NSUI DUSU Defeat: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में NSUI की हार के बाद कांग्रेस के भीतर मंथन शुरू हो गया है। 2026 के चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के तीन केंद्रीय पदों पर जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन उपाध्यक्ष चुने गए। NSUI चारों केंद्रीय पदों में से कोई भी नहीं जीत सकी।
NSUI DUSU Defeat: राहुल गांधी ने मांगी हार की विस्तृत रिपोर्ट-
NSUI के प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चा तेज है। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने NSUI के प्रदर्शन और चुनावी हार को लेकर कांग्रेस संगठन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में उम्मीदवारों के चयन और हार के कारणों की समीक्षा की बात कही गई है।
NSUI DUSU Defeat: कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन पर चर्चा-
पार्टी के अंदर उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस से जुड़े लोगों के हवाले से यह चर्चा सामने आई है कि DUSU चुनाव में उम्मीदवार के चयन और जमीनी समीकरणों का सही आकलन नहीं हो सका। हालांकि, इन आंतरिक चर्चाओं को लेकर कांग्रेस की ओर से सभी दावों पर आधिकारिक तौर पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
NSUI की हार में जातीय समीकरण की चर्चा-
आपके दिए इनपुट के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान से जुड़े लोगों का मानना है कि चुनाव में जातीय समीकरणों ने भी भूमिका निभाई। इसी संदर्भ में NSUI के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा का प्रदर्शन चर्चा में है। आंकड़ों के मुताबिक, ABVP के यश डबास ने अध्यक्ष पद पर 24,576 वोट हासिल किए, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 2,053 वोट रहा।
Gen-Z आंदोलन के बाद चुनाव पर थी नजर-
DUSU चुनाव से पहले छात्रों से जुड़े मुद्दों और Gen-Z आंदोलन को लेकर भी चर्चा थी। ऐसे माहौल में NSUI के प्रदर्शन पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई थीं। हालांकि, चुनावी नतीजों में NSUI कोई केंद्रीय पद हासिल नहीं कर सकी। इसके बाद कांग्रेस के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि छात्र राजनीति में संगठन की रणनीति और उम्मीदवार चयन को किस तरह बदला जाए।
हार के कारणों की समीक्षा पर जोर-
DUSU के नतीजों के बाद कांग्रेस के सामने अब हार के अलग-अलग कारणों की समीक्षा का मुद्दा है। इसमें उम्मीदवार चयन, चुनावी रणनीति और छात्रों के बीच संगठन की पहुंच जैसे पहलुओं पर चर्चा हो रही है। राहुल गांधी द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने की खबर के बाद यह समीक्षा और महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष पार्टी की आंतरिक समीक्षा के बाद ही सामने आएगा।
Iranian Airlines Crisis: अमेरिका ने ईरान की एयरलाइंस पर दबाव और बढ़ाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस को दुनियाभर में संचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विदेशी कंपनियों और एयरपोर्ट्स को ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देने पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने की चेतावनी दी है।
Iranian Airlines Crisis: 23 सितंबर से बंद हो सकती हैं सेवाएं-
बेसेंट ने CNBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि 23 सितंबर से सभी ईरानी एयरलाइंस दुनियाभर में बंद हो जाएंगी। उनके मुताबिक, अगर कोई एयरपोर्ट या कंपनी ईरानी विमानों को ईंधन, लैंडिंग सेवाएं या टिकट बिक्री जैसी सुविधाएं देती है तो उस पर अमेरिकी कार्रवाई हो सकती है।
Iranian Airlines Crisis: डॉलर सिस्टम से बाहर करने की चेतावनी-
बेसेंट ने कहा कि ईरानी एयरलाइंस को सेवाएं देने वाली कंपनियों को अमेरिकी डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने का जोखिम रहेगा। इस कदम के जरिए अमेरिका ईरान के एविएशन सेक्टर पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहता है।
पहले भी ईरानी एयरलाइंस पर लगाए गए प्रतिबंध-
