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PG बनाने के क्या हैं नियम? सत्य निकेतन हादसे के बाद जानिए रजिस्ट्रेशन से लेकर फायर सेफ्टी तक पूरा सिस्टम

Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारत गिरने और सात लोगों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है आखिर दिल्ली में किसी मकान या बिल्डिंग को PG बनाकर चलाने के लिए क्या-क्या नियम जरूरी हैं? क्या कोई भी रिहायशी मकान किराए पर कमरों की तरह देकर PG के तौर पर चलाया जा सकता है? और बिल्डिंग की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होती है?

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार PG और हॉस्टल को लेकर एक नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर काम कर रही है। प्रस्तावित Paying Guest Accommodation Regulation and Safety Bill, 2026 में PG के रजिस्ट्रेशन से लेकर ऑपरेटिंग लाइसेंस, सुरक्षा जांच और किराये के नियमन तक कई प्रावधान प्रस्तावित हैं।

क्या हर PG का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा?

प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली में चलने वाले हर PG का सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने की व्यवस्था प्रस्तावित है। रजिस्टर्ड PG को एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा। प्रस्तावित पोर्टल पर PG की क्षमता, किराये में बदलाव और सुरक्षा ऑडिट जैसी जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि छात्र या दूसरे निवासी PG लेने से पहले उसकी जानकारी देख सकें।

Satya Niketan Building Collapsed: सिर्फ रजिस्ट्रेशन नहीं, ऑपरेटिंग लाइसेंस भी?

हां। प्रस्तावित व्यवस्था में PG संचालक को संबंधित लोकल जोन अथॉरिटी से PG Operating Licence लेना होगा। प्रस्ताव के मुताबिक, कानून लागू होने के बाद PG संचालकों को लाइसेंस लेने के लिए 90 दिनों की समयसीमा दी जा सकती है। यानी सिर्फ मकान को PG की तरह इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके संचालन के लिए भी औपचारिक अनुमति जरूरी होगी।

बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल सेफ्टी क्यों सबसे अहम?

सत्य निकेतन हादसे के बाद यह सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। PG में सामान्य घर की तुलना में एक साथ ज्यादा लोग रहते हैं। इसलिए भवन की संरचनात्मक मजबूती, स्वीकृत नक्शे और इस्तेमाल की अनुमति का पालन बेहद जरूरी है।प्रस्तावित PG व्यवस्था में स्ट्रक्चरल सेफ्टी क्लीयरेंस और नियमित सुरक्षा ऑडिट को शामिल करने की बात है। खासकर पुरानी या अधिक लोगों को रखने वाली इमारतों की सुरक्षा जांच महत्वपूर्ण होगी।

Satya Niketan Building Collapsed: क्या बिना मंजूरी अतिरिक्त मंजिल या बेसमेंट बनाया जा सकता है?

नहीं। किसी इमारत में स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के विपरीत निर्माण करना अलग से कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। सत्य निकेतन हादसे के बाद अनधिकृत बेसमेंट निर्माण और बिल्डिंग की संरचनात्मक सुरक्षा पर भी सवाल उठे हैं। इसलिए PG के मामले में यह देखना जरूरी है कि इमारत का निर्माण स्वीकृत नक्शे और लागू भवन नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं।

फायर सेफ्टी के क्या नियम हैं?

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है- हर PG के लिए एक ही ऊंचाई या 20 लोगों वाला नियम लागू मान लेना सही नहीं है। दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक फायर सेफ्टी की जरूरत भवन की occupancy category, ऊंचाई और फ्लोर एरिया जैसे मानकों पर निर्भर करती है।

दिल्ली फायर सर्विस के नियमों के तहत कुछ निर्धारित श्रेणी की इमारतों को फायर सेफ्टी NOC/अनुमोदन लेना होता है। उदाहरण के तौर पर निर्धारित मानकों के तहत 15 मीटर से अधिक ऊंची कुछ रिहायशी इमारतें, 12 मीटर से अधिक ऊंचे होटल/गेस्ट हाउस और निर्धारित ऊंचाई वाली शैक्षणिक व संस्थागत इमारतें फायर नियमों के दायरे में आती हैं।फायर NOC की प्रक्रिया निर्माण से पहले और निर्माण पूरा होने के बाद, दोनों चरणों में लागू हो सकती है, जहां संबंधित भवन नियमों के तहत NOC जरूरी हो।

Satya Niketan Building Collapsed: MCD की मंजूरी क्यों जरूरी?

