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एसआईआर पर मुस्लिम महिलाओं की दो टूक, राहुल गांधी के आरोपों को नकारा; योगी सरकार का किया समर्थन

वोट चोरी विवाद पर मुस्लिम महिलाओं की राय
वोट चोरी विवाद पर मुस्लिम महिलाओं की राय

SIR Controversy: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), वोट चोरी के आरोपों और मुस्लिम समुदाय के साथ कथित भेदभाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जहां मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी के समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं। इसी बीच ख़बर इंडिया के पत्रकार रोहित अत्री ने मुस्लिम महिलाओं और अन्य लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि वे इन मुद्दों को किस नजरिए से देख रहे हैं। इस दौरान कुछ महिलाओं ने एसआईआर का समर्थन किया और कहा कि इससे फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने में मदद मिल रही है। वहीं, राजनीतिक विरोध, महिला सुरक्षा, पुलिस की कार्रवाई और नेताओं के बयानों को लेकर भी लोगों ने अपनी राय रखी।

SIR Controversy: एसआईआर को लेकर मुस्लिम महिलाओं ने क्या कहा?

ख़बर इंडिया के पत्रकार रोहित अत्री ने दिल्ली में मौजूद मुस्लिम महिलाओं से सवाल किया कि क्या वास्तव में एसआईआर के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जाना उचित है। इस पर समरीन सैयद नाम की महिला ने कहा कि एसआईआर के तहत गलत मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और वह इस प्रक्रिया को सही मानती हैं। उन्होंने कहा कि पहले फर्जी वोटिंग होती थी, लेकिन अब व्यवस्था में सुधार हो रहा है।

समरीन ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की ओर से महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के दावे पर भी सवाल किए। उनका कहना था कि यदि नेता वास्तव में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो उन्हें अपने आचरण में भी संविधान के मूल्यों का पालन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता संविधान को हाथ में तो रखते हैं, लेकिन उसके सिद्धांतों पर अमल नहीं करते।

उन्होंने यह भी दावा किया कि जब वह 17 साल की थीं, तब उनसे वोट डलवाए गए थे। हालांकि, उनके इस बयान का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं हो सका। समरीन ने यह सवाल भी उठाया कि यदि एसआईआर के कारण मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, तो इसके बावजूद कुछ सीटों पर संबंधित राजनीतिक दलों को जीत कैसे मिली। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर दोबारा चुनाव कराने की मांग करने वालों को अपने आरोपों का आधार स्पष्ट करना चाहिए।

SIR Controversy: कुछ महिलाओं ने कहा- हमारे परिवार के वोट नहीं कटे

शबाना रहमान नाम की महिला ने भी एसआईआर का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची में शामिल हैं, उनके नाम हटाए जाने चाहिए। उनके अनुसार, एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को सही करना है और इसे केवल मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया के रूप में देखना उचित नहीं है।एक अन्य महिला ने अपना नाम अंजलि बताया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के किसी सदस्य का वोट नहीं कटा है और परिवार के सभी सदस्य मतदान करते हैं। उनके मुताबिक, सरकार के तहत हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं हो रहा है।

अंजलि ने दावा किया कि जिन लोगों के नाम एक से अधिक जगह दर्ज थे, उनके नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि दोहरी प्रविष्टियों और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया को धार्मिक भेदभाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।हालांकि, इन महिलाओं के व्यक्तिगत अनुभवों से पूरे देश में मतदाता सूची की स्थिति या एसआईआर के प्रभाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मतदाता सूची में नाम कटने से जुड़े व्यापक दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित चुनावी दस्तावेजों को देखना जरूरी है।

SIR Controversy: मुस्लिम महिलाओं ने राहुल गांधी पर लगाए राजनीतिक आरोप

वीडियो में मौजूद कुछ महिलाओं ने राहुल गांधी की राजनीति की आलोचना की। उनका आरोप था कि कांग्रेस नेता मतदाता सूची में गड़बड़ी के मुद्दे को लेकर लोगों को भड़का रहे हैं और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।सफिया नाम की महिला ने कहा कि राहुल गांधी को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगने का कोई उचित आधार नहीं दिखता। उन्होंने एसआईआर में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को गलत बताया। सफिया के मुताबिक, उनके परिवार का वोट नहीं कटा है और वह राहुल गांधी के बयानों से सहमत नहीं हैं।