अमेरिका ने सितंबर में ईरान के एविएशन सेक्टर से जुड़ी कई एयरलाइंस और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बाद अब वॉशिंगटन उन विदेशी कंपनियों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दे रहा है, जो ईरानी एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराती हैं।
चीन के साथ बातचीत के बाद आया बयान-
बेसेंट का यह बयान चीन के उप प्रधानमंत्री हे लीफेंग के साथ आर्थिक वार्ता के बाद आया है। अमेरिका चीन के वित्तीय अधिकारियों के साथ ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के पालन को लेकर भी बातचीत कर रहा है।
ईरान पर बढ़ रहा अमेरिकी आर्थिक दबाव-
ईरान की एयरलाइंस पर कार्रवाई अमेरिका की व्यापक आर्थिक दबाव रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत ईरान से जुड़े तेल, शिपिंग, वित्तीय नेटवर्क और एविएशन सेक्टर पर भी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।
Odisha Textbook Row: ओडिशा में स्कूल की टेक्स्टबुक में कथित गलतियों को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने सोमवार को भुवनेश्वर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों का समर्थन किया। उन्होंने टेक्स्टबुक की छपाई और वितरण को लेकर राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
Odisha Textbook Row: 380 करोड़ रुपये की छपाई पर उठे सवाल-
सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार ने स्कूल के बच्चों के लिए टेक्स्टबुक की छपाई पर करीब 380 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इन किताबों में कई गलतियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और संशोधित किताबें छात्रों तक जल्द पहुंचाई जानी चाहिए। वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से कहा गया है कि किताबों में जरूरी सुधार किए जा रहे हैं और संशोधित किताबों का वितरण शुरू हो चुका है।
Odisha Textbook Row: छात्रों के आंदोलन को CJP का समर्थन-
CJP ने नव निर्माण युवा छात्र संगठन (NYCS) के चल रहे आंदोलन का समर्थन किया है। संगठन स्कूल शिक्षा में सुधार और टेक्स्टबुक में कथित गलतियों को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारी इस मुद्दे को लेकर भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। CJP के सौरव दास ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनके आंदोलन के समर्थन की बात कही। छात्रों की ओर से ओडिशा विधानसभा का घेराव करने की भी घोषणा की गई है।
राहुल गांधी के कार्यक्रम पर भी बोले सौरव दास-
सौरव दास ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के युवा बेरोजगारी और सरकारी पदों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रख रहे हैं। दास ने युवाओं की भागीदारी को जरूरी बताते हुए कहा कि रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी के युवाओं तक पहुंचने के कार्यक्रम का स्वागत भी किया।
मामले पर आगे भी जारी रह सकता है विवाद-
ओडिशा में टेक्स्टबुक की गलतियों को लेकर छात्रों और राजनीतिक संगठनों का विरोध जारी है। वहीं, सरकार का कहना है कि जरूरी सुधार किए जा रहे हैं और संशोधित किताबें छात्रों तक पहुंचाई जा रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है।
Delhi Police Recruitment: दिल्ली के वजीराबाद में दिल्ली पुलिस भर्ती के लिए आयोजित फिजिकल टेस्ट के दौरान सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। भर्ती दौड़ में शामिल 23 वर्षीय युवक सौरभ कुमार अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
Delhi Police Recruitment: भर्ती दौड़ के दौरान बिगड़ी तबीयत-
पुलिस के मुताबिक, घटना सुबह करीब 9:09 बजे की है। सौरभ कुमार वजीराबाद स्थित दिल्ली पुलिस अकादमी में आयोजित पुलिस प्रवेश एवं भर्ती परीक्षा (PEMT) में शामिल हुआ था। उसने दौड़ के पहले तीन राउंड पूरे कर लिए थे। पुलिस के अनुसार, तीसरे राउंड के बाद सौरभ को परेशानी महसूस हुई। इसके बाद वह ट्रैक के किनारे चला गया, जहां अन्य उम्मीदवार बैठे हुए थे। कुछ देर बाद वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा।