PG के संचालन में सिर्फ मालिक और किरायेदार के बीच का समझौता पर्याप्त नहीं है। भवन का भूमि उपयोग, स्वीकृत नक्शा, निर्माण नियम, स्वच्छता और अन्य स्थानीय निकाय मानकों का पालन भी जरूरी है। इसीलिए प्रस्तावित PG कानून में नगर निकाय की मंजूरी और स्ट्रक्चरल-फायर सेफ्टी से जुड़ी क्लीयरेंस को भी औपचारिक व्यवस्था में शामिल करने की बात कही गई है।

Satya Niketan Building Collapsed
                                                                                      Satya Niketan Building Collapsed
रहने वालों का पुलिस वेरिफिकेशन भी होगा?

प्रस्तावित व्यवस्था में पुलिस वेरिफिकेशन को भी शामिल किया गया है। इसका मकसद PG में रहने वाले लोगों का रिकॉर्ड बनाए रखना और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं को कम करना है। इसके अलावा प्रस्तावित नीति में CCTV, सुरक्षा व्यवस्था, विजिटर रिकॉर्ड और वार्डन जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।

Satya Niketan Building Collapsed: क्या PG का किराया भी तय होगा?

प्रस्तावित कानून में PG के लिए जोन के हिसाब से रेंट बैंड बनाने की योजना है। इसके तहत बाजार दर, रहने की सुविधा, कमरा साझा है या अलग, उपलब्ध सुविधाएं और शिक्षण संस्थानों/परिवहन केंद्रों से दूरी जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर किराये की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इसका मकसद छात्रों और दूसरे निवासियों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतों को कम करना है।

क्या ये सभी नियम अभी लागू हो चुके हैं?

नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। Paying Guest Accommodation Regulation and Safety Bill, 2026 फिलहाल प्रस्तावित कानून है। इसके कई प्रावधान अभी नीति/कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इसलिए इन्हें वर्तमान में लागू अंतिम नियम के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए। हालांकि, मौजूदा भवन, नगर निगम और फायर सेफ्टी नियम अपनी-अपनी श्रेणी और लागू प्रावधानों के अनुसार पहले से मौजूद हैं। दिल्ली फायर सर्विस भी भवन की श्रेणी और ऊंचाई के आधार पर फायर सेफ्टी आवश्यकताओं को लागू करती है।

Satya Niketan Building Collapsed: सत्य निकेतन हादसे के बाद क्या बदलेगा?

सत्य निकेतन हादसे के बाद सरकार ने PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से ध्यान देना शुरू किया है। MCD ने बड़ी संख्या में PG का सुरक्षा सर्वे भी शुरू किया है और PG हब में स्ट्रक्चरल ऑडिट की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल- क्या अब PG पर होगी सख्त निगरानी?

सत्य निकेतन हादसे ने यह सवाल सामने ला दिया है कि किसी रिहायशी इमारत में ज्यादा लोगों को रखकर PG चलाने से पहले उसकी क्षमता और सुरक्षा की जांच कितनी जरूरी है। प्रस्तावित नई व्यवस्था में रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, पुलिस वेरिफिकेशन, नगर निकाय की मंजूरी, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और किराये के नियमन को एक सिस्टम में लाने की कोशिश है। अब असली चुनौती सिर्फ नियम बनाने की नहीं, बल्कि जमीन पर उनका सख्ती से पालन कराने की होगी।

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