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पुतिन लाएंगे Su-57 का ‘ऑफर’, भारत को क्या मिलेगा? 75 फाइटर जेट से बदल सकती है वायुसेना की ताकत, समझिए पूरा गेम

BRICS Summit 2026: BRICS समिट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात सिर्फ कूटनीतिक नजरिए से अहम नहीं है। इस बैठक में रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 की संभावित बिक्री और उससे जुड़ी तकनीक भारत को देने पर भी चर्चा हो सकती है। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि Su-57 की बिक्री पुतिन की बैठक के एजेंडे में है और भारत के साथ तकनीक साझा करने को लेकर बातचीत चल रही है।

मीडिया रिपोर्टों में 75 Su-57 विमानों और करीब ₹1 लाख करोड़ तक के संभावित पैकेज की बात कही जा रही है। हालांकि, इस संख्या और कीमत को अभी अंतिम सरकारी समझौता नहीं माना जा सकता। असली सवाल यह है कि अगर भारत Su-57 खरीदता है तो उसे केवल लड़ाकू विमान मिलेंगे या साथ में ऐसी तकनीक भी मिलेगी, जिससे भविष्य में भारत खुद एडवांस फाइटर जेट बनाने की क्षमता मजबूत कर सके।

सवाल 1: मोदी-पुतिन की बैठक में Su-57 इतना अहम क्यों?

प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक 11 सितंबर को होने वाली है, जबकि BRICS नेताओं का मुख्य सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। रूस के लिए भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा साझेदारों में से एक है। भारत के लिए भी रूस लंबे समय से रक्षा उपकरण, मिसाइल, परमाणु ऊर्जा और सैन्य तकनीक का प्रमुख सहयोगी रहा है।31 अगस्त को बिश्केक में मोदी और पुतिन की मुलाकात में दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, अर्थव्यवस्था और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। अब दिल्ली में होने वाली बैठक में इन्हीं मुद्दों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

BRICS Summit 2026: सवाल 2: भारत Su-57 क्यों चाहता है?

भारतीय वायुसेना के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक आधुनिक लड़ाकू विमानों की संख्या और भविष्य की जरूरत है। भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का AMCA अभी विकास के चरण में है और उसके आने में समय लगेगा। ऐसे में Su-57 को एक संभावित अंतरिम विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। रूस भारत को विमान बेचने के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्थानीय उत्पादन की पेशकश कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत की दिलचस्पी केवल विमान खरीदने में नहीं, बल्कि उत्पादन तकनीक तक पहुंच में भी है। यही इस पूरी बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सवाल 3: अगर सिर्फ 75 विमान मिलें तो क्या बदलेगा?

Su-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर है। इसकी खासियत सिर्फ तेज गति नहीं, बल्कि कम रडार सिग्नेचर, सेंसर, हथियार और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता का संयोजन है। अगर भारत इसे अपने मौजूदा Rafale, Su-30MKI, AWACS, ग्राउंड रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के साथ प्रभावी तरीके से जोड़ पाता है, तो अलग-अलग प्लेटफॉर्म की क्षमताओं को एक नेटवर्क में इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ सकती है। यानी Su-57 की भूमिका सिर्फ एक और फाइटर जोड़ने तक सीमित नहीं होगी। यह दुश्मन के एयर डिफेंस और रडार नेटवर्क के खिलाफ शुरुआती चरण के अभियानों में भी उपयोगी हो सकता है।

BRICS Summit 2026: सवाल 4: भारत के लिए असली फायदा विमान है या टेक्नोलॉजी?

सबसे बड़ा फायदा तकनीक हो सकता है। रूस ने संकेत दिया है कि भारत Su-57 की उत्पादन तकनीक में रुचि रखता है। लेकिन पेस्कोव ने यह भी स्पष्ट किया कि अत्याधुनिक सैन्य तकनीक साझा करना संवेदनशील विषय है और इस पर अतिरिक्त बातचीत जरूरी होगी। अगर भारत को महत्वपूर्ण तकनीक, उत्पादन क्षमता और पर्याप्त औद्योगिक भागीदारी मिलती है तो इसका असर सिर्फ Su-57 कार्यक्रम तक नहीं रहेगा। इससे भारत की: एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग, एवियोनिक्स, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम
इंजन तक, हथियार एकीकरण, मेंटेनेंस और और स्पेयर पार्ट्स भविष्य के स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम जैसे क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है। यही कारण है कि भारत के लिए “कितने विमान?” से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल “कितनी तकनीक?” है।

सवाल 5: क्या Su-57 भारत के AMCA की जगह ले सकता है?

नहीं। अगर भारत Su-57 खरीदता भी है तो इसे AMCA का स्थायी विकल्प मानना सही नहीं होगा। AMCA भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान कार्यक्रम है। Su-57 खरीदना तत्काल क्षमता बढ़ाने का रास्ता हो सकता है, जबकि AMCA का उद्देश्य लंबे समय में भारत को अपनी डिजाइन और उत्पादन क्षमता देना है। इसलिए दोनों को एक-दूसरे के विकल्प के बजाय अलग-अलग समय की जरूरतों के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।

BRICS Summit 2026: सवाल 6: Su-57 और अमेरिकी F-35 में कौन आगे?