एक अन्य महिला ने कहा कि कांग्रेस नेताओं का काम विरोध प्रदर्शन के जरिए लोगों को उकसाना रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को भी राजनीतिक आंदोलनों में शामिल होने के लिए प्रभावित किया जा रहा है। उनका कहना था कि लोग अपने विवेक से निर्णय लें और किसी भी नेता के बयानों से प्रभावित होकर विरोध में शामिल न हों।कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि कांग्रेस को महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की चिंता होती, तो उन्हें उसकी राजनीति से असहमति नहीं होती। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उठाने का आरोप लगाया।

क्या मुस्लिम समुदाय के साथ हो रहा है भेदभाव?

पत्रकार रोहित अत्री ने महिलाओं से यह भी पूछा कि क्या उन्हें भाजपा सरकार में मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव महसूस होता है। इस पर समरीन सैयद समेत कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्हें ऐसा कोई भेदभाव दिखाई नहीं देता।समरीन ने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और बच्चों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से बेहतर हुई है और लोग देर रात तक भी बाहर निकल सकते हैं।

एक अन्य महिला ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को अपनी बात रखने का अवसर मिला है और वे सार्वजनिक स्थानों पर आकर अपनी राय व्यक्त कर रही हैं। उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को दिया। उनके अनुसार, पहले मुस्लिम महिलाओं के लिए इस तरह खुलकर अपनी बात रखना आसान नहीं था।हालांकि, ये महिलाओं के व्यक्तिगत विचार और अनुभव हैं। सरकार की योजनाओं के लाभ, रोजगार और कानून-व्यवस्था की स्थिति का व्यापक आकलन करने के लिए स्वतंत्र आंकड़ों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जरूरत होती है।

SIR Controversy: भाजपा समर्थक महिलाओं ने योगी आदित्यनाथ का किया समर्थन

वीडियो में कुछ महिलाओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्थन करते हुए कहा कि वह राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार की योजनाओं का लाभ धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि पात्रता के आधार पर दिया जाता है।जब पत्रकार ने पूछा कि क्या योगी सरकार मुस्लिम समुदाय को परेशान कर रही है, तो महिलाओं ने इस आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार करोड़ों लोगों को राशन उपलब्ध करा रही है और लाभार्थियों की धार्मिक पहचान देखकर योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाता।

एक महिला ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ने अपनी मेहनत के दम पर सम्मान हासिल किया है और उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग उचित नहीं है। कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ को दोबारा सत्ता में आना चाहिए।अखिलेश यादव के मुस्लिम समुदाय के समर्थन में आवाज उठाने के सवाल पर भी कुछ महिलाओं ने उनकी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में अपराधियों को संरक्षण मिला। जब अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे लोगों का जिक्र हुआ, तो कुछ महिलाओं ने उनकी आपराधिक गतिविधियों और कथित जमीन कब्जाने के मामलों का हवाला देते हुए योगी सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया।

एनकाउंटर और कानून-व्यवस्था पर भी हुई चर्चा

उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर उठने वाले सवालों पर भी पत्रकार ने महिलाओं की राय जानी। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि एनकाउंटर की कार्रवाई में भेदभाव होता है, जबकि भाजपा समर्थक महिलाओं ने इस दावे को खारिज किया।एक महिला ने कहा कि अपराध करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई उसके धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उसके कृत्य के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने विकास दुबे के एनकाउंटर का उदाहरण देते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रही है।उनका तर्क था कि भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था के मामले में हिंदू और मुस्लिम के बीच अंतर नहीं करती। हालांकि, पुलिस मुठभेड़ों की वैधता और उनमें निष्पक्षता जैसे सवालों का आकलन प्रत्येक मामले के तथ्यों, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।

SIR Controversy: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और खाने के वितरण को लेकर सवाल

