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इस्लामिक देश होने के बावजूद पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तकरार क्यों? जानें विवाद की असली वजह

Pakistan Afghanistan Conflict:

Pakistan Afghanistan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही मुस्लिम बहुल देश हैं। दोनों देशों की बड़ी आबादी इस्लाम को मानती है और कई सामाजिक व सांस्कृतिक समानताएं भी हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सीमा पर सैन्य झड़पों और हवाई हमलों में आम नागरिकों की भी जान जा रही है। 2025 के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव कई बार गंभीर सैन्य संघर्ष में बदल चुका है। 2026 में भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई देखने को मिली है। 21 सितंबर 2026 को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने इन हमलों में 28 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया, जबकि अफगान अधिकारियों ने कम से कम तीन नागरिकों की मौत और चार लोगों के घायल होने की जानकारी दी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर दो मुस्लिम देशों के बीच इतना तनाव क्यों है?

Pakistan Afghanistan Conflict: धर्म नहीं, सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा है विवाद की बड़ी वजह-

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव को सिर्फ धार्मिक नजरिए से समझना सही नहीं होगा। दोनों देशों के विवाद की जड़ में सीमा विवाद, आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, पश्तून इलाकों की राजनीति, शरणार्थियों की वापसी और व्यापार जैसे कई मुद्दे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे डूरंड लाइन और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP से जुड़े हैं।

Pakistan Afghanistan Conflict: डूरंड लाइन: 1893 से चला आ रहा सीमा विवाद-
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{News24}

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की सबसे पुरानी वजहों में डूरंड लाइन शामिल है। 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच हुए समझौते के बाद यह सीमा निर्धारित की गई थी। आज यही रेखा दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा के तौर पर मौजूद है। अफगानिस्तान लंबे समय से डूरंड लाइन को लेकर आपत्ति जताता रहा है। इस सीमा ने पश्तून आबादी वाले क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांट दिया। यही वजह है कि सीमा का मुद्दा दोनों देशों के बीच दशकों से संवेदनशील बना हुआ है। यानी पाकिस्तान-अफगानिस्तान का सीमा विवाद आज का नहीं, बल्कि करीब 133 साल पुराना मुद्दा है।

TTP बना मौजूदा तनाव का सबसे बड़ा कारण-

अगर आज के पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव को समझना है तो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP को समझना बेहद जरूरी है। TTP और अफगानिस्तान की सत्ता में मौजूद तालिबान एक ही संगठन नहीं हैं। TTP की स्थापना 2007 में पाकिस्तान में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ना रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से पाकिस्तान में हमले करते हैं। इसी वजह से इस्लामाबाद अफगान तालिबान सरकार से TTP के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, अफगान तालिबान पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज करता है कि वह जानबूझकर TTP को पाकिस्तान के खिलाफ हमलों के लिए समर्थन या सुरक्षित पनाह देता है। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में सबसे बड़ी अड़चनों में से एक है।

कभी तालिबान का समर्थन करता था पाकिस्तान-

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान और अफगान तालिबान हमेशा से आमने-सामने नहीं रहे हैं। 1990 के दशक में पाकिस्तान ने तालिबान के साथ करीबी संबंध बनाए थे। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, पाकिस्तान की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान ने तालिबान के शुरुआती दौर में उसे समर्थन दिया था। 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान में युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इसके बाद पाकिस्तान और तालिबान के संबंधों में बदलाव आया। 2021 में अमेरिकी और नाटो सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान दोबारा सत्ता में आया। शुरुआत में पाकिस्तान को उम्मीद थी कि काबुल में ऐसी सरकार होगी जिसके साथ वह आसानी से सुरक्षा और सीमा से जुड़े मुद्दों पर काम कर सकेगा। लेकिन इसके उलट दोनों देशों के संबंध लगातार खराब होते गए।