Delhi Police Recruitment: मौके पर पहुंची एंबुलेंस और मेडिकल टीम-
कार्यक्रम स्थल पर मौजूद ग्राउंड स्टाफ ने सौरभ को गिरते देखा और तुरंत एंबुलेंस व डॉक्टरों को सूचना दी। पुलिस के बयान के मुताबिक, एंबुलेंस पहले से ही मैदान में मौजूद थी और कुछ ही समय में मौके पर पहुंच गई। पैरामेडिक्स ने सौरभ को सीपीसीआर दिया और उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बुलंदशहर का रहने वाला था सौरभ-
पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान सौरभ कुमार के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के नेता नगर का रहने वाला था। घटना की सूचना सोमवार सुबह करीब 11:11 बजे सोनिया विहार थाने को जग प्रवेश चंद (JPC) अस्पताल से मिली।
पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव-
पुलिस ने सौरभ के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी है। उत्तर पूर्वी दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शव को पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेजा गया है। फिलहाल स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
Pakistan Afghanistan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही मुस्लिम बहुल देश हैं। दोनों देशों की बड़ी आबादी इस्लाम को मानती है और कई सामाजिक व सांस्कृतिक समानताएं भी हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सीमा पर सैन्य झड़पों और हवाई हमलों में आम नागरिकों की भी जान जा रही है। 2025 के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव कई बार गंभीर सैन्य संघर्ष में बदल चुका है। 2026 में भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई देखने को मिली है। 21 सितंबर 2026 को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने इन हमलों में 28 आतंकियों के मारे जाने का दावा किया, जबकि अफगान अधिकारियों ने कम से कम तीन नागरिकों की मौत और चार लोगों के घायल होने की जानकारी दी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर दो मुस्लिम देशों के बीच इतना तनाव क्यों है?
Pakistan Afghanistan Conflict: धर्म नहीं, सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा है विवाद की बड़ी वजह-
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव को सिर्फ धार्मिक नजरिए से समझना सही नहीं होगा। दोनों देशों के विवाद की जड़ में सीमा विवाद, आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, पश्तून इलाकों की राजनीति, शरणार्थियों की वापसी और व्यापार जैसे कई मुद्दे हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे डूरंड लाइन और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP से जुड़े हैं।
Pakistan Afghanistan Conflict: डूरंड लाइन: 1893 से चला आ रहा सीमा विवाद-
{News24}
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की सबसे पुरानी वजहों में डूरंड लाइन शामिल है। 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच हुए समझौते के बाद यह सीमा निर्धारित की गई थी। आज यही रेखा दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा के तौर पर मौजूद है। अफगानिस्तान लंबे समय से डूरंड लाइन को लेकर आपत्ति जताता रहा है। इस सीमा ने पश्तून आबादी वाले क्षेत्रों को दो हिस्सों में बांट दिया। यही वजह है कि सीमा का मुद्दा दोनों देशों के बीच दशकों से संवेदनशील बना हुआ है। यानी पाकिस्तान-अफगानिस्तान का सीमा विवाद आज का नहीं, बल्कि करीब 133 साल पुराना मुद्दा है।
TTP बना मौजूदा तनाव का सबसे बड़ा कारण-