वीडियो में जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया गया। पत्रकार ने पूछा कि मतदाता सूची के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को किस तरह देखा जाना चाहिए और क्या वहां राजनीतिक विरोध के साथ अन्य गतिविधियां भी चल रही थीं।इस पर कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्हें वहां विरोध प्रदर्शन के बजाय संगीत, नृत्य और भोजन वितरण जैसी गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रदर्शन का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है, तो मदद केवल भाजपा के विरोध वाले कार्यक्रमों या स्थानों तक सीमित क्यों रहती है।

जुनेद खान की ओर से भोजन वितरण का उल्लेख करते हुए एक महिला ने उनकी आर्थिक मदद के स्रोत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि मोबाइल फोन की मरम्मत का काम करने वाला व्यक्ति एक दिन में लाखों रुपये का भोजन कैसे वितरित कर सकता है। यह सवाल उन्होंने अपने संदेह के रूप में उठाया, लेकिन वीडियो में इसके समर्थन में कोई वित्तीय दस्तावेज या स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई।महिलाओं ने यह भी कहा कि 10 तारीख को होने वाले प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से भाजपा को कोई बड़ा राजनीतिक नुकसान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी इतनी कमजोर नहीं है कि कुछ नेताओं या सोशल मीडिया पर चर्चित लोगों के आने से उसके राजनीतिक आधार पर असर पड़े।

SIR Controversy: ध्रुव राठी और राहुल गांधी को लेकर तीखी टिप्पणियां

वीडियो में ध्रुव राठी का भी जिक्र हुआ। कुछ महिलाओं ने उनके संभावित आगमन पर प्रतिक्रिया देते हुए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि उनके आने से भाजपा की राजनीतिक स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।राहुल गांधी को लेकर भी कुछ महिलाओं ने तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार नए मुद्दे उठाकर केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, ताकि उन्हें प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिल सके।

एक महिला ने कहा कि राहुल गांधी का राजनीतिक तरीका विरोध प्रदर्शन करना और लोगों को सरकार के खिलाफ खड़ा करना है। उन्होंने कहा कि वह उनके बयानों से प्रभावित होकर किसी आंदोलन में शामिल नहीं होंगी।कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर उन्हें भरोसा नहीं है। एक महिला ने यहां तक कहा कि यदि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो वह सबसे पहले देश छोड़ देंगी। यह उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिक्रिया थी।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर क्या बोले लोग?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वीडियो का प्रमुख मुद्दा रही। कुछ महिलाओं ने कहा कि ज्ञानेश कुमार अपना काम कर रहे हैं और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का पर्याप्त आधार नहीं है। उन्होंने इस मांग को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया।एक महिला ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होगा और उन्होंने इस संबंध में अपना विश्वास जताया। दूसरी ओर, पत्रकार ने यह सवाल भी उठाया कि विपक्ष उन पर वोट चोरी कराने का आरोप क्यों लगा रहा है और इस विवाद के पीछे क्या राजनीतिक कारण हो सकते हैं।

वीडियो में कुछ महिलाओं ने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी बताकर उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और केवल राजनीतिक असहमति के कारण उनसे इस्तीफा नहीं मांगा जाना चाहिए।

वहीं, एसआईआर का विरोध करने वालों की चिंताओं और मतदाता सूची से नाम हटने के आरोपों की स्वतंत्र जांच का सवाल भी महत्वपूर्ण है। किसी भी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का आकलन केवल राजनीतिक दावों से नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों, आधिकारिक जवाबों और शिकायतों के निपटारे के आधार पर किया जाना चाहिए।

SIR Controversy: प्रियंका गांधी और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी का मुद्दा

वीडियो में प्रियंका गांधी और प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी का मुद्दा भी उठा। पत्रकार ने महिलाओं से पूछा कि जब कांग्रेस नेता यह दावा कर रहे हैं कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ, तो इस पर उनकी क्या राय है।कुछ महिलाओं ने कहा कि यदि महिलाओं के अधिकारों की बात की जा रही है, तो पुलिसकर्मियों के साथ होने वाले व्यवहार पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ मारपीट की गई और बाद में प्रदर्शनकारियों ने खुद के साथ दुर्व्यवहार होने की शिकायत की।

