MPSC Student Protest: महाराष्ट्र के पुणे में पिछले 11 दिनों से चल रहा एमपीएससी छात्रों का आंदोलन आखिरकार 12 अक्टूबर को स्थगित कर दिया गया। छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही वे आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग पर भी अड़े हुए थे। सरकार ने जांच कराने का भरोसा दिया, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही थी। हालांकि, रविवार रात हुई बातचीत के बाद बीच का रास्ता निकला। सरकार ने अध्यक्ष को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का फैसला किया। इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया में सुधार और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दों पर भी आश्वासन दिए गए। आइए जानते हैं कि 11 दिनों से चल रहे इस आंदोलन को खत्म करने के लिए क्या फैसला लिया गया।
MPSC Student Protest: अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर अटकी थी बातचीत
एमपीएससी की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोपों के बाद छात्रों ने पुणे में आंदोलन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार इस्तीफा दें।सरकार ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना था कि सिर्फ जांच की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामले के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसी वजह से अध्यक्ष के इस्तीफे को लेकर सरकार और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी।

सरकार ने संवैधानिक प्रक्रिया का दिया हवाला
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया था कि एमपीएससी के अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना अध्यक्ष को सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता।सरकार जांच के माध्यम से मामले की सच्चाई सामने लाना चाहती थी, जबकि छात्र अध्यक्ष के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे थे। दोनों पक्षों के बीच यही सबसे बड़ा मतभेद बना हुआ था, जिसके कारण बातचीत में बार-बार रुकावट आ रही थी।
MPSC Student Protest: रोहित पवार और राज ठाकरे ने भी किया समर्थन
छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया। वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की।दूसरी ओर, आंदोलन के दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस मामले दर्ज किए गए। भूख हड़ताल पर बैठे कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने से भी मामला गंभीर हो गया। इसके बाद छात्रों की मांगें पेपर लीक की जांच तक सीमित नहीं रहीं। वे आयोग के अध्यक्ष की जवाबदेही तय करने और अपने खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी करने लगे।

रविवार रात की बातचीत में निकला बीच का रास्ता
11 अक्टूबर की रात मंत्री शिवेंद्र सिंह राजे भोसले आंदोलन स्थल पर पहुंचे। वहां उन्होंने विधायक रोहित पवार, विश्वजीत कदम और छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। शुरुआत में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन सकी।इसके बाद अध्यक्ष विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का विकल्प सामने आया। सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला किया। इससे छात्रों की तत्काल कार्रवाई की मांग और सरकार की ओर से बताई गई संवैधानिक प्रक्रिया के बीच समाधान का रास्ता निकला।सरकार के इस फैसले के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने आपस में चर्चा की। आखिरकार 12 अक्टूबर को आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी गई। इस तरह आंदोलन खत्म होने की मुख्य वजह अध्यक्ष के इस्तीफे पर सहमति बनना नहीं, बल्कि उन्हें फिलहाल छुट्टी पर भेजने का फैसला और अन्य मांगों पर सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन रहे।
MPSC Student Protest: जांच आयोग में तुकाराम मुंढे को मिली अहम जिम्मेदारी
सरकार ने एमपीएससी मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग बनाने की घोषणा की है। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश दिलीप भोंसले करेंगे। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव बनाया गया है।आयोग में सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाईक, अधिकारी लखमी गौतम और सेवानिवृत्त अधिकारी गणेश पाटील को भी शामिल किया गया है।यह आयोग पेपर लीक के आरोपों, परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच करेगा। छात्र भी अपने दस्तावेज और सबूत आयोग के सामने पेश कर सकेंगे। आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। इससे पता चलेगा कि परीक्षा में क्या गड़बड़ियां हुई थीं और उनके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

भर्ती प्रक्रिया और पुलिस मामलों पर भी मिले आश्वासन
सरकार ने छात्रों को भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी भरोसा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पदों पर भर्ती करने और वर्ष 2027 की ग्रुप-सी भर्ती में पदों की संख्या दोगुनी करने की बात कही गई है।इसके अलावा, आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने का आश्वासन भी दिया गया है।हालांकि, इन घोषणाओं और आश्वासनों पर अमल होने की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश जारी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल छात्रों ने सरकार के भरोसे के आधार पर आंदोलन स्थगित किया है। अब वे चाहते हैं कि सरकार अपने सभी वादे तय समय के भीतर पूरे करे।
MPSC Student Protest: आंदोलन स्थगित, लेकिन अध्यक्ष पर अंतिम फैसला बाकी
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विवेक भीमनवार को छुट्टी पर भेजना और उन्हें स्थायी रूप से पद से हटाना अलग-अलग बातें हैं। छात्र उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने फिलहाल उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला किया है। उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच के निष्कर्षों और संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।पुणे में 11 दिनों तक चले आंदोलन के बाद प्रदर्शन तो रुक गया है, लेकिन छात्रों के सवाल अभी भी बाकी हैं। क्या जांच आयोग 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप पाएगा? क्या पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी? क्या भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी? और क्या एमपीएससी के अध्यक्ष को लेकर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा?अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने वादों को पूरा करने की है। छात्रों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया है, लेकिन एमपीएससी की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ जवाबदेही तय करने की उनकी मांग अब भी बनी हुई है।









