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UP में टिकट बंटवारे पर नितिन नबीन का बड़ा प्लान, 70 लोगों की टीम करेगी फैसला

Up Politics:

Up Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बीजेपी ने प्रत्याशियों के चयन को लेकर एक नई व्यवस्था पर काम शुरू किया है। पार्टी हर जिले में करीब 70 लोगों की टीम बनाकर संभावित उम्मीदवारों के बारे में जमीनी फीडबैक जुटाने की तैयारी कर रही है। इस रिपोर्ट में दावेदारों की सक्रियता, संगठन में पकड़ और स्थानीय स्तर पर नाराजगी जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

हर जिले में 70 लोगों की टीम

प्रस्तावित टीम में वर्तमान, पूर्व और भूतपूर्व मंडल अध्यक्षों के साथ मंडल पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और जिला पदाधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा पूर्व सांसद और विधायक भी इस व्यवस्था का हिस्सा होंगे। टीम के बीच समन्वय के लिए संयोजक नियुक्त किया जाएगा। यह कमेटी प्रत्येक विधानसभा सीट के संभावित दावेदारों का पैनल तैयार करेगी।

Up Politics: दावेदारों पर जुटाया जाएगा जमीनी फीडबैक

टीम का काम केवल उम्मीदवारों के नाम जुटाना नहीं होगा। पार्टी स्थानीय संगठन की स्थिति और संभावित दावेदारों को लेकर कार्यकर्ताओं की राय भी जानने की तैयारी में है। कौन नेता क्षेत्र में लगातार सक्रिय है, किसकी संगठन में पकड़ है और किसे कार्यकर्ताओं का समर्थन हासिल है, इन पहलुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी। साथ ही मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय नाराजगी की रिपोर्ट भी सामने रखी जा सकती है।

नबीन के यूपी दौरे के बाद बनी रणनीति

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के मेरठ और सहारनपुर दौरे के दौरान बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर के संगठन की तैयारियों की समीक्षा की गई। पश्चिमी यूपी की विधानसभा सीटों पर संगठन की स्थिति को समझने के लिए पदाधिकारियों से संवाद भी किया गया। अब इसी फीडबैक व्यवस्था को प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया से जोड़ने की तैयारी है।

Up Politics: पैरवी से ज्यादा अहम होगी जमीनी रिपोर्ट?

इस व्यवस्था के तहत हर सीट के दावेदारों का पैनल पहले जिला स्तर पर तैयार होगा। इसके बाद इसे राज्य कमेटी और फिर केंद्रीय कमेटी तक भेजा जाएगा। ऐसे में टिकट के दावेदारों के बारे में स्थानीय संगठन से मिलने वाली रिपोर्ट प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। हालांकि अंतिम टिकट का फैसला पार्टी की निर्धारित केंद्रीय प्रक्रिया के तहत ही होगा।

गुटबाजी से ऊपर संगठन पर जोर

नितिन नबीन ने संगठन में पुराने मतभेदों को लेकर भी संदेश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, किसी विधायक या सांसद को केवल इस वजह से किसी नेता को बैठक से बाहर नहीं रखना चाहिए कि उसने पहले उसका विरोध किया था। पूर्व सांसदों, विधायकों और पुराने पदाधिकारियों को भी प्रक्रिया में शामिल करने के पीछे स्थानीय अनुभव और क्षेत्र की जानकारी का इस्तेमाल करना एक उद्देश्य बताया गया है।

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