Rahul Gandhi SC Petition: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें SIR पर अंतरिम रोक लगाने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों का ब्योरा सार्वजनिक करने, संबंधित रिकॉर्ड पेश करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिका में स्वतंत्र समिति से ऑडिट कराने और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है। आखिर राहुल गांधी की याचिका में क्या-क्या कहा गया है और इन मांगों का मतदाताओं पर क्या असर पड़ सकता है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है पूरा मामला?
12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले उसकी सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं लिए गए। उन्होंने मतदाता सूची में नामों को हटाने और संशोधित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। ये याचिकाकर्ताओं के आरोप और दलीलें हैं; इन पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
Rahul Gandhi Supreme Court Petition: राहुल गांधी की याचिका में क्या हैं 10 बड़ी मांगें?
1. SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश करे चुनाव आयोग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि चुनाव आयोग को SIR से जुड़ी पूरी फाइलें, बैठकों के रिकॉर्ड, अधिकारियों की टिप्पणियां और दर्ज आपत्तियां पेश करने का निर्देश दिया जाए। इसमें 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से जुड़े रिकॉर्ड और ECINET तथा ERONET सिस्टम के एक्सेस लॉग भी शामिल हैं।
इसकी अहमियत क्या है? इन दस्तावेजों से यह जांचने में मदद मिल सकती है कि प्रक्रिया शुरू करने और उससे जुड़े फैसले लेने में किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया।
2. SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक वैधता की जांच
याचिका में अदालत से यह जांच करने की मांग की गई है कि चुनाव आयोग के विवादित फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के अनुरूप हैं या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि यदि कोई फैसला वैधानिक अधिकार के बिना लिया गया है, तो उसे निरस्त किया जाना चाहिए। यह मांग अदालत से कानूनी समीक्षा कराने के लिए है, न कि किसी फैसले को पहले से अवैध घोषित करने के लिए।
Rahul Gandhi SC Petition: 3. जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो
राहुल गांधी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मतदाता सूची तैयार करने या उसमें संशोधन के दौरान संवैधानिक अथवा कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। याचिका में जरूरत पड़ने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई का भी उल्लेख है। हालांकि, कार्रवाई के लिए संबंधित उल्लंघन और जिम्मेदारी का निर्धारण जरूरी होगा।
4. शिकायतों का उचित तरीके से निपटारा हो
याचिका में चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह याचिकाकर्ताओं की शिकायतों और संबंधित मामलों पर उचित निर्णय ले। साथ ही SIR से जुड़े फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए जाएं और उनका रिकॉर्ड रखा जाए। इस मांग का उद्देश्य निर्णय लेने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि विवादित फैसलों के पीछे का आधार रिकॉर्ड में मौजूद हो।

Rahul Gandhi SC Petition: 5. ऑनलाइन फॉर्म-6 निर्धारित नियमों के अनुरूप हो
फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। याचिका में मांग की गई है कि ऑनलाइन फॉर्म-6, मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रारूप के अनुरूप हो। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्धारित फॉर्म में बदलाव नियमों में विधिवत संशोधन किए बिना नहीं होना चाहिए। यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया नागरिकों के मतदान के अधिकार से सीधे जुड़ी है।
6. सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बने
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। समिति से SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए या संशोधित किए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और मतदाता डेटाबेस तक पहुंच तथा उसमें किए गए बदलावों की जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में EVM की तकनीकी संरचना और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा का विषय भी उठाया गया है।
Rahul Gandhi SC Petition: 7. हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण सार्वजनिक