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आखिर PG के बच्चे ‘मकान माफिया’ के खौफ में करें तो क्या करें, भविष्य बनाएं या जीवन बचाएं?

New Delhi: आखिर PG के बच्चे 'मकान माफिया' के खौफ में करें तो क्या करें, भविष्य बनाएं या जीवन बचाएं?
New Delhi: देश के विभिन्न हिस्सों से मां-बाप अपने बच्चों को दिल्ली पढ़ने भेजते हैं।बच्चों की आंखों में भी उज्जवल भविष्य के सपने होते हैं, लेकिन उनके सामने पढ़ाई से बड़ी चुनौती यह होती है कि जिन पीजी (PG) हॉस्टल को वे अपना ठिकाना बनाते हैं, उनके मालिक माफिया जैसा कठोर व्यवहार करते हैं। वे बच्चों से जमकर लूट-खसोट करते हैं।

दमघोंटू माहौल में जीने को विवश हो जाते हैं बच्चे

पीजी (PG) हॉस्टल संचालकों द्वारा मोटी रकम ऐंठने के बावजूद बच्चों को दमघोंटू माहौल में जीने को विवश किया जाता है।इतना ही नहीं मोटी कमाई के लालच में उन मासूमों को मौत के मुंह में भी धकेल दिया जाता है।कारण कि ये PG जर्जर मकानों में संचालित होते हैं। इनकी दुर्दशा देखने की न तो किसी के पास फुर्सत होती है और न किसी को जरूरत महसूस होती है।मकान माफिया को न तो कानून का डर होता है और न ही समाज का।सत्य निकेतन हादसे के बाद खुलासा हुआ है कि दिल्ली के पीजी हॉस्टल में कैसे छोटे से छोटे सिंगल या शेयरिंग रूम का किराया 7500 से 8000 प्रति छात्र तक वसूला जा रहा है।

New Delhi: बच्चों के साथ मनमाने तरीके से लूट 

पीजी हॉस्टल संचालकों या मकान मालिकों द्वारा बच्चों के साथ अमानवीयता को देखते हुए उन्हें माफिया कहना ज्यादा उचित होगा।वे बच्चों  की मजबूरी का नाजायज फायदा उठाकर उनसे मनमाना पैसा वसूलते हैं।सिक्योरिटी के नाम पर मोटा पैसा जमा कराते हैं और उसके बाद उन्हें ऐसे दमघोंटू माहौल में रहने को विवश किया जाता है, जहां हवादार खिड़कियां भी नहीं होती हैं।सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होते और मौत सिर पर मंडराती रहती है। अगर कोई बच्चा ऐसे खतरनाक माहौल को छोड़कर दूसरी जगह शिफ्ट होना चाहे तो, उसे सिक्योरिटी के नाम पर जमा पैसा नहीं लौटाया जाता है।पीजी मालिक शुरुआत में ही बच्चों से 11 महीने का कड़ा एग्रीमेंट साइन करवा लेते हैं।अगर कोई बच्चा खराब खाने या सुरक्षा के कारण समय से पहले पीजी छोड़ना चाहे , तो एग्रीमेंट की शर्त दिखाकर उसकी पूरी सिक्योरिटी मनी और एडवांस पैसे जब्त कर लिये जाते हैं। 

New Delhi: बच्चों के शोषण की इंतिहा

बच्चों के शोषण की इंतिहा यह है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद जो बच्चे अपने पीजी हॉस्टल को खतरनाक समझकर दूसरी जगहों पर शिफ्ट होना चाहते थे, सिक्योरिटी के नाम पर जमा उनका पैसा लौटाने में मकान माफिया को परेशानी होने लगी। इतना सबकुछ घटित होने के बाद भी मकान मालिकों में प्रशासन और सरकार का कोई खौफ नहीं है, तो इसके गहरे मायने हैं।ऐसा लगता है कि या तो उन्हें कहीं से उच्च राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है या फिर उन्हें घमंड है कि वे अपने पैसे के दम पर कुछ भी कर सकते हैं। संकट की घड़ी में बच्चों के साथ खुलेआम अमानवीयता हैरान करने वाली है। 

New Delhi: यूं ब्लैकमेल किये जाते हैं बच्चे

बच्चों के मां-बाप की गलती यह होती है कि वे पीजी (PG ) हॉस्टल  संचालकों पर अंधा विश्वास कर लेते हैं।वे न तो यह देखने की कोशिश करते हैं कि पीजी कितने सुरक्षित हैं और न यह देखते हैं कि पीजी संचालकों का व्यवहार कैसा है।पीजी संचालक इसका नाजायज फायदा उठाते हैं। जब कभी बच्चे पीजी की खराब सुविधाओं, खाने की क्वालिटी या फीस बढ़ने की शिकायत करते हैं, तो पीजी संचालक उल्टे उन्हें धमकाते हैं कि चुप रहिए।तुम्हारे मां-बाप से झूठी शिकायत कर देंगे कि तुम गलत दिशा और गलत संगति में जा रहे हो। बेचारे बच्चे मन मारकर चुप रह जाते हैं।

New Delhi: क्यों चुप रह जाते हैं बच्चे?

कई बच्चे तो इसलिए भी चुप रह जाते हैं कि उनकी सिक्योरिटी मनी और एडवांस पैसे जब्त कर लिए जाएंगे।मध्यवर्गीय परिवारों के इन बच्चों के लिए इन पैसों की बहुत बड़ी अहमियत होती है।वे अपने मां-बाप की आर्थिक स्थिति से वाकिफ होते हैं।अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाने पर बच्चों को गाली-गलौज, मारपीट और दुर्व्यवहार का शिकार भी होना पड़ता है। उन्हें धमकियां दी जाती हैं कि कहीं भी शिकायत कर लो, हमारा कुछ बिगड़ने वाला नहीं। इस बीच जिन कुछ बच्चों ने अपने खतरनाक पीजी को छोड़ने का मन बनाया और सिक्योरिटी मनी वापस मांगा, तो उन्हें भी इसी तरह की धमकियां मिली।