अगर आज के पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव को समझना है तो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP को समझना बेहद जरूरी है। TTP और अफगानिस्तान की सत्ता में मौजूद तालिबान एक ही संगठन नहीं हैं। TTP की स्थापना 2007 में पाकिस्तान में हुई थी और इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ना रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से पाकिस्तान में हमले करते हैं। इसी वजह से इस्लामाबाद अफगान तालिबान सरकार से TTP के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करता रहा है। दूसरी ओर, अफगान तालिबान पाकिस्तान के इन आरोपों को खारिज करता है कि वह जानबूझकर TTP को पाकिस्तान के खिलाफ हमलों के लिए समर्थन या सुरक्षित पनाह देता है। यही मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में सबसे बड़ी अड़चनों में से एक है।
कभी तालिबान का समर्थन करता था पाकिस्तान-
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान और अफगान तालिबान हमेशा से आमने-सामने नहीं रहे हैं। 1990 के दशक में पाकिस्तान ने तालिबान के साथ करीबी संबंध बनाए थे। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुसार, पाकिस्तान की सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान ने तालिबान के शुरुआती दौर में उसे समर्थन दिया था। 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में अफगानिस्तान में युद्ध शुरू होने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इसके बाद पाकिस्तान और तालिबान के संबंधों में बदलाव आया। 2021 में अमेरिकी और नाटो सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान दोबारा सत्ता में आया। शुरुआत में पाकिस्तान को उम्मीद थी कि काबुल में ऐसी सरकार होगी जिसके साथ वह आसानी से सुरक्षा और सीमा से जुड़े मुद्दों पर काम कर सकेगा। लेकिन इसके उलट दोनों देशों के संबंध लगातार खराब होते गए।
2021 के बाद क्यों बढ़ा तनाव-
तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पाकिस्तान में TTP से जुड़े हमलों को लेकर चिंता बढ़ी। 2022 के अंत में TTP ने पाकिस्तान सरकार के साथ अपने संघर्षविराम को खत्म कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान में हिंसक घटनाओं को लेकर चिंता और बढ़ गई। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान में मौजूद TTP के ठिकाने उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। वहीं तालिबान सरकार पाकिस्तान के आरोपों को स्वीकार नहीं करती। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और सीमा पर सैन्य झड़पों की स्थिति पैदा हुई।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में किए हवाई हमले-
फरवरी 2026 में तनाव ने गंभीर रूप ले लिया। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कथित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इसके बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की और सीमा पर संघर्ष बढ़ गया। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन यानी UNAMA के मुताबिक, 26 फरवरी से 5 मार्च 2026 के बीच अफगानिस्तान में सीमा संघर्ष और हवाई हमलों के कारण 185 नागरिक प्रभावित हुए। इनमें 56 लोगों की मौत और 129 लोग घायल हुए। UNAMA के अनुसार प्रभावित नागरिकों में 55 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे थे।
21 सितंबर 2026 को फिर बढ़ा तनाव-
दोनों देशों के बीच कुछ समय की अपेक्षाकृत शांति के बाद 21 सितंबर 2026 को फिर तनाव बढ़ गया। रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमले किए। पाकिस्तान ने दावा किया कि इन हमलों में 28 आतंकवादी मारे गए। वहीं अफगान अधिकारियों ने कहा कि कुनार में तीन नागरिकों की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। यह कार्रवाई पाकिस्तान में हुए एक घातक आतंकी हमले के बाद हुई। पाकिस्तान इन हमलों को सीमा पार मौजूद आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखता है, जबकि अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी हमलों की निंदा की है।
अफगान शरणार्थी भी बना तनाव का मुद्दा-
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव में शरणार्थियों का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से अफगान नागरिकों की वापसी और निर्वासन पर जोर देता रहा है। इससे दोनों देशों के बीच राजनीतिक और मानवीय तनाव बढ़ा है। शरणार्थियों की वापसी के साथ-साथ सीमा बंद होने, आवाजाही और व्यापार से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करते हैं।
