Home » उत्तराखंड » निठारी कांड-आरोपी सुरेंद्र कोली का शव फंदे पर मिला:13 मामलों में फांसी, फिर बरी; नर कंकाल मिलने से खुला था राज

निठारी कांड-आरोपी सुरेंद्र कोली का शव फंदे पर मिला:13 मामलों में फांसी, फिर बरी; नर कंकाल मिलने से खुला था राज

निठारी कांड: सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत

Surendra Koli Death: निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिछले कुछ महीनों से वह हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था और भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान चला रहा था। उसका शव चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला।करीब 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे आखिरी मामले में भी बरी कर दिया था, जिसके बाद वह जेल से बाहर आया था। नोएडा के निठारी इलाके में 2005-06 के दौरान कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामलों में सुरेंद्र कोली का नाम सामने आया था।

Surendra Koli Death: नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद मचा था हड़कंप

29 दिसंबर 2006 को कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे स्थित नाले से मानव अवशेष बरामद हुए थे। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई और सुरेंद्र कोली के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए।कोली को निठारी से जुड़े 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे 12 मामलों में बरी कर दिया। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था।

निठारी कांड: सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत
निठारी कांड: सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत
चार दिन पहले ही किराए पर ली थी चाय की दुकान

सुरेंद्र कोली कुछ महीने पहले हरिद्वार पहुंचा था। यहां वह अकेले रह रहा था और अपनी असली पहचान छिपाकर जीवन बिता रहा था। करीब 15 दिन पहले उसने सिडकुल की एक कंपनी में काम शुरू किया था। वहां उसने अपना नाम सदाराम बताया था, इसलिए कंपनी में काम करने वाले लोगों को उसके असली नाम के बारे में जानकारी नहीं थी।

करीब चार दिन पहले उसने सप्तऋषि चौकी क्षेत्र में लाल मंदिर के पास सड़क किनारे एक छोटी दुकान किराए पर ली थी। वह इस दुकान पर चाय बेच रहा था। पड़ोसियों के अनुसार, दुकान लेने के लिए उसने मालिक को कुछ महीनों का किराया एडवांस में दिया था।इलाके में कुंभ की तैयारियों के चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है। पड़ोसियों का कहना है कि सुरेंद्र कोली को दुकान हटाए जाने और एडवांस के पैसे फंसने की चिंता थी। शुक्रवार सुबह इसी दुकान के अंदर उसका शव पंखे से लटका हुआ मिला।

Surendra Koli Death: निठारी में मिली थीं खोपड़ियां और हड्डियां

2005-06 के दौरान नोएडा के निठारी इलाके से कई बच्चे और महिलाएं लापता होने लगे थे। इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी D-5 तक पहुंची। कोठी के पीछे नाले और उसके आसपास से कई मानव खोपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और अन्य सामान बरामद हुए।इसके बाद पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया। जनवरी 2007 में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। पुलिस ने गुमशुदगी और अपराध से जुड़े 19 अलग-अलग FIR दर्ज किए थे। इनमें से 16 मामलों में CBI ने चार्जशीट दाखिल की। इन मामलों में कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे आरोप लगाए गए थे।

Surendra Koli Death: कबूलनामे और बरामदगी पर उठे सवाल

सुरेंद्र कोली को उसके कबूलनामे और उसकी निशानदेही पर हुई बरामदगी के आधार पर दोषी ठहराया गया था। निठारी से जुड़े 13 मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई। बाद में अदालत में उसके कबूलनामे और बरामदगी को लेकर सवाल उठे।2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि करीब 60 दिन की पुलिस हिरासत के बाद दर्ज किए गए कबूलनामे को भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इन 12 मामलों में कोली को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।इसके बाद उसके खिलाफ केवल एक मामला बचा था। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर उसे बरी कर दिया। इसके बाद करीब 19 साल जेल में बिताने के बाद वह बाहर आया था।

Surendra Koli Death: सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या
सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या
निठारी कांड: कब-क्या हुआ?

7 अक्टूबर 2006: स्थानीय अदालत के आदेश के बाद 22 साल की एक युवती के लापता होने की पहली FIR दर्ज हुई।

29 दिसंबर 2006: पुलिस को D-5 कोठी के पास नाले से 8 कंकाल मिले। इसके बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया।

10 जनवरी 2007: उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी। CBI ने 16 मामलों में दुष्कर्म, हत्या, अपहरण और अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज की।

1 मार्च 2007: सुरेंद्र कोली ने 6 नाबालिगों और एक युवती के साथ दुष्कर्म करने की बात कबूल की।

13 फरवरी 2008: गाजियाबाद की CBI अदालत ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को मौत की सजा सुनाई।

24 दिसंबर 2012: एक अन्य मामले में सुरेंद्र कोली को भी मौत की सजा सुनाई गई।

20 जुलाई 2014: तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सुरेंद्र कोली की दया याचिका खारिज कर दी।

8 सितंबर 2014: इंदिरा जयसिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की 2 जजों की बेंच ने रात करीब डेढ़ बजे उसकी फांसी पर रोक लगा दी।

29 अक्टूबर 2014: सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोर्ट के फैसलों में कोई गलती नहीं है।

29 जनवरी 2015: रिव्यू पिटीशन में हुई देरी को देखते हुए हाईकोर्ट की 2 जजों की बेंच ने उसकी फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।

2 मार्च 2019: ट्रायल कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को 10वें हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई।

2022: ट्रायल कोर्ट ने निठारी मामले से जुड़े सभी 16 मामलों की सुनवाई पूरी कर ली।

16 अक्टूबर 2023: हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को मौत की सजा वाले सभी 12 मामलों में बरी कर दिया। मोनिंदर सिंह पंढेर को भी मौत की सजा वाले 2 मामलों में बरी किया गया।

4 मई 2024: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को बरी किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल मामले की सुनवाई के लिए सहमति दी।

30 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने सभी 14 अपीलें खारिज कर दीं और मोनिंदर सिंह पंढेर तथा सुरेंद्र कोली को बरी करने के हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

लंबित मामला: सुरेंद्र कोली के खिलाफ अभी एक मामला लंबित बताया गया है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।