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RBI के रेपो रेट बढ़ाते ही शेयर बाजार क्यों हुआ धड़ाम? सेंसेक्स 500 अंक टूटा, निफ्टी में भी भारी गिरावट

RBI Repo Rate Hike:

RBI Repo Rate Hike: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का ऐलान करते ही बाजार में गिरावट तेज हो गई। सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 72,592 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 185 अंक से ज्यादा फिसलकर 22,590 के आसपास कारोबार करता दिखा। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।

RBI Repo Rate Hike: RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया-

RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही RBI ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। निवेशकों को आशंका है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

RBI Repo Rate Hike: कच्चे तेल की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई चिंता-

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा रहता है। इसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ा।

रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंचा रुपया-

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर होकर 96.84 के स्तर तक पहुंच गया। रुपये में गिरावट और डॉलर की मजबूती ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश को कम आकर्षक बना सकता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भी दबाव-

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर के मजबूत होने के बीच विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पूंजी निकाल रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बुधवार को बाजार में गिरावट को और तेज कर दिया।

किन सेक्टर और शेयरों पर सबसे ज्यादा असर-

ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर रियल एस्टेट, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर पर देखने को मिला। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स करीब 1.7 फीसदी और ऑटो इंडेक्स 1.4 फीसदी तक टूट गया। वहीं, सितंबर तिमाही में कमजोर बिक्री के चलते टाइटन का शेयर करीब 4 फीसदी गिरकर तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, ब्याज दरों में बढ़ोतरी से मार्जिन में सुधार की उम्मीद के चलते कुछ PSU बैंक शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली।

रेपो रेट क्या होता है-

सरल शब्दों में समझें तो जब कॉमर्शियल बैंकों को नकदी की जरूरत होती है, तो वे RBI से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को यह कर्ज देता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है। रेपो रेट देश में कर्ज की लागत और ब्याज दरों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है।

रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन महंगा क्यों करते हैं-

जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना महंगा हो जाता है। इससे उनकी उधारी लागत बढ़ती है। बैंक अपने मुनाफे और वित्तीय संतुलन को बनाए रखने के लिए इस बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकते हैं। इसके चलते होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे फ्लोटिंग रेट आधारित कर्ज महंगे हो सकते हैं।

आपकी जेब और EMI पर क्या पड़ेगा असर-

अगर आपने फ्लोटिंग रेट पर लोन लिया है तो रेपो रेट बढ़ने का असर आपकी EMI पर पड़ सकता है। बैंक मासिक किस्त बढ़ाने के बजाय कई बार लोन की अवधि बढ़ा देते हैं। ऐसे में EMI भले ही समान रहे, लेकिन आपको लंबे समय तक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। वहीं, नया घर या गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को बढ़ी हुई ब्याज दरों पर कर्ज मिल सकता है। इससे उनकी कुल उधारी लागत बढ़ सकती है।

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