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हरतालिका तीज पर क्यों बनाई जाती है मिट्टी की प्रतिमा? जानिए माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी खास परंपरा

हरतालिका तीज पर शिवलिंग बनाने की विधि

Hartalika Teej: हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस पर्व से जुड़ी एक खास परंपरा इसे दूसरे व्रतों से अलग बनाती है। कई जगहों पर महिलाएं बाजार से बनी हुई प्रतिमा खरीदने के बजाय अपने हाथों से मिट्टी या बालू से शिवलिंग के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की आकृति बनाती हैं। आखिर इस परंपरा के पीछे क्या मान्यता है और पूजा में मिट्टी की प्रतिमा क्यों बनाई जाती है, आइए जानते हैं।

Hartalika Teej: पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है व्रत

हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं। वर्ष 2026 में हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा।इस दिन कई जगहों पर महिलाएं मिट्टी या बालू से शिवलिंग के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की छोटी प्रतिमाएं खुद तैयार करती हैं। इसके पीछे धार्मिक मान्यता और माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी कथा बताई जाती है।

माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने की परंपरा माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी है। कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसी दौरान उनके विवाह की बात भगवान विष्णु से होने लगी। यह जानकर माता पार्वती अपनी सखियों के साथ वन में चली गईं।वन में उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन साधना शुरू की। मान्यता है कि तपस्या के दौरान माता पार्वती ने अपने हाथों से मिट्टी या रेत का शिवलिंग बनाया और पूरी श्रद्धा के साथ उसकी पूजा की। उन्होंने पूरी रात जागकर तप और आराधना की।

Hartalika Teej: हरतालिका तीज पर शिवलिंग बनाने की विधि
हरतालिका तीज पर शिवलिंग बनाने की विधि

माता पार्वती की कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसी कथा की याद में हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाने की परंपरा मानी जाती है।इस परंपरा के जरिए महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ-साथ माता पार्वती के दृढ़ संकल्प, तपस्या और समर्पण को भी याद करती हैं।

Hartalika Teej: मिट्टी से शिवलिंग बनाने का क्या है अर्थ?

हरतालिका तीज पर मिट्टी से शिवलिंग बनाने का आध्यात्मिक महत्व भी माना जाता है। मिट्टी को पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। सनातन परंपरा में मानव शरीर को भी पंचतत्वों से बना हुआ माना गया है।मिट्टी से शिवलिंग बनाना यह संदेश देता है कि भगवान की पूजा के लिए धन-दौलत, भौतिक वैभव या महंगी पूजा सामग्री जरूरी नहीं है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा, भावना और सच्चा संकल्प माना जाता है।पूजा के बाद मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन भी विशेष अर्थ रखता है। इसे जीवन और संसार की नश्वरता से जोड़कर देखा जाता है। इसका भाव यह है कि दुनिया की सभी भौतिक चीजें अस्थायी हैं और अंत में प्रकृति में ही मिल जाती हैं।

हरतालिका तीज पर ऐसे करें मिट्टी के शिवलिंग की पूजा

हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से शिवलिंग के साथ भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की छोटी-छोटी आकृतियां तैयार करें। इसके बाद इन्हें साफ चौकी पर स्थापित करें और सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें।इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। शिवलिंग पर जल, पंचामृत, चंदन, अक्षत, फूल और बेलपत्र चढ़ाएं।अगर शिवलिंग बालू से बनाया गया है, तो उस पर ज्यादा पानी न चढ़ाएं। प्रतिमा के टूटने का डर हो तो केवल कुछ बूंदों से प्रतीकात्मक अभिषेक किया जा सकता है।माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी और अन्य सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ करें या उसका श्रवण करें।अंत में भगवान शिव के मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और आरती करें।