दोनों पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर हैं, लेकिन उनकी डिजाइन प्राथमिकताएं अलग हैं। Su-57 में स्टील्थ के साथ गति, गतिशीलता और लंबी दूरी की लड़ाकू क्षमता पर भी जोर दिया गया है। वहीं F-35 को अत्याधुनिक सेंसर फ्यूजन, स्टील्थ और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है। इसलिए केवल टॉप स्पीड देखकर यह कहना कि एक विमान दूसरे से बेहतर है, सही तुलना नहीं होगी। आधुनिक हवाई युद्ध में सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, हथियार, डेटा लिंक और दूसरे प्लेटफॉर्म के साथ नेटवर्किंग भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

सवाल 7: क्या भारत पहले रूस के पांचवीं पीढ़ी के प्रोजेक्ट से पीछे हट चुका है?

हां, भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) कार्यक्रम में शामिल था, लेकिन बाद में यह परियोजना आगे नहीं बढ़ी। उस समय विमान की स्टील्थ क्षमता, इंजन, एवियोनिक्स और तकनीक साझा करने जैसे मुद्दों पर भारतीय पक्ष की चिंताएं सामने आई थीं। अब Su-57 पर बातचीत में भारत के लिए यही अनुभव महत्वपूर्ण होगा। इसलिए संभावित समझौते में केवल कीमत और विमान की संख्या नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय उत्पादन और सपोर्ट सबसे अहम मुद्दे होंगे।

BRICS Summit 2026: सवाल 8: Su-57 के साथ और क्या डील हो सकती है?

मोदी-पुतिन बैठक का एजेंडा केवल Su-57 तक सीमित नहीं है। रूसी पक्ष ने S-400 की डिलीवरी, ब्रह्मोस के उन्नयन और भारत में नई परमाणु परियोजनाओं पर भी बातचीत के संकेत दिए हैं। कुडनकुलम परमाणु परियोजना के बाद दोनों देश भारत में परमाणु ऊर्जा सहयोग को और आगे बढ़ाने पर भी चर्चा कर सकते हैं। इसका मतलब है कि बैठक में रक्षा से लेकर ऊर्जा और तकनीक तक कई बड़े समझौते एक साथ चर्चा में रह सकते हैं।

BRICS Summit 2026
BRICS Summit 2026
सवाल 9: यूक्रेन युद्ध का क्या असर पड़ेगा?

भारत और रूस के रिश्तों में यूक्रेन युद्ध सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष के समाधान की बात करता रहा है। 31 अगस्त को मोदी-पुतिन की बैठक में भी पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्षों पर चर्चा हुई थी और प्रधानमंत्री ने संवाद एवं कूटनीति को आगे का रास्ता बताया था। रूस ने भी कहा है कि वह यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में भारत के प्रयासों का स्वागत करेगा। इसलिए Su-57 डील के साथ यह बैठक भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का भी संदेश दे सकती है—भारत रूस से रक्षा सहयोग जारी रखते हुए अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध भी बनाए रखना चाहता है।

BRICS Summit 2026: सवाल 10: क्या रूस पर ज्यादा निर्भरता भारत के लिए जोखिम है?

यही इस संभावित डील का दूसरा पहलू है। भारत लंबे समय से रूसी मूल के बड़े रक्षा प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करता रहा है। लेकिन आधुनिक युद्ध में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड, हथियार और सप्लाई चेन के स्तर पर जोखिम पैदा कर सकती है। इसलिए भारत का लक्ष्य केवल रूस से नए हथियार खरीदना नहीं, बल्कि Make in India, स्थानीय उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ाना भी होगा।

सबसे बड़ा सवाल: क्या 11 सितंबर को Su-57 डील पर साइन हो जाएगा?

अभी इसे पक्का नहीं कहा जा सकता। रूस ने पुष्टि की है कि Su-57 की बिक्री और तकनीक साझा करने का मुद्दा मोदी-पुतिन बातचीत के एजेंडे में है। लेकिन 75 विमानों की संख्या, करीब ₹1 लाख करोड़ की कीमत और उसी बैठक में अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर—इन तीनों को अभी अलग-अलग देखना जरूरी है। अगर समझौता होता है तो भारत के लिए असली उपलब्धि सिर्फ 75 नए लड़ाकू विमान नहीं होगी। असली गेमचेंजर वह तकनीक और उत्पादन क्षमता होगी जो भारत इस सौदे के बदले हासिल कर सके।

BRICS की कूटनीति के बीच होने वाली मोदी-पुतिन बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके एजेंडे में Su-57, S-400, ब्रह्मोस, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और यूक्रेन जैसे मुद्दे एक साथ हैं। अगर Su-57 पर समझौता आगे बढ़ता है और भारत को पर्याप्त तकनीकी अधिकार तथा स्थानीय उत्पादन की सुविधा मिलती है, तो यह सिर्फ रूस से एक और लड़ाकू विमान खरीदने की डील नहीं होगी। यह भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री और भविष्य की वायु शक्ति को मजबूत करने की कोशिश होगी।

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