दूसरे देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद-
पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव का असर केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है। चीन के पाकिस्तान के साथ मजबूत आर्थिक और रक्षा संबंध हैं और वह अफगानिस्तान में भी अपने आर्थिक एवं सुरक्षा हितों को आगे बढ़ा रहा है। भारत ने भी 2021 के बाद अफगानिस्तान के साथ अपने राजनीतिक संपर्क बढ़ाए हैं। ऐसे में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
सैन्य ताकत में पाकिस्तान आगे, लेकिन अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति चुनौतीपूर्ण-
सैन्य क्षमता के मामले में पाकिस्तान के पास अफगान तालिबान की तुलना में मजबूत पारंपरिक सैन्य ढांचा और आधुनिक वायुसेना है। दूसरी ओर, अफगान तालिबान के पास पाकिस्तान जैसी पारंपरिक वायु शक्ति नहीं है। हालांकि, अफगानिस्तान का पहाड़ी और दुर्गम इलाका लंबे समय से किसी भी बाहरी सैन्य अभियान के लिए चुनौती रहा है। ऐसे में सैन्य क्षमता का अंतर होने के बावजूद संघर्ष को जल्दी खत्म करना आसान नहीं माना जा सकता।
आखिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की असली वजह क्या है-
आसान भाषा में समझें तो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव धर्म की वजह से नहीं, बल्कि सुरक्षा, सीमा और राष्ट्रीय हितों को लेकर है। पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन से पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले आतंकी हमलों को रोके और TTP जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करे। वहीं अफगान तालिबान पाकिस्तान के दबाव को स्वीकार नहीं करता और TTP को लेकर इस्लामाबाद के आरोपों से इनकार करता है। इसके अलावा डूरंड लाइन का पुराना विवाद, पश्तून इलाकों का सवाल, अफगान शरणार्थियों की वापसी, सीमा बंद होना और व्यापार जैसे मुद्दे भी दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करते हैं। इसलिए पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद को सिर्फ दो मुस्लिम देशों की लड़ाई के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसकी असली जड़ सीमा, आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा, पहचान और दोनों देशों के अलग-अलग रणनीतिक हितों में है।
Abhishek Shandilya: कुछ जगहें सिर्फ नक्शे पर दर्ज नहीं होतीं, वे अपने भीतर सवालों का पूरा इतिहास समेटे होती हैं। मुर्शिदाबाद भी ऐसी ही एक जगह है। करीब दस महीने पहले यहां रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकार अभिषेक शांडिल्य और उनके सहयोगी आदित्य मिश्रा के साथ जो हुआ, उसने पत्रकारिता और कानून-व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
Abhishek Shandilya: 27 दिसंबर 2025… जब हुई बदसलूकी-
27 दिसंबर 2025 को अभिषेक शांडिल्य अपनी टीम के साथ मुर्शिदाबाद में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचे थे। मकसद था जमीन पर जाकर हालात को समझना, लोगों से बात करना और उन सवालों के जवाब तलाशना, जो लगातार चर्चा में थे। रिपोर्टिंग के दौरान टीम के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, भीड़ ने अभिषेक शांडिल्य और उनके सहयोगी आदित्य मिश्रा को घेर लिया। अभिषेक को प्लास्टिक की पाइप से बांधने की कोशिश किए जाने और दोनों का कैमरा-माइक समेत करीब चार लाख रुपये का सामान छीने जाने के आरोप भी सामने आए। पुलिस ने बाद में दोनों को वहां से निकालकर थाने पहुंचाया। करीब 40-45 मिनट की रिपोर्टिंग में जुटाया गया वह फुटेज भी टीम के हाथ से चला गया, जिसमें मौके के हालात रिकॉर्ड किए गए थे। कैमरा छिन गया, माइक छिन गया, रिपोर्ट अधूरी रह गई… लेकिन अभिषेक शांडिल्य का हौसला नहीं टूटा। किसी पत्रकार की आवाज को रोकने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन सवालों को हमेशा के लिए खत्म नहीं किया जा सकता।
Abhishek Shandilya: मुर्शिदाबाद में तब क्या हो रहा था-
