Home » ओपिनियन » बदरीनाथ धाम का महत्व कुत्ते भी समझते हैं, फिर मानव में तो विवेक भी है….

बदरीनाथ धाम का महत्व कुत्ते भी समझते हैं, फिर मानव में तो विवेक भी है….

Opinion: हिमालय में स्थित बदरीनाथ धाम से देश-विदेश के करोड़ों हिंदुओं की गहरी आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। भगवान बदरी नारायण यहां सर्व कल्याण हेतु ध्यानमग्न हैं। श्रद्धालु उनके दर्शन का लाभ तो उठाते हैं, लेकिन साथ ही यह ध्यान भी रखते हैं कि कहीं उनके कारण भगवान विष्णु का ध्यान भंग न हो जाए। श्रद्धालु तो दूर कुत्ते भी इस बात का ध्यान रखते हैं। जब कुत्ते यहां विचरण करते हैं, तो अपने मूल स्वभाव को त्यागकर कभी भी भौंकते नहीं हैं।जब पशु-पक्षी तक भगवान की ध्यान मुद्रा का ध्यान रखते हैं, तो फिर मानव होने के नाते हम क्यों भूल कर रहे हैं, यह बात बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही है? आखिर भगवान ने तो मानव को पशुओं से ज्यादा विवेक और सोचने-समझने की शक्ति प्रदान की है।दुखद है कि इस बीच बदरी धाम में संस्कृति के नाम पर ऐसा हुड़दंग मचाया गया, जिसकी जितनी भी निंदा की जाय कम है।
क्या सेना के सिर ठीकरा फोड़ देना ही पर्याप्त है?
हास्यास्पद है कि अब विवाद बढ़ा है, तो सरकार और उसके नुमांइदे अपना पल्ला झाड़कर पूरा ठीकरा सेना के सिर पर फोड़ रहे हैं। उनकी ओर से दलील दी जा रही है कि यह कार्यक्रम सेना का था और कलाकारों को भुगतान भी सेना ने ही किया।मान लेते हैं कि कार्यक्रम सेना का था, लेकिन क्या यह ध्यान रखना सरकार और उसके जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व नहीं होना चाहिए कि धाम में क्या हो रहा है और आगे क्या होने जा रहा है? प्रशासनिक अधिकारी वहां पर किसलिए बिठाए गए हैं? क्या बदरी-केदार मंदिर समति के अध्यक्ष को इतनी समझ नहीं होनी चाहिए कि धाम की मर्यादा कैसे सुरक्षित रखी जाए, कैसे इस दिशा में सजग रहा जाए?
Opinion: मंदिर समिति किस काम की?
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष और धर्माधिकारी जनमानस को स्पष्ट करेंगे कि इस पवित्र और संवेदनशील स्थान में डीजे के शोर पर हुड़दंग मचाया जाना सही था कि गलत? सांस्कृति के नाम पर धाम में जो हुआ उसे वे जायज ठहराएंगे या विरोध करेंगे ? यदि विरोध करेंगे तो क्या जनता के मंच पर आने का साहस दिखा पाएंगे? यदि वे इसका विरोध कर रही जनता के धरने-प्रदर्शनों में शामिल होकर अपनी बात रखते हैं, तो फिर माना जा सकता है कि वे निरपराध हैं, वर्ना समय उनका अपराध क्यों नहीं लिखेगा?
बद्रीनाथ धाम
बद्रीनाथ धाम
Opinion: केंद्र सरकार विषय को गंभीरता से ले
धार्मिक मान्यताओं के लिहाज से बदरीनाथ भगवान विष्णु का यह एक ऐसा धाम है जहां शंख नहीं बजाया जाता है। पर्यावरण की दृष्टि से भी इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए यह जरूरी है। शंख ध्वनि का ग्लेशियरों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पहाड़ के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी इस दिशा में सावधानी बरतते आ रहे हैं, धर्म स्थलों की मर्यादा बनाए हुए हैं, लेकिन दुखद है कि सनातन विचारों के नाम पर वोट मांगती रही राज्य सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं रहा।केंद्र सरकार को चाहिए कि वह समय रहते इस विषय को गंभीरता से लेकर उचित कार्रवाई करवाए, वर्ना जनता का आक्रोश जिस तरह तेज होता जा रहा है, उससे स्थिति नियंत्रण से बार हो सकती है। जनता तीर्थ स्थलों की पवित्रता से कोई समझैता करने के पक्ष में नहीं है, तो सरकार भी अपना दायित्व निभाए।
लेखक-मोहन सिंह रावत

यह भी पढ़े…1375 युवाओं को नौकरी, योगी ने सैफई मॉडल को घेरा, गांव के लिए क्या है नया प्लान?