वैष्णो देवी में 550 करोड़ की चांदी पर विवाद, 4 महीने बाद भी FIR क्यों?

Vaishno Devi

Vaishno Devi: वैष्णो देवी की 550 करोड़ की चांदी पर विवादमाता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई चांदी को लेकर विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। करीब 20 टन चांदी, जिसकी अनुमानित कीमत 550 करोड़ रुपये बताई गई, उसके परीक्षण के बाद कथित तौर पर बड़ी मात्रा में … Read more

जमुई में नाबालिग से बदसलूकी का वीडियो वायरल, अब निजता से खिलवाड़ पर पुलिस का शिकंजा

Jamui minor video viral:

Jamui minor video viral: इन दिनों सोशल मीडिया पर जमुई की नाबालिक का वीडियो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रहा है। हालांकि घटना के आरोपियों पर कार्रवाई भी की गई है जिसमें, गिरफ्तारियों की संख्या अब पांच पहुंच गई है। पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR … Read more

कौन हैं ‘बिट्टू तबाही’? MP की अजनार नदी से यमुना तक… सफाई की पूरी कहानी

Bittu Tabahi

Bittu Tabahi: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की अजनार नदी से शुरू हुई सफाई की एक मुहिम अब दिल्ली की यमुना तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से पहचान बनाने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी ने यमुना किनारे स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स के साथ सफाई अभियान चलाया। करीब साढ़े … Read more

ट्रंप के खिलाफ कोर्ट पहुंचा मीडिया, व्हाइट हाउस एंट्री विवाद पर सुनवाई

Trump White House entry dispute:

Trump White House entry dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रमुख मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश से रोकने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। CNN, MS NOW और POLITICO ने संयुक्त रूप से ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को वाशिंगटन डीसी की अदालत में चुनौती दी है। मीडिया संस्थानों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि यह फैसला अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने अदालत से ट्रंप के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। मामले की सुनवाई बुधवार को होगी।

Trump White House entry dispute: ट्रंप ने पत्रकारों की एंट्री क्यों रोकी-

ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए CNN, MS NOW और POLITICO के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोकने का ऐलान किया था। इसके बाद शनिवार को इन संस्थानों के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रवेश संबंधी प्रमाण-पत्र निष्क्रिय कर दिए गए। ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों पर उनके खिलाफ लगातार फर्जी और झूठी खबरें चलाने का आरोप लगाया। सोमवार को उन्होंने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उनका निशाना स्वतंत्र प्रेस नहीं, बल्कि फेक न्यूज है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा भी बताया। हालांकि, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया।

Trump White House entry dispute: क्या कहता है अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन-

अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन 15 दिसंबर 1791 को बिल ऑफ राइट्स के हिस्से के रूप में लागू हुआ था। इसमें सरकार को धर्म, अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित करने वाले कानून बनाने से रोका गया है। पहले संशोधन के तहत कांग्रेस ऐसा कोई कानून नहीं बना सकती, जो अभिव्यक्ति या प्रेस की स्वतंत्रता को कम करे। इसी वजह से अमेरिका में प्रेस की स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण हासिल है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पत्रकारों को हर सरकारी परिसर में बिना किसी नियम के प्रवेश का अधिकार मिल जाता है। यही अंतर मौजूदा मुकदमे में महत्वपूर्ण है।

क्या पत्रकारों को व्हाइट हाउस में प्रवेश की गारंटी है-

मामला इतना सीधा नहीं है। अमेरिकी अदालतें पहले भी कह चुकी हैं कि पहला संशोधन प्रेस को उन जगहों पर विशेष प्रवेश का अधिकार नहीं देता, जहां आम जनता को प्रवेश नहीं मिलता। इसलिए CNN और दूसरे मीडिया संस्थानों का मुख्य सवाल केवल व्हाइट हाउस में प्रवेश का नहीं है। उनका तर्क है कि क्या उन्हें उनकी खबरों और रिपोर्टिंग के कारण निशाना बनाया गया है। यदि अदालत यह मानती है कि सरकार ने किसी खास दृष्टिकोण या आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के कारण मीडिया संस्थानों के साथ अलग व्यवहार किया, तो पहला संशोधन इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है।