[Abhishek Shandilya]यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में तत्कालीन निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने की घोषणा और बाद में आधारशिला रखे जाने को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा था। 6 दिसंबर 2025 को आधारशिला रखे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसी दौरान पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे। मुर्शिदाबाद में इससे पहले और बाद में विरोध-प्रदर्शन कवर कर रहे अन्य पत्रकारों पर हमलों की खबरें भी सामने आईं।
दस महीने बाद… कैमरा फिर हाथ में है-
Abhishek Shandilya
समय बीत गया। हालात बदले। सत्ता बदली। लेकिन अभिषेक शांडिल्य ने उस घटना को वहीं छोड़ देने का फैसला नहीं किया। करीब दस महीने बाद वही पत्रकार फिर उसी जमीन पर पहुंच गया है। मुर्शिदाबाद वही बसा हुआ है सड़के वही है इलाका भी वही है लेकिन इस बार हाथ में फिर कैमरा है और सामने फिर वही सवाल। जिस जगह से पिछली बार रिपोर्ट अधूरी छोड़कर निकलना पड़ा था, उसी जगह से अब कहानी को आगे बढ़ाया जाएगा। जिन लोगों ने अभिषेक का कैमरा छीन लिया था, वे उनका हौसला नहीं छीन पाए।
मुर्शिदाबाद से ग्राउंड रिपोर्ट जल्द-
अभिषेक शांडिल्य एक बार फिर मुर्शिदाबाद पहुंच चुके हैं। इस बार कहानी सिर्फ उस हमले की नहीं होगी, बल्कि उसके बाद बदली जमीन की होगी। इस बार अभिषेक अकेले नहीं है उनके साथ है खबर इंडिया, हेडलाइंस इंडिया औ एनएफएम न्यूज जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म भी साथ है जो मुर्शिदाबाद की जमीन पर पहुंचकर वहां के मौजूदा हालात को सामने लाने की कोशिश करेंगे।
OneTag FASTag: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने FASTag यूजर्स के लिए OneTag सुविधा लॉन्च की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest 2026 में इसे लॉन्च किया। OneTag की मदद से वाहन मालिकों को बैंक बदलने के लिए अपनी कार पर लगा FASTag हटाने या नया FASTag लगाने की जरूरत नहीं होगी।
OneTag FASTag: क्या है OneTag-
OneTag एक ऐसी पोर्टेबिलिटी सुविधा है, जो NETC FASTag यूजर्स को अपना FASTag बदले बिना जारीकर्ता बैंक बदलने की सुविधा देती है। यानी अगर कोई ग्राहक मौजूदा FASTag बैंक से किसी दूसरे बैंक में जाना चाहता है, तो उसे गाड़ी पर लगा FASTag बदलने की जरूरत नहीं होगी। इस सुविधा का उद्देश्य FASTag सिस्टम को ज्यादा इंटरऑपरेबल और सुविधाजनक बनाना है। OneTag की सुविधा NHAI के ‘राजमार्गयात्रा’ मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध होगी।
OneTag FASTag: FASTag से कैसे अलग है OneTag-
FASTag खुद एक इलेक्ट्रॉनिक टोल भुगतान प्रणाली है, जबकि OneTag FASTag की बैंक-पोर्टेबिलिटी सुविधा है। इसका मतलब है कि OneTag के जरिए यूजर अपने वाहन पर लगे मौजूदा NETC FASTag को बरकरार रखते हुए जारीकर्ता बैंक बदल सकता है। इससे बैंक बदलने के लिए नया FASTag लेने और पुराने टैग को वाहन से हटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या पुराने FASTag का बैलेंस नए बैंक में ट्रांसफर होगा-
नहीं। OneTag के जरिए बैंक बदलने का मतलब यह नहीं है कि पुराने FASTag वॉलेट का बैलेंस अपने आप नए बैंक में ट्रांसफर हो जाएगा। पुराने वॉलेट का बैलेंस, रिफंड और पेंडिंग ट्रांजैक्शन से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी पुराने जारीकर्ता बैंक की होगी। यूजर को इन मामलों के लिए अपने पुराने बैंक से संपर्क करना होगा।
OneTag का इस्तेमाल कैसे करें-
OneTag की सुविधा ‘राजमार्गयात्रा’ ऐप के जरिए इस्तेमाल की जा सकेगी। इसके लिए यूजर को कुछ चरण पूरे करने होंगे।
सबसे पहले FASTag की पोर्टेबिलिटी के लिए पात्रता जांची जाएगी।
इसके बाद सुरक्षित कस्टमर वेरिफिकेशन होगा।
यूजर की सहमति ली जाएगी।
ग्राहक अपना पसंदीदा जारीकर्ता बैंक चुन सकेगा।
इसके बाद नए बैंक की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहन पर लगा मौजूदा FASTag इस्तेमाल किया जा सकेगा और उसे बदलने की जरूरत नहीं होगी।
पुराने बैंक की क्या रहेगी जिम्मेदारी-