एक महिला ने राहुल गांधी पर दिल्ली पुलिस की एक महिला कांस्टेबल को कोहनी मारने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी महिला पुलिसकर्मी को चोट लग जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता। हालांकि, इस आरोप की पुष्टि के लिए वीडियो में कोई स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।

महिलाओं ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मी भी किसी के परिवार का हिस्सा होते हैं और उनके साथ भी सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।दूसरी ओर, पत्रकार ने यह सवाल भी उठाया कि प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने पुलिस पर अभद्रता करने के आरोप क्यों लगाए। इस तरह वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के व्यवहार को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई।

SIR Controversy: क्या भाजपा सरकार में मुस्लिम महिलाओं को सम्मान मिल रहा है?

पत्रकार ने सफिया समेत अन्य महिलाओं से पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि कांग्रेस की राजनीति में महिलाओं को पर्याप्त सम्मान मिलता है। इस पर कुछ महिलाओं ने कहा कि यदि उन्हें सम्मान मिल रहा होता, तो वे कांग्रेस की राजनीति से सहमत होतीं और भाजपा के समर्थन में अपनी बात रखने के लिए सामने नहीं आतीं।

कुछ महिलाओं ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस मुस्लिम समुदाय को भाजपा के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश करती है। उनके अनुसार, मस्जिदों और अन्य धार्मिक मुद्दों को लेकर डर का माहौल बनाया जाता है, जबकि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई मामलों में स्थिति स्पष्ट हो जाती है।उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे लोग कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर समझते हैं और किसी भी मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर राय नहीं बनाते। उनके मुताबिक, मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष तय करना चाहिए।हालांकि, वीडियो में व्यक्त ये विचार संबंधित महिलाओं के निजी अनुभवों और राजनीतिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें पूरे मुस्लिम समुदाय की राय के रूप में नहीं देखा जा सकता।

बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों का मुद्दा भी उठा

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के संदर्भ में बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों का मुद्दा भी सामने आया। पत्रकार ने सवाल किया कि ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में होने चाहिए या नहीं और एसआईआर की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।कुछ महिलाओं ने कहा कि भारत के वास्तविक नागरिकों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए और जिन लोगों के नाम गलत तरीके से दर्ज हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में मृत लोगों, दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों और एक से अधिक जगह नाम दर्ज कराने वालों की पहचान करना जरूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2002 में भी एसआईआर हुआ था, लेकिन वर्तमान प्रक्रिया को लेकर जिस तरह विवाद हो रहा है, वह उनके अनुसार राजनीतिक कारणों से है।हालांकि, किसी व्यक्ति की नागरिकता और मतदाता के रूप में उसकी पात्रता अलग-अलग कानूनी सवाल हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय संबंधित कानूनों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए।

SIR Controversy: भाजपा समर्थक मुस्लिम महिलाओं ने क्या संदेश दिया?

Khabar India के इस वीडियो में सामने आई महिलाओं ने एसआईआर, योगी आदित्यनाथ की सरकार और भाजपा की नीतियों को लेकर अपना समर्थन जताया। कुछ महिलाओं ने कहा कि उनके परिवारों के वोट नहीं कटे हैं और उन्हें हिंदू-मुस्लिम भेदभाव महसूस नहीं होता। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए वोट चोरी का मुद्दा उठाने का आरोप लगाया।

वहीं, वीडियो में मतदाता सूची की निष्पक्षता, चुनाव आयोग की जवाबदेही, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। इन मामलों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के दावे सामने आते रहे हैं, इसलिए अंतिम निष्कर्ष के लिए स्वतंत्र जांच, आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित संस्थाओं के जवाबों को देखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, Khabar India के पत्रकार रोहित अत्री द्वारा प्रस्तुत इस वीडियो में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने भाजपा के समर्थन में खुलकर अपनी राय रखी और विपक्ष के आरोपों से असहमति जताई। यह उनके व्यक्तिगत विचारों को सामने लाता है, लेकिन इससे पूरे मुस्लिम समुदाय या देश के मतदाताओं की राय का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। एसआईआर और वोट चोरी से जुड़े विवाद में वास्तविक स्थिति समझने के लिए राजनीतिक बयानों के साथ-साथ प्रमाणों और आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है।