CNN, MS NOW और POLITICO कोर्ट क्यों पहुंचे-

तीनों मीडिया संस्थानों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का कदम उनकी प्रेस स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। उन्होंने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि उनके पत्रकारों को व्हाइट हाउस की कवरेज से बाहर रखने वाले फैसले पर रोक लगाई जा सके। मीडिया संस्थानों का तर्क है कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि कोई मीडिया संस्थान राष्ट्रपति के बारे में क्या रिपोर्ट करेगा। पत्रकारों के लिए राष्ट्रपति से सीधे सवाल पूछना, अधिकारियों से बातचीत करना और अचानक सामने आई घटनाओं पर प्रतिक्रिया लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।

ट्रंप और मीडिया के बीच पहले भी हुआ है टकराव-

यह ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच पहला कानूनी टकराव नहीं है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में उनके प्रशासन ने CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा का व्हाइट हाउस प्रेस पास वापस लेने की कोशिश की थी। अदालत ने उस मामले में एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था। मौजूदा मुकदमे की सुनवाई करने वाले जज टिमोथी केली ही उस पुराने मामले में भी ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला दे चुके हैं। केली की नियुक्ति ट्रंप ने 2017 में की थी। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी प्रशासन और मीडिया के बीच कई टकराव हुए हैं। इनमें एसोसिएटेड प्रेस की व्हाइट हाउस प्रेस व्यवस्था और पेंटागन में पत्रकारों की एंट्री से जुड़े विवाद शामिल हैं।

इस बार मामला ज्यादा बड़ा क्यों है-

इस बार CNN, MS NOW और POLITICO तीन बड़े मीडिया संस्थान एक साथ अदालत पहुंचे हैं। इसके अलावा दूसरे बड़े अमेरिकी टीवी नेटवर्कों ने भी व्हाइट हाउस के प्रेस पूल में CNN की जगह लेने से इनकार किया है। व्हाइट हाउस का प्रेस पूल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हर मीडिया संस्थान राष्ट्रपति के साथ हर जगह कैमरा और पूरी टीम नहीं ले जा सकता। पूल व्यवस्था के तहत एक संस्थान राष्ट्रपति की गतिविधियों की तस्वीर और वीडियो उपलब्ध कराता है, जिसका इस्तेमाल दूसरे मीडिया संस्थान भी करते हैं।

क्या ट्रंप का फैसला पलटेगा-

इसका अभी निश्चित जवाब देना जल्दबाजी होगा। अदालत ने मामले पर अंतिम फैसला नहीं दिया है। मौजूदा मामले में अदालत को संविधान के पहले संशोधन, प्रेस की एंट्री और राष्ट्रपति के प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन पर विचार करना होगा। यानी इस मुकदमे का मुख्य सवाल सिर्फ यह नहीं है कि CNN या दूसरे मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस में प्रवेश मिलेगा या नहीं। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति किसी मीडिया संस्थान की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग से नाराज होकर उसकी सरकारी पहुंच सीमित कर सकते हैं।

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Trump Iran Threat:

Trump Iran Threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने ईरान के साथ समझौता करने या उसके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई करने का विकल्प है। ट्रंप ने UN सदस्य देशों से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपील भी की।

Trump Iran Threat: ट्रंप बोले- ईरान के सामने दो रास्ते-

UN में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके सामने ईरान को लेकर एक बड़ा फैसला है। उन्होंने समझौते और सैन्य कार्रवाई को दो विकल्पों के तौर पर पेश किया। ट्रंप ने ईरान पर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर भी आरोप लगाए।