पोर्टेबिलिटी के दौरान पुराने बैंक की जिम्मेदारी पुराने FASTag से जुड़े कस्टमर वेरिफिकेशन, रिफंड और पेंडिंग ट्रांजैक्शन जैसे मामलों को संभालने की होगी। पोर्टेबिलिटी पूरी होने के बाद नया बैंक अपनी ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करके FASTag से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराएगा। कुल मिलाकर, OneTag FASTag का नया विकल्प नहीं बल्कि FASTag यूजर्स के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाने वाली पोर्टेबिलिटी सुविधा है।
IIT Bombay Professor Suspended: IIT बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को उनके डीन पद से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही IIT बॉम्बे ने साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों को लेकर अपने पुराने बयान पर माफी मांगी है। संस्थान ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले घटना से जुड़ी परिस्थितियों को सार्वजनिक रूप से बताना उचित नहीं था।
IIT Bombay Professor Suspended: 18 सितंबर को हॉस्टल के कमरे में मृत मिले थे साहिल-
22 वर्षीय साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में सेकेंड ईयर के बीटेक छात्र थे। 18 सितंबर की शाम वह पवई कैंपस स्थित हॉस्टल के कमरे में मृत मिले थे। 19 सितंबर को IIT बॉम्बे ने अपने बयान में कहा था कि घटना वाले दिन साहिल को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। संस्थान के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर परीक्षा के सवालों को ChatGPT पर अपलोड कर जवाब लेने की कोशिश की थी। IIT ने यह भी कहा था कि साहिल के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उन्हें इंस्ट्रक्टर, फैकल्टी एडवाइजर तथा विभागाध्यक्ष ने काउंसलिंग दी थी।
IIT Bombay Professor Suspended: पुराने बयान पर IIT बॉम्बे ने मांगी माफी-
बढ़ते विरोध के बीच IIT बॉम्बे ने अपने पुराने बयान पर माफी मांगी। संस्थान ने कहा कि साहिल की मौत से पहले क्या हुआ था, इसकी जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने से पहले घटनाक्रम को किसी निश्चित रूप में पेश करना उचित नहीं था।
प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला डीन पद से सस्पेंड-
IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को उनके डीन पद से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया है। वह उस परीक्षा के दौरान मौजूद थे, जिसमें साहिल के मोबाइल इस्तेमाल करने का मामला सामने आया था। संस्थान ने कहा है कि उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच के बाद तय की जाएगी। रिपोर्टों के मुताबिक, दूल्ला फिलहाल प्रोफेसर के रूप में काम करते रहेंगे।
माता-पिता ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप-
साहिल के माता-पिता ने प्रोफेसर दूल्ला और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। परिवार ने आरोप लगाया है कि साहिल को कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणियों और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। हालांकि, IIT बॉम्बे ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि साहिल की ओर से SC-ST सेल या संस्थान के प्रशासन के पास ऐसी कोई शिकायत नहीं दी गई थी।
डायरेक्टर के इस्तीफे की खबर पर IIT ने दी सफाई-
IIT बॉम्बे ने संस्थान के डायरेक्टर प्रो. शिरीष बी. केदारे के इस्तीफे की खबरों को भी खारिज किया है। संस्थान ने स्पष्ट किया कि डायरेक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है। इससे पहले डायरेक्टर ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बैठक की थी। छात्रों ने अपनी मांगों से जुड़े 18 बिंदुओं का दस्तावेज प्रशासन के सामने रखा था। इनमें साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच, सार्वजनिक माफी, छात्रों के सवालों के लिए ओपन हाउस और इस साल जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता जैसी मांगें शामिल थीं।
IIT छात्रों में आत्महत्या का मुद्दा फिर चर्चा में-