2021 के बाद क्यों बढ़ा तनाव-

तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पाकिस्तान में TTP से जुड़े हमलों को लेकर चिंता बढ़ी। 2022 के अंत में TTP ने पाकिस्तान सरकार के साथ अपने संघर्षविराम को खत्म कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं को लेकर चिंता और बढ़ गई। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान में मौजूद TTP के ठिकाने उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। वहीं तालिबान सरकार पाकिस्तान के आरोपों को स्वीकार नहीं करती। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और सीमा पर सैन्य झड़पों की स्थिति पैदा हुई।

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में किए हवाई हमले-

फरवरी 2026 में तनाव ने गंभीर रूप ले लिया। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कथित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इसके बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की और सीमा पर संघर्ष बढ़ गया। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन यानी UNAMA के मुताबिक, 26 फरवरी से 5 मार्च 2026 के बीच अफगानिस्तान में सीमा संघर्ष और हवाई हमलों के कारण 185 नागरिक प्रभावित हुए। इनमें 56 लोगों की मौत और 129 लोग घायल हुए। UNAMA के अनुसार प्रभावित नागरिकों में 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे थे।

21 सितंबर 2026 को फिर बढ़ा तनाव-

दोनों देशों के बीच कुछ समय की अपेक्षाकृत शांति के बाद 21 सितंबर 2026 को फिर तनाव बढ़ गया। रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने दावा किया कि इन हमलों में 28 आतंकवादी मारे गए। वहीं अफगान अधिकारियों ने कहा कि कुनार में तीन नागरिकों की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। यह कार्रवाई पाकिस्तान में हुए एक घातक आतंकी हमले के बाद हुई। पाकिस्तान इन हमलों को सीमा पार मौजूद आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखता है, जबकि अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी हमलों की निंदा की है।

अफगान शरणार्थी भी बना तनाव का मुद्दा-

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव में शरणार्थियों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से अफगान नागरिकों की वापसी और निर्वासन पर जोर देता रहा है। इससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक और मानवीय तनाव बढ़ा है। शरणार्थियों की वापसी के साथ-साथ सीमा बंद होने, आवाजाही और व्यापार से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते हैं।

दूसरे देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद-

पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव का असर केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है। चीन के पाकिस्तान के साथ मजबूत आर्थिक और रक्षा संबंध हैं और वह अफगानिस्तान में भी अपने आर्थिक एवं सुरक्षा हितों को आगे बढ़ा रहा है। भारत ने भी 2021 के बाद अफगानिस्तान के साथ अपने राजनीतिक संपर्क बढ़ाए हैं। ऐसे में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

सैन्य ताकत में पाकिस्तान आगे, लेकिन अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण-

सैन्य क्षमता के मामले में पाकिस्तान के पास अफगान तालिबान की तुलना में मजबूत पारंपरिक सैन्य ढांचा और आधुनिक वायुसेना है। दूसरी ओर, अफगान तालिबान के पास पाकिस्तान जैसी पारंपरिक वायु शक्ति नहीं है। हालांकि, अफगानिस्तान का पहाड़ी और दुर्गम इलाका लंबे समय से किसी भी बाहरी सैन्य अभियान के लिए चुनौती रहा है। ऐसे में सैन्य क्षमता का अंतर होने के बावजूद संघर्ष को जल्दी खत्म करना आसान नहीं माना जा सकता।

आखिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की असली वजह क्या है-

आसान भाषा में समझें तो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव धर्म की वजह से नहीं, बल्कि सुरक्षा, सीमा और राष्ट्रीय हितों को लेकर है। पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन से पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले आतंकी हमलों को रोके और TTP जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करे। वहीं अफगान तालिबान पाकिस्तान के दबाव को स्वीकार नहीं करता और TTP को लेकर इस्लामाबाद के आरोपों से इनकार करता है। इसके अलावा डूरंड लाइन का पुराना विवाद, पश्तून इलाकों का सवाल, अफगान शरणार्थियों की वापसी, सीमा बंद होना और व्यापार जैसे मुद्दे भी दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करते हैं। इसलिए पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद को सिर्फ दो मुस्लिम देशों की लड़ाई के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसकी असली जड़ सीमा, आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, पहचान और दोनों देशों के अलग-अलग रणनीतिक हितों में है

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