Nitin Gadkari’s Statement: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी मिलों को सलाह दी है कि वे केवल चीनी के उत्पादन और बिक्री तक सीमित न रहें। उन्होंने कहा कि मिलों को गन्ने के साथ-साथ उससे निकलने वाले अवशेषों का भी बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए। इससे मिलों की आय बढ़ाने के साथ किसानों को भी गन्ने का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बन सकती है।
चीनी के अलावा दूसरे उत्पादों पर भी दें ध्यान
नितिन गडकरी ने चीनी मिलों को इथेनॉल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और बायो-फर्टिलाइजर जैसे उत्पादों की दिशा में आगे बढ़ने की सलाह दी। उनका कहना है कि गन्ने से बनने वाले अलग-अलग उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ाने से चीनी मिलों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं। इथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए किया जाता है। इसके उत्पादन को बढ़ावा देने से वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बढ़ सकती है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिशों को भी मदद मिल सकती है।
Nitin Gadkari’s Statement: गन्ने के कचरे से भी हो सकती है कमाई
चीनी बनाने की प्रक्रिया में गन्ने की खोई और अन्य जैविक अवशेष निकलते हैं। गडकरी ने इन अवशेषों का इस्तेमाल CBG यानी कंप्रेस्ड बायोगैस बनाने में करने पर जोर दिया। इसके अलावा खेती से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन और जैविक खाद तैयार करने में भी किया जा सकता है। इससे एक ओर कचरे का बेहतर उपयोग होगा, वहीं दूसरी ओर मिलों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है।

किसानों को भी मिल सकता है फायदा
गडकरी के मुताबिक, चीनी मिलों की आय बढ़ने का लाभ किसानों तक भी पहुंच सकता है। यदि मिलें चीनी के साथ इथेनॉल, CBG और अन्य उत्पादों से अतिरिक्त कमाई करती हैं तो इससे गन्ने का बेहतर मूल्य देने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ मिलों की उत्पादन क्षमता, बाजार की मांग, सरकारी नीतियों और उत्पादों की कीमतों पर निर्भर करेगा।
Nitin Gadkari’s Statement: आयात पर निर्भरता घटाने पर जोर
इथेनॉल और CBG जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के पीछे ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करना भी एक अहम उद्देश्य है। नितिन गडकरी लंबे समय से कृषि अवशेषों और जैविक कचरे से ईंधन तैयार करने की संभावनाओं पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में चीनी मिलों के लिए संदेश साफ है कि गन्ने से केवल चीनी ही नहीं, बल्कि इथेनॉल, CBG, बायो-फर्टिलाइजर और अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाएं। इससे मिलों की आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं और किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की संभावना बन सकती है।
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