साहिल की मौत के बाद IIT संस्थानों में छात्रों के मानसिक दबाव और आत्महत्या के मामलों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में IIT परिसरों में आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं। एक IIT सर्वे के मुताबिक, 61 प्रतिशत छात्रों ने अकादमिक तनाव को आत्महत्या से जुड़े प्रमुख दबावों में बताया था। वहीं, एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के आंकड़ों के अनुसार पिछले 20 वर्षों में IITs में 160 छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने 2024 में प्रत्येक 1,000 छात्रों पर एक काउंसलर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में कुछ IITs में काउंसलर और छात्रों के अनुपात में अंतर दिखाई देता है। साहिल वाकोडे मामले में जांच जारी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही उनकी मौत से जुड़े घटनाक्रम और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
लखनऊ में 23 से 25 अक्टूबर तक तकनीक से जुड़ा एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) में International Dialogue 2026 का आयोजन किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देशों के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, कारोबारी, कंपनियों के … Read more
Xi Jinping US Visit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अहम शिखर वार्ता होगी।
Xi Jinping US Visit: 23 सितंबर को अमेरिका पहुंचेंगे शी जिनपिंग-
शी जिनपिंग 23 सितंबर को वॉशिंगटन पहुंचेंगे। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बैठक होगी। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता चीन-अमेरिका संबंधों के साथ-साथ विश्व शांति और विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
Xi Jinping US Visit: एयरपोर्ट पर खुद ट्रंप करेंगे जिनपिंग का स्वागत-
शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर एक अहम बात यह भी सामने आई है कि डोनाल्ड ट्रंप उनके अमेरिका पहुंचने पर खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने की योजना बना रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप वॉशिंगटन के बाहर स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज पर शी जिनपिंग का स्वागत कर सकते हैं। विदेशी नेताओं का अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा एयरपोर्ट पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत करना अपेक्षाकृत दुर्लभ है।
व्यापार और टेक्नोलॉजी पर हो सकती है चर्चा-
ट्रंप और जिनपिंग की बैठक में अमेरिका-चीन व्यापार संबंध प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार को लेकर लंबे समय से तनाव रहा है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तकनीकी प्रतिबंधों और आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।
ताइवान और वैश्विक मुद्दों पर भी नजर-
बैठक में ताइवान से जुड़े सुरक्षा और सैन्य तनाव जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। इसके अलावा ईरान और मध्य पूर्व की स्थिति समेत व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दे भी दोनों नेताओं की बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं।
दोनों नेताओं की इस साल दूसरी बड़ी मुलाकात-
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की इस साल यह दूसरी प्रमुख शिखर बैठक होगी। इससे पहले दोनों नेता मई 2026 में बीजिंग में मिले थे। आगामी अमेरिकी यात्रा के दौरान दोनों पक्ष चीन-अमेरिका संबंधों में मतभेदों को संभालने और बातचीत को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
क्यों अहम है ट्रंप-जिनपिंग की बैठक-
अमेरिका और चीन दुनिया की दो प्रमुख आर्थिक और राजनीतिक शक्तियां हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, AI, ताइवान और वैश्विक भू-राजनीति जैसे कई मुद्दों पर मतभेद हैं। ऐसे में 23 से 25 सितंबर तक होने वाली शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा और ट्रंप के साथ उनकी शिखर वार्ता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रहेगी।