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उज्जैन शाही मस्जिद में 3 फीट पर क्यों बिगड़ा माहौल? लोगों ने रखी अपनी राय

उज्जैन में मस्जिद विवाद पर लोगों से सीधी बातचीत
उज्जैन: सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम अब बड़ा मुद्दा बन गया है। इसी काम के दौरान शाही मस्जिद का एक हिस्सा भी इसकी जद में आया। प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बातचीत के बाद करीब 3 फीट हिस्सा हटाने पर सहमति बनी। हालांकि, इसी प्रक्रिया के दौरान पुलिस पर पथराव ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। जमीनी हालात देखने के लिए खबर इंडिया के संवाददाता रोहित अत्री उज्जैन पहुंचे। इलाके में तनाव के बीच भारी पुलिस बल तैनात नजर आया। जगह-जगह बैरिकेडिंग थी। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। रोहित अत्री ने ग्राउंड पर स्थानीय लोगों से बातचीत की। इस दौरान प्रशासन की कार्रवाई, चौड़ीकरण और पथराव को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। दूसरी ओर, स्थानीय मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने भीड़ और हिंसा को गलत बताया।
सवाल सिर्फ मस्जिद का नहीं, विरोध के तरीके का भी
सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन का कहना है कि यह काम सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किया जा रहा है। जिस सड़क पर काम चल रहा है, उसे करीब 15 मीटर तक चौड़ा करने की योजना है। इस पूरी प्रक्रिया में धार्मिक स्थलों समेत सैकड़ों संरचनाएं प्रभावित हो रही हैं। यही बात ग्राउंड पर सबसे ज्यादा चर्चा में रही। सवाल उठता है कि जब चौड़ीकरण के लिए दूसरे ढांचों पर भी कार्रवाई हो रही थी, तो शाही मस्जिद के हिस्से को लेकर विरोध इतना तीखा क्यों हुआ?हालांकि, इसका जवाब किसी एक समुदाय या पूरे समाज पर लागू नहीं किया जा सकता। विरोध करने वालों की अपनी धार्मिक और भावनात्मक चिंताएं हैं। वहीं, कानून-व्यवस्था का सवाल प्रशासन के सामने अलग है।
                                                              उज्जैन शाही मस्जिद विवाद

 

 

3 फीट पर बनी सहमति, फिर कैसे बिगड़ा माहौल?
मामला कोर्ट तक पहुंचा था। बाद में मुस्लिम पक्ष और उज्जैन नगर निगम के बीच बातचीत हुई। इसके बाद करीब 3 फीट हिस्सा हटाने पर सहमति बनी। मस्जिद कमेटी की ओर से प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की बात भी सामने आई। इसके साथ ही दुकानों से जुड़े वैकल्पिक इंतजाम और मीनार को दूसरी जगह शिफ्ट करने की व्यवस्था पर भी सहमति की बात सामने आई। हाईकोर्ट ने इसके बाद दोनों अपीलों का निपटारा कर दिया।फिर भी सोमवार को स्थिति अचानक बिगड़ गई। पुलिस के मुताबिक भीड़ ने पथराव किया। इसके बाद आंसू गैस और हल्के बल प्रयोग से भीड़ को हटाया गया। पुलिस ने CCTV और ड्रोन फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान करने की बात कही है।
शहर काजी ने की शांति की अपील
इस पूरे घटनाक्रम में शहर काजी की भूमिका पर भी चर्चा हुई। शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।उन्होंने कहा कि मस्जिद का मुद्दा आपसी सहमति से सुलझ चुका है। साथ ही, लोगों से बिना जरूरत मौके पर जमा नहीं होने की अपील की गई। वहीं, रोहित अत्री की ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों से एक अहम सवाल पूछा गया। आखिर जब बातचीत का रास्ता खुला था, तब भीड़ और पथराव की स्थिति क्यों बनी? इस सवाल का कोई एक आधिकारिक जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है। पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार और कई अन्य को हिरासत में लेने की जानकारी दी है। इसके अलावा, कथित भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट की भी जांच की जा रही है।
ग्राउंड पर लोगों ने क्या कहा?
खबर इंडिया से बातचीत में एक स्थानीय बुजुर्ग ने कहा कि उन्होंने उज्जैन में ऐसा माहौल पहले नहीं देखा। उन्होंने हिंसा को गलत बताया। उनके मुताबिक, किसी भी विवाद का नुकसान आखिरकार आम और गरीब लोगों को ही उठाना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को पढ़ाई और रोजगार की तरफ बढ़ना चाहिए। हिंसा से किसी समाज का भला नहीं होता। बातचीत के दौरान उन्होंने मुस्लिम समाज के भीतर अलग-अलग फिरकों का भी जिक्र किया। हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत विचार थे। इन्हें पूरे मुस्लिम समाज की राय नहीं माना जा सकता। यही इस ग्राउंड रिपोर्ट की सबसे अहम तस्वीर भी है। एक तरफ धार्मिक भावना और पुरानी इमारत से जुड़ाव है। दूसरी तरफ विकास और सार्वजनिक सुविधा की योजना है। इनके बीच हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

 

                             उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और मस्जिद विवाद पर लोगों ने रखी अपनी राय

 

 

ओवैसी के बयान पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयानों का भी जिक्र हुआ। उन्होंने मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई का विरोध किया था और इसे वक्फ संपत्तियों से जुड़े व्यापक विवाद से जोड़ा था। हालांकि, किसी राजनीतिक बयान को सीधे उज्जैन के पथराव का कारण बताना जांच के बिना सही नहीं होगा। पुलिस की जांच में सोशल मीडिया गतिविधियों और कथित भड़काऊ सामग्री की भूमिका देखी जा रही है। इसलिए इस कड़ी को फिलहाल सवाल के रूप में ही देखना ज्यादा उचित है।
अब सबसे बड़ा सवाल आगे का है
उज्जैन में इस विवाद ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। क्या विकास और धार्मिक आस्था के बीच रास्ता बातचीत से निकाला जा सकता है? क्या अफवाहों और भीड़ की राजनीति पर समय रहते रोक लग सकती है?और क्या युवाओं को विवाद की भीड़ से निकालकर शिक्षा और रोजगार की दिशा में जोड़ा जा सकता है?सबसे जरूरी बात यही है कि सड़क चौड़ीकरण का काम हो या धार्मिक स्थल का सवाल, कानून हाथ में लेने से समाधान नहीं निकलता। उज्जैन में प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई है। मस्जिद कमेटी ने सहमति के तहत काम आगे बढ़ाने की बात कही है। अब निगाह इस पर है कि शहर में शांति कायम रहती है या विवाद फिर किसी नए मोड़ पर पहुंचता है।

 

                                             उज्जैन में मस्जिद विवाद पर लोगों से सीधी बातचीत

 

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