Trump Iran Threat: UN देशों से ईरान पर आर्थिक दबाव की अपील-

ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईरान पर दबाव बढ़ाने से तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। उन्होंने ईरानी वाणिज्यिक जहाजों से जुड़े हमलों की भी आलोचना की।

ट्रंप ने ICC पर भी साधा निशाना-

भाषण के दौरान ट्रंप ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) की भी आलोचना की और उसके सदस्यों से इस्तीफा देने की अपील की। उन्होंने ICC को ऐसी संस्था बताया, जो उनके अनुसार नियंत्रण से बाहर हो गई है।

AI को बताया ‘सुपर इंटेलिजेंस’-

ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी अपनी नीति स्पष्ट की। उन्होंने AI को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में ज्यादा प्रतिबंध नहीं लगाने की बात कही। उन्होंने अमेरिका को AI के क्षेत्र में आगे रखने पर जोर दिया।

ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का मुद्दा-

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क और अमेरिका के बीच हुए समझौते का भी जिक्र किया। रिपोर्टों के मुताबिक, समझौते में ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी भूमिका और सैन्य मौजूदगी बढ़ाने से जुड़े प्रावधान हैं। दो नए सैन्य ठिकानों की योजना की भी रिपोर्ट सामने आई है।

वेनेजुएला और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र-

ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई का बचाव किया और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के अपने प्रयासों का भी उल्लेख किया। UN भाषण में उन्होंने अमेरिकी सैन्य और आर्थिक ताकत को भी गिनाया।

CNN को लेकर भी विवाद-

UN में ट्रंप के भाषण के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर भी विवाद सामने आया। CNN समेत कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थानों और ट्रंप प्रशासन के बीच व्हाइट हाउस की प्रेस एक्सेस को लेकर विवाद चल रहा है। CNN और अन्य संस्थानों ने प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की है।

लूला ने दूसरे देशों के दखल पर जताई आपत्ति-

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अपने भाषण में लोकतंत्र और दूसरे देशों के चुनावों में हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया। उन्होंने देशों के लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने के अधिकार पर जोर दिया।

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National Film Award

National Film Award: भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल नेशनल फिल्म अवॉर्ड का 72वां संस्करण कई मायनों में खास रहा। 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को सम्मानित किया। इस बार समारोह की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड का आयोजन पहली … Read more

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना: किसानों को मिलेगा 6 लाख तक का कृषि लोन, 23 सितंबर को लॉन्च होगा e-Portal

Farmers' Prosperity Scheme:

Farmers’ Prosperity Scheme: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए योगी सरकार नई योजना शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 सितंबर को मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के e-Portal को लॉन्च करेंगे। इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को दीर्घकालीन कृषि लोन की सुविधा दी जाएगी। किसानों को योजना के तहत 6 लाख रुपये तक का लोन रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।

Farmers’ Prosperity Scheme: 23 सितंबर को लॉन्च होगा e-Portal-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 सितंबर को लखनऊ में सुबह 9:30 बजे आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ‘भारत टैक्सी प्रोग्राम’ लॉन्च करेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के लिए e-Portal भी लॉन्च किया जाएगा। सरकार ने योजना के लिए 384 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और अगले 5 वर्षों में करीब 5 लाख किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

Farmers’ Prosperity Scheme: किन किसानों को मिलेगा योजना का लाभ-

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा। इसके लिए किसान का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। किसान के पास खेती योग्य जमीन होनी चाहिए और जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने चाहिए। यह योजना उन किसानों के लिए है, जो कृषि से जुड़ी जरूरतों के लिए लंबे समय के लिए कम ब्याज दर पर लोन लेना चाहते हैं।

6 लाख रुपये तक मिलेगा कृषि लोन-

योजना के तहत किसानों को अधिकतम 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन कृषि लोन उपलब्ध कराया जाएगा। इस लोन पर रियायती ब्याज दर की सुविधा दी जाएगी। राज्य सरकार की ओर से ब्याज पर 5 प्रतिशत तक का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। हालांकि, ब्याज सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। समय पर लोन की किस्त चुकाने वाले किसानों को ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

