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विपक्षी दल और कॉकरोच क्या चाहते हैं, CEC ज्ञानेश कुमार के बहाने क्या है उनकी रणनीति?

Opinion: विपक्षी दल और कॉकरोच क्या चाहते हैं, CEC ज्ञानेश कुमार के बहाने क्या है उनकी रणनीति?
Opinion: विपक्षी दल और कॉकरोच क्या चाहते हैं, CEC ज्ञानेश कुमार के बहाने क्या है उनकी रणनीति?

Opinion: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC ) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक संगठन भलीभांति जानते हैं कि वे कितने भी धरने-प्रदर्शन क्यों न कर लें, मुख्य चुनाव आयुक्त न तो इस्तीफा देंगे और न उन्हें पद से हटाया जा सकता है।सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC ) को न तो इस्तीफा देने के लिए बाध्य सकती है और न ही उन्हें पद से हटाने का उसे कोई संवैधानिक अधिकार है।फिर विपक्षी दलों में इतना सामर्थ्य भी तो नहीं है कि वे संसद में महाअभियोग लाकर उन्हें हटा सकें। इसके बावजूद वे विरोध-प्रदर्शन जारी रखने का राग अलाप रहे हैं, तो जाहिर कि उनकी मंशा इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की है।

क्या है विपक्षी पार्टियों की रणनीति?

ऐसा लगता है कि विपक्षी दल कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह संदेश देने की रणनीति में हैं कि देश में चुनाव निष्पक्ष नहीं हो रहे हैं और चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है।विपक्षी पार्टियों की रणनीति भविष्य में कितनी कारगर हो पाती है, इसके लिए तो अभी इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन फिलहाल तो यही दिखाई देता है कि न तो मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा देने वाले हैं और न सरकार किसी दबाव में है। एक अखबार में छपी जिस खबर पर विपक्ष ने हंगामा खड़ा किया, उसे लेकर चुनाव आयोग अपनी बात रख चुका है कि आयोग के भीतर जो भी निर्णय हुए तीनों आयुक्तों की सहमति से ही हुए हैं।

Opinion: सरकार झुकने के मूड में नहीं 

जहां तक सरकार को घेरने की बात है, तो सरकार के रुख से लगता है कि वह इस मुद्दे पर झुकने को तैयार नहीं है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग सरकार ने यह सोचकर मान ली कि युवा पीढ़ी की भावनाओं का सम्मान किया जाए, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं है कि किसी सोशल मीडिया संगठन को गलतफहमी हो जाए कि वह हर मुद्दे पर सरकार को झुका लेगा? आखिर कॉकरोच जनता पार्टी नामक सोशल मीडिया संगठन को जमीनी हकीकत के बारे में कितना अंदाजा है? 

 युवा पीढ़ी सब समझती है

नीट पेपर लीक के मुद्दे पर तो युवा इसलिए गोलबंद हो गए कि मुद्दा सीधे उनके हितों से जुड़ा हुआ था, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर युवा अपने हिसाब से विश्लेषण करेंगे। उनके दिलो-दिमाग में सवाल उठ सकते हैं कि आखिर ईवीएम से वोटिंग की शुरुआत किसके राज में हुई थी? किसी राज्य में ईवीएम विपक्ष को अच्छी क्यों लग जाती है और किसी राज्य में खराब क्यों? क्या जहां वे जीतेंगे, वहां वोट चोरी नहीं और जहां वे हारेंगे वहां वोट चोरी?  यह सुविधाजनक राजनीति क्यों?  क्या युवा पीढ़ी इस बात से अनजान है कि पूर्व में विपक्षी दलों ने EVM और वीवीपैट (VVPAT) की कार्यप्रणाली को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में जो याचिकाएं और पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थी, वे खारिज हो गई थी? 

Opinion: गुमराह नहीं होगी युवा पीढ़ी 

युवा पीढ़ी हर विषय पर गंभीरता से नजर रखती है। उसे हर मुद्दे पर सड़कों पर नहीं उतारा जा सकता है, वह सोच-विचार कर ही सड़कों पर उतरेगी। शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस बार सरकार ने सख्ती अपनाई। सरकार सख्ती क्यों न अपनाए? क्या मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा उसके अधिकार में है?  आखिर विपक्ष में संविधान के बड़े-बड़े जानकार हैं, वे जानते हैं कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार CEC को उनके पद से केवल उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिन पर सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के जज के समान होती है।

महाअभियोग का कोई फायदा नहीं 

विपक्षी दल जानते हैं कि अगर वह मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए महाअभियोग ले भी आए, तो इसका कोई फायदा नहीं क्योंकि सदन में उनके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।संख्या बल के हिसाब से देखें, तो लोकसभा में कुल 540 सांसद हैं, और दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है।वर्तमान में इंडिया गठबंधन के पास लगभग 184 सांसद हैं, जो इस आंकड़े से काफी कम हैं। सत्तारूढ़ दल या अन्य सभी को मिलाए बिना विपक्ष के लिए यह बहुमत पाना असंभव है। राज्यसभा में कुल 243 सांसद हैं, जहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 162 सदस्यों का समर्थन चाहिए। यहां भी इंडिया गठबंधन के पास सिर्फ 67 सांसद हैं, जिससे महाअभियोग का प्रस्ताव पास कराना काफी मुश्किल है। आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न होने के बावजूद यदि विपक्षी दल महाअभियोग का प्रस्ताव लाते हैं, तो यह भी सिर्फ उनकी रणनीति का हिस्सा माना जाएगा।

Opinion: जनता सब जानती है

अभी विपक्ष की पूरी कोशिश यह संदेश देने की है कि CEC और भाजपा के बीच मिलीभगत है।विपक्षी दल किस मुद्दे को ज्यादा हवा देते हैं, यह उनके विवेक पर निर्भर करता है, लेकिन वे इस बात को भी ध्यान में रखें कि जनता भी जागरूक है।जो सवाल वे उठा रहे हैं, वे उल्टे उनकी ओर भी लौट सकते हैं। लोग हर विषय का विश्लेषण करना जानते हैं, खासकर युवा पीढ़ी जिसे जेन-जी कहा जाता है, वह तो फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाती है। वह इतना अवश्य देखती है कि क्या उसके हित में है और क्या नहीं?