका और ग्रीनलैंड लगभग बराबर आकार के नजर आते हैं, जबकि अफ्रीका का क्षेत्रफल ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना ज्यादा है। दरअसल, इस अंतर की वजह पृथ्वी का गोल आकार है। हमारी धरती गोल है, लेकिन देशों और महाद्वीपों को दिखाने के लिए उसे सपाट कागज पर उतारना पड़ता है। गोल ग्लोब को सपाट नक्शे में बदलने के दौरान आकार और क्षेत्रफल में बदलाव होता है। खास तौर पर भूमध्य रेखा से दूर मौजूद इलाकों को नक्शे पर वास्तविक आकार से बड़ा दिखाया जाता है। यही वजह है कि रूस जैसे देश और ग्रीनलैंड नक्शे पर अपने वास्तविक आकार से बड़े नजर आते हैं।
1569 में बना था मर्केटर मैप
इस तरह के विश्व नक्शे को 1569 में यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने तैयार किया था। उस समय इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से समुद्री यात्राओं में जहाजों के नेविगेशन के लिए किया जाता था। हालांकि यह नक्शा दिशाओं के लिहाज से उपयोगी था, लेकिन इसमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाई नहीं देता था। समय के साथ इसी कमी को लेकर सवाल उठने लगे और एक ऐसे विश्व नक्शे की जरूरत महसूस हुई, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के करीब हो।
UN World Map: अफ्रीका से शुरू हुई नए नक्शे की मुहिम
इसी समस्या को दूर करने के लिए अफ्रीका से नए विश्व नक्शे की मुहिम शुरू हुई। क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाने के लिए ‘द इक्वल अर्थ मैप प्रोजेक्शन’ तैयार किया गया। इसमें अफ्रीका, ब्राजील और दक्षिण अमेरिका को मर्केटर मैप की तुलना में बड़ा दिखाया गया है, जबकि ग्रीनलैंड और यूरोप को मौजूदा नक्शे की तुलना में छोटा दिखाया गया है। भारत का आकार भी पुराने नक्शे के मुकाबले थोड़ा बड़ा नजर आता है।
‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को पहली बार 2018 में पेश किया गया था। फरवरी 2026 में अफ्रीकी संघ ने इसे अपनाया और अपने सदस्य देशों से स्कूलों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने की अपील की। इसके बाद 4 सितंबर को अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने संयुक्त राष्ट्र में ‘करेक्ट द मैप’, यानी ‘नक्शा सही करो’, नाम से प्रस्ताव पेश किया। इसमें ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ या देशों के वास्तविक क्षेत्रफल के आधार पर तैयार किए गए किसी अन्य नक्शे के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील की गई।

भारत समेत 164 देशों ने किया समर्थन
संयुक्त राष्ट्र में इस प्रस्ताव को भारत और पाकिस्तान समेत 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका ऐसा इकलौता देश रहा, जिसने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। वहीं यूक्रेन, सर्बिया और जॉर्जिया समेत 6 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। 4 सितंबर को प्रस्ताव पारित हो गया।हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र ने मर्केटर मैप पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। प्रस्ताव में केवल ऐसे नक्शों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिनमें देशों और महाद्वीपों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में बड़ा या छोटा दिखाया जाता है।
UN World Map: भारत ने वोट दिया, फिर नक्शे पर आपत्ति क्यों?
संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पारित होने के बाद ‘इक्वल अर्थ’ की वेबसाइट पर मौजूद एक राजनीतिक नक्शा चर्चा में आ गया। इस नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और अक्साई चिन को भारत के हिस्से के रूप में नहीं दिखाया गया है। नक्शे में जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से पाकिस्तान और चीन के क्षेत्र में नजर आते हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या भारत ने ऐसे नक्शे को मंजूरी दे दी है, जिसमें पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं दिखाया गया?
6 सितंबर को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और दुनिया के नक्शे में इन्हें भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। भारत किसी भी गलत चित्रण को स्वीकार नहीं करेगा।भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने प्रस्ताव के पक्ष में इसलिए वोट किया क्योंकि वह समान क्षेत्रफल वाले नक्शों को बढ़ावा देने का समर्थन करता है। प्रस्ताव का समर्थन करने का मतलब किसी खास नक्शे, किसी विशेष मैप प्रोजेक्शन या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण को मंजूरी देना नहीं है।
पाकिस्तान ने भारत के दावे को बताया बेबुनियाद
भारत की आपत्ति के बाद पाकिस्तान ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर ने 7 सितंबर को कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत के दावे बेबुनियाद हैं। पाकिस्तान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र माना जाता है और भारत की एकतरफा कार्रवाइयों या कथित गैर-कानूनी कब्जे से इसकी स्थिति नहीं बदल सकती।
पाकिस्तान का दावा है कि जम्मू-कश्मीर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC के सबसे पुराने अनसुलझे मामलों में से एक है। उसके मुताबिक इस विवाद का समाधान UNSC और कश्मीर की जनता के जनमत संग्रह यानी प्लेबिसाइट के जरिए होना चाहिए।वहीं पूर्व राजदूत मंजीव सिंह पुरी के मुताबिक, भारत ने सिर्फ नक्शे में भौगोलिक प्रस्तुति के पक्ष में वोट दिया है। देशों की सीमाओं को लेकर संयुक्त राष्ट्र में कोई वोट नहीं हुआ था और भारत ने भी सीमाओं के चित्रण पर वोट नहीं दिया।
