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ज्ञानेश कुमार के पास गिरफ्तारी से सुरक्षा का प्रावधान, फिर क्यों उठ रहे कार्रवाई के सवाल?

Gyanesh Kumar:

Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। इस हफ्ते लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ के आरोप दोहराते हुए ज्ञानेश कुमार को चेतावनी दी और उन्हें कथित वोटर लिस्ट हेरफेर के मामले में ‘सरकारी गवाह’ बनने की सलाह दी। विपक्ष की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग भी उठाई जा रही है। हालांकि, इस मांग के सामने 2023 में बने Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act की धारा 16 का प्रावधान है। यह प्रावधान CEC और चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों को लेकर सिविल या क्रिमिनल कार्यवाही से सुरक्षा देता है।

Gyanesh Kumar: विवाद के केंद्र में ज्ञानेश कुमार-

23 सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर मतभेद को लेकर चर्चा तेज हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ज्ञानेश कुमार के साथ काम कर रहे दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। इन आपत्तियों का संबंध चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) जैसे मुद्दों से बताया गया। हालांकि, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन आपत्तियों को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। विपक्ष के कई नेताओं ने SIR के तहत वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और कथित हेरफेर के आरोप लगाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया है और SIR समेत आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार को क्या कानूनी सुरक्षा मिली है-

Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act, 2023 की धारा 16 के मुताबिक, कोई अदालत मौजूदा या पूर्व CEC या चुनाव आयुक्त के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए किसी काम, कार्रवाई या दिए गए बयान को लेकर सिविल या क्रिमिनल कार्यवाही शुरू या जारी नहीं रख सकती। यही प्रावधान ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी या मुकदमे की मांग के बीच कानूनी बहस का केंद्र बन गया है। हालांकि, इस सुरक्षा की सीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में दावा किया गया है कि यदि किसी कार्रवाई को आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं माना जाता, तो धारा 16 की सुरक्षा लागू नहीं होनी चाहिए।

कैसे बना चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का नया कानून-

2023 से पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए संसद द्वारा बनाई गई कोई विशेष वैधानिक प्रक्रिया नहीं थी। मार्च 2023 में अनूप बरनवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक अंतरिम चयन समिति का प्रावधान किया था। इसके बाद संसद ने 2023 में नया कानून बनाया। इसमें CJI की जगह एक केंद्रीय मंत्री को चयन समिति में शामिल किया गया। इसी कानून की संवैधानिक वैधता और चुनाव आयुक्तों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं लंबित हैं।

धारा 16 को लेकर क्या है चुनौती-

वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर दावा किया है कि वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर करना चुनाव आयुक्त के आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं माना जा सकता। याचिका में ज्ञानेश कुमार की जांच और उनके खिलाफ सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में जन प्रतिनिधित्व कानून और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया है।

विपक्ष और बीजेपी आमने-सामने-

विपक्ष के कई नेता चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर के आरोप लगा चुके हैं। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से कथित अनियमितताओं के मामले में ‘सरकारी गवाह’ बनने की अपील भी की है। वहीं, बीजेपी ने चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया है और विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

क्या ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जा सकता है-

विपक्ष इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में अलग प्रक्रिया अपनाने की कोशिश कर चुका है। अप्रैल में राज्यसभा के चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस तरह के प्रस्तावों को मंजूरी देने से इनकार किया था। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक विपक्ष की ओर से आगे एक और प्रस्ताव लाने की योजना की बात सामने आई है।

सुप्रीम कोर्ट में भी जारी है कानूनी लड़ाई-

NGO लोक प्रहरी की ओर से भी धारा 16 को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अदालत ने अब तक इस प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार किया है। 23 सितंबर को इसी मामले से जुड़े एक घटनाक्रम में दो जजों की बेंच के बंटे हुए फैसले के बाद 2023 के कानून से जुड़ा मामला मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा गया। अब यह तय होना है कि इस मामले की सुनवाई संवैधानिक पीठ करेगी या नहीं। फिलहाल, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप, उन्हें मिली कानूनी सुरक्षा और धारा 16 की संवैधानिक वैधता—तीनों मुद्दे अदालत और राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।

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