कैसे करें मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के लिए आवेदन-

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का संचालन उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किया जा रहा है। ऑफलाइन आवेदन के लिए किसान अपनी नजदीकी उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की शाखा में संपर्क कर सकते हैं। यहां से ऋण आवेदन फॉर्म प्राप्त करके उसे भरना होगा। आवेदन के साथ आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड, जमीन के जरूरी दस्तावेज और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे।

e-Portal के जरिए ऑनलाइन आवेदन-

योजना के लिए e-Portal 23 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा। पोर्टल के जरिए किसान आधार और मोबाइल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इसके बाद आवेदन फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते और भूमि से जुड़ी जानकारी जैसे खतौनी और खसरा का विवरण दर्ज करना होगा। जरूरी दस्तावेजों को स्कैन करके पोर्टल पर अपलोड करने के बाद आवेदन फॉर्म सबमिट किया जा सकेगा।

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SIR Notice:

SIR Notice: दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाताओं को भेजे जा रहे नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सवाल उठाए। अदालत ने इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर स्पष्टता मांगी। रिपोर्टों के मुताबिक, पीठ ने कुछ नोटिसों के लगभग यांत्रिक तरीके से जारी होने पर भी सवाल किया।

SIR Notice: नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मतदाताओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की उचित जांच जरूरी है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। सुनवाई के दौरान ECI की ओर से अदालत को बताया गया कि केवल नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित मतदाता का नाम मतदाता सूची से अपने आप हट जाएगा। चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सूची और नोटिस जारी करने के कारण पहले ही सार्वजनिक किए जा चुके हैं।

SIR Notice: BLO करेंगे मतदाताओं की मदद-

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगर किसी मतदाता को अतिरिक्त दस्तावेज या जानकारी की जरूरत है, तो बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उनकी सहायता के लिए उपलब्ध रहेंगे। अदालत ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में स्पष्टता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया।

ECI के जवाब के बाद होगी अगली सुनवाई-

मामले में अब चुनाव आयोग की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल किया जाना है। इसके बाद अदालत SIR के तहत नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी। अदालत ने चुनाव आयोग को लोगों के सामान्य सवालों और उनके समाधान को लेकर एक FAQ तैयार करने को भी कहा है। इसे अखबारों में प्रकाशित कराया जाना है, ताकि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को प्रक्रिया समझने में आसानी हो।

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IIT Bombay Student Suicide Case:

IIT Bombay Student Suicide Case: IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। सोमवार देर शाम फॉरेंसिक टीम भी जांच के लिए IIT बॉम्बे कैंपस पहुंची। इस बीच सूत्रों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच को कैंपस और एग्जाम रूम से जुड़े अहम CCTV फुटेज मिले हैं, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर, प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने कैंपस में मार्च निकाला। IIT मद्रास की Faculty Association ने भी प्रोफेसर डूला के समर्थन में बयान जारी किया है।

IIT Bombay Student Suicide Case: भारी पुलिस बल तैनात-

मंगलवार को IIT बॉम्बे कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात रहा। छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई गई है। इसी बीच IIT बॉम्बे के छात्र प्रतिनिधियों ने संस्थान में हालिया घटनाक्रम को लेकर बयान जारी किया। छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि वे किसी भी तरह के अकादमिक कदाचार या शैक्षणिक बेईमानी का समर्थन नहीं करते। उन्होंने साहिल की मौत को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि इस घटना ने संस्थान की मौजूदा व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत पैदा की है। छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, छात्रों का विरोध अकादमिक कदाचार को सही ठहराने के लिए नहीं था, बल्कि लंबे समय से सामने आ रहे छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर था। उन्होंने ऐसी संस्थागत व्यवस्थाओं में मजबूत और सार्थक सुधार की मांग की, ताकि भविष्य में किसी छात्र को ऐसी परिस्थितियों से न गुजरना पड़े।