UN World Map: 1947 में शुरू हुआ था कश्मीर विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद की जड़ 1947 में देश की आजादी के समय तक जाती है। 18 जुलाई 1947 को इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट पारित हुआ, जिसके तहत ब्रिटिश भारत को दो डोमिनियन- भारत और पाकिस्तान में बांटा गया। उस समय देश में 565 रियासतें थीं। इन रियासतों के पास भारत में शामिल होने, पाकिस्तान का हिस्सा बनने या स्वतंत्र रहने के तीन विकल्प थे।
कश्मीर रियासत के राजा हरि सिंह ने स्वतंत्र रहने का फैसला किया था। 12 अगस्त 1947 को कश्मीर की ओर से घोषणा की गई कि वह किसी भी देश में विलय नहीं करेगा। राजा हरि सिंह के बेटे कर्ण सिंह के मुताबिक, भारत लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ रहा था, जो उनके पिता को पसंद नहीं था। दूसरी तरफ पाकिस्तान एक मुस्लिम देश बनने जा रहा था और उसके साथ जाना भी उन्हें सही नहीं लगा।
अक्टूबर 1947 में कश्मीर पर हुआ हमला
अक्टूबर 1947 में पाकिस्तानी कबायली लड़ाकों और सेना ने कश्मीर में हमला कर दिया। करीब 5,000 कबायली लड़ाकों ने कश्मीर पर हमला किया था। उन्हें पाकिस्तान से हथियार और प्रशिक्षण मिलने की बात कही गई है। इन कबायलियों ने खुद को स्वतंत्रता सेनानी बताया था। इस दौरान गैर-मुस्लिम लोगों के नरसंहार, घरों में लूटपाट और महिलाओं के साथ रेप और अपहरण जैसी घटनाओं का भी जिक्र मिलता है।
राजा हरि सिंह इन हमलावरों को रोकने में नाकाम रहे। इसके बाद उन्होंने भारत से मदद मांगी और 26 अक्टूबर 1947 को भारत में विलय के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए। अगले दिन भारतीय सेना श्रीनगर की हवाई पट्टी पर उतरी और कबायली हमलावरों को पीछे धकेलना शुरू कर दिया। पाकिस्तान भी पूरी ताकत के साथ युद्ध में शामिल हो गया और दोनों पक्षों के बीच गतिरोध की स्थिति बन गई।
UN World Map: मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचा
31 दिसंबर 1947 को भारत कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र में ले गया। करीब 1 साल, 2 महीने और 5 दिन तक चली लड़ाई के बाद 1 जनवरी 1949 को सीजफायर हुआ। दोनों देशों की सेनाएं जिस जगह पर थीं, वहीं रुक गईं। जुलाई 1949 में इस स्थिति को सीजफायर लाइन माना गया।
उस समय तक कश्मीर के करीब 34 प्रतिशत हिस्से यानी लगभग 83,157 वर्ग किलोमीटर जमीन पर पाकिस्तान का कब्जा था। इसी क्षेत्र को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पारित हुआ था, जिसमें कश्मीर की जनता से मतदान कराने की बात कही गई थी। इस मतदान के जरिए लोगों को यह तय करना था कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं या पाकिस्तान के साथ। हालांकि यह जनमत संग्रह कभी नहीं हो पाया।
चीन भी विवाद का हिस्सा बना
1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीन ने भारत के अक्साई चिन क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 1963 में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान की शक्सगाम घाटी चीन को दे दी। यह एक सीमा समझौते के तहत किया गया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर का क्षेत्र अलग-अलग हिस्सों में बंट गया, जिन पर भारत, पाकिस्तान और चीन का अलग-अलग नियंत्रण है।
UN World Map: जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्से
जम्मू-कश्मीर के मौजूदा विभाजन में 6 प्रमुख हिस्सों का उल्लेख किया जाता है। भारत पूरे जम्मू-कश्मीर पर अपना अधिकार मानता है, जबकि इनमें से कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान और चीन का नियंत्रण है।पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में आजाद जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल हैं। पाकिस्तान आजाद जम्मू-कश्मीर को एक स्वायत्त क्षेत्र के रूप में बताता है। वहीं गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान का प्रशासनिक नियंत्रण है।चीन के कब्जे वाले हिस्सों में अक्साई चिन और शक्सगाम वैली शामिल हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान चीन ने अक्साई चिन पर कब्जा किया था। शक्सगाम वैली पहले गिलगित-बाल्टिस्तान का हिस्सा थी, जिसे 1963 के सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने चीन को सौंप दिया।
भारत के नियंत्रण वाले हिस्सों में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और सियाचिन शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में जम्मू क्षेत्र, पीर पंजाल पर्वतमाला और हिमालय के बीच स्थित कश्मीर घाटी आती है। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग करके लद्दाख को नया केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। वहीं सियाचिन लद्दाख के उत्तर-पश्चिमी छोर पर काराकोरम पर्वतमाला में स्थित है और इसे दुनिया का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र माना जाता है।
भारत का संवैधानिक रुख क्या है?
भारतीय संविधान के अनुसार PoK समेत पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत इसी संवैधानिक स्थिति को मानता है। रिपोर्टिंग में ‘आजाद जम्मू-कश्मीर’, ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ जैसे नामों का इस्तेमाल संबंधित क्षेत्रों के प्रचलित नामों के तौर पर किया जाता है।
UN World Map: शिमला समझौते के बाद भारत की नीति
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हुए शिमला समझौते में दोनों देशों ने तय किया था कि वे अपने विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से और बिना किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के सुलझाएंगे। भारत का आज भी यही रुख है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है। भारत का मानना है कि इस मामले में संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य देश की दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।








