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पराली जलाई तो मंडी में फसल बेचना होगा मुश्किल! नायब सैनी सरकार का बड़ा एक्शन, रेड लिस्ट में आएंगे किसान

Haryana Stubble Burning News: हरियाणा में पराली जलाने वाले किसानों पर इस बार प्रशासन की नजर और सख्त रहने वाली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर तैयारी तेज कर दी है। करनाल जिले में कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। नियम तोड़ने वाले किसानों को रेड लिस्ट में शामिल किया जा सकता है और इसका असर मंडी में फसल बेचने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। पिछले साल करनाल जिले में पराली जलाने के 23 मामले सामने आए थे। इस बार प्रशासन का लक्ष्य इन घटनाओं को पूरी तरह रोकना और आंकड़ा जीरो तक लाना है। इसके लिए किसानों को जागरूक करने के साथ खेतों की निगरानी और फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्पों पर भी जोर दिया जा रहा है।

पराली जलाने वाले किसानों पर क्या होगी कार्रवाई?
करनाल में धान की कटाई का सीजन शुरू होने के साथ ही प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने के मामलों पर नजर रखने की तैयारी की है। कृषि विभाग की टीमें खेतों में निगरानी करेंगी और पराली जलाने की घटना सामने आने पर संबंधित किसान की पहचान की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है। ऐसे किसानों को रेड लिस्ट में शामिल करने की कार्रवाई भी हो सकती है। इसके बाद मंडी में फसल बेचने समेत संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं के दौरान उनके रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
हालांकि, किसान पर लागू होने वाली वास्तविक कार्रवाई संबंधित सरकारी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
Haryana News: नायब सैनी सरकार का पराली पर जीरो टॉलरेंस प्लान
हरियाणा में पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए नायब सिंह सैनी सरकार निगरानी के साथ-साथ फसल अवशेष प्रबंधन पर भी जोर दे रही है। सरकार का प्रयास है कि किसान खेत में पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों और दूसरे उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल करें। कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनों के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दे रहा है। इसका उद्देश्य धान की कटाई के बाद खेत साफ करने के लिए पराली में आग लगाने की जरूरत को खत्म करना है।
करनाल में पिछले साल जली थी पराली, इस बार लक्ष्य जीरो
प्रशासन के मुताबिक, पिछले साल करनाल जिले में 23 पराली जलाने के मामले सामने आए थे। इस बार इन्हें शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। धान की कटाई के दौरान ऐसे खेतों और इलाकों पर विशेष नजर रखी जाएगी, जहां फसल अवशेष जलाने की संभावना ज्यादा रहती है। प्रशासन की कोशिश है कि आग लगने की घटना सामने आने से पहले ही किसानों को पराली प्रबंधन के विकल्पों के बारे में जानकारी दी जाए।
Haryana News: किसानों को मिलेंगे पराली प्रबंधन के विकल्प
पराली जलाने से बचने के लिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन वाली मशीनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से पराली को खेत में ही मिलाया जा सकता है या उसका दूसरे तरीके से प्रबंधन किया जा सकता है। प्रशासन की रणनीति में जागरूकता और सख्ती दोनों शामिल हैं। किसानों को नियमों की जानकारी देने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि पराली जलाने के बजाय उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल करके खेत को अगली फसल के लिए तैयार किया जा सकता है।
मंडी में फसल बेचने पर भी पड़ सकता है असर
पराली जलाने वाले किसानों की पहचान और रिकॉर्ड तैयार होने के बाद उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। रेड लिस्ट में शामिल किसानों को मंडी में फसल बेचने और सरकारी प्रक्रियाओं के दौरान अतिरिक्त जांच का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रशासन किसानों को पहले से सतर्क कर रहा है कि पराली जलाने से बचें और फसल अवशेष का उचित प्रबंधन करें।
नायब सैनी सरकार के सामने बड़ा लक्ष्य
हरियाणा सरकार के सामने इस सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के साथ उन्हें पूरी तरह खत्म करने की चुनौती है। करनाल में पिछले साल के 23 मामलों के मुकाबले इस बार प्रशासन ने जीरो पराली बर्निंग का लक्ष्य रखा है। सरकार की रणनीति में किसानों को मशीनरी और तकनीकी विकल्पों से जोड़ना, खेतों की निगरानी करना और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करना शामिल है। अब धान की कटाई के दौरान यह देखना अहम होगा कि करनाल प्रशासन अपने जीरो-बर्निंग लक्ष्य को कितना हासिल कर पाता है।

लेखिका: स्वाति शर्मा

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