IIT Bombay Student Suicide Case: प्रोफेसर डूला के समर्थन में उतरे छात्र-

प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में IIT बॉम्बे के कुछ छात्र भी सामने आए हैं। छात्रों ने प्रोफेसर डूला पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। IIT बॉम्बे में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के थर्ड ईयर के छात्र उत्कर्ष ने कहा कि साहिल की मौत बेहद दुखद है, लेकिन हॉस्टल में कास्ट डिस्क्रिमिनेशन के आरोपों को गलत बताया। सोमवार शाम IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर डूला के समर्थन में कैंपस मार्च निकाला।

IIT मद्रास की Faculty Association ने क्या कहा-

IIT मद्रास की Faculty Association ने 18 सितंबर 2026 को IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत पर दुख जताया। एसोसिएशन ने IIT बॉम्बे Faculty Forum के उस रुख का समर्थन किया, जिसमें कहा गया है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर के तौर पर संस्थान की Senate-approved academic procedures के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाई। IIT मद्रास Faculty Association ने कहा कि फैकल्टी सदस्यों को परीक्षाओं की निष्पक्षता और अकादमिक integrity बनाए रखने की जिम्मेदारी स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत निभाने में सक्षम होना चाहिए। एसोसिएशन ने मामले की जांच उचित संस्थागत और कानूनी अधिकारियों से निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से कराने की मांग की।

हॉस्टल से हटाए जा रहे सिलिंग फैन-

साहिल वाकोडे की मौत के बाद IIT बॉम्बे में हॉस्टल के सिलिंग फैन हटाकर वॉल-माउंटेड फैन लगाने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, संस्थान के अनुसार यह काम पिछले दो महीने से चल रहा है और हॉस्टल रिनोवेशन का हिस्सा है। संस्थान ने इसे साहिल वाकोडे की मौत के बाद की कार्रवाई से जोड़कर देखने से इनकार किया है।

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Iran Hormuz Strait Proposal:

Iran Hormuz Strait Proposal: ईरान ने अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत अमेरिकी सैन्य दबाव कम होने पर वह सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोल सकता है। ईरान का यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन तक पहुंचाया गया है। प्रस्ताव में दुश्मनी को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए दोबारा बातचीत शुरू करने की बात कही गई है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

Iran Hormuz Strait Proposal: मुज्तबा खामेनेई ने दी मंजूरी-

ईरानी अधिकारी के मुताबिक, इस प्रस्ताव को सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिल चुकी है। ईरान की मांग है कि उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म की जाए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े अमेरिकी सैन्य अभियानों को रोका जाए। क्योडो न्यूज ने मंगलवार को ईरान के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी।

Iran Hormuz Strait Proposal: मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया प्रस्ताव-

खबरों के मुताबिक, ईरान ने यह प्रस्ताव मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है। तेहरान की योजना न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्यस्थ देशों के साथ इस पहल पर चर्चा करने की है। हालांकि, ईरानी अधिकारी ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच किसी बैठक की संभावना से इनकार किया है। अधिकारी ने कहा कि समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को गंभीरता और प्रतिबद्धता दिखानी होगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से बढ़ी परेशानी-

अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर एनर्जी मार्केट और ग्लोबल शिपिंग पर पड़ा है। इसका खास प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन के लिए रणनीतिक रूप से अहम रास्ता है। ईरान चाहता है कि अमेरिका इस समुद्री मार्ग से जुड़ी अपनी सैन्य गतिविधियां रोके। इसके बदले में तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और बातचीत शुरू करने की बात कह रहा है।

ईरान ने पहले भी रखी थीं कई शर्तें-

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों का असर कच्चे तेल के निर्यात और होर्मुज से होने वाले समुद्री ट्रैफिक पर पड़ा है। इससे पहले तेहरान ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी थीं। इनमें बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को बहाल करना भी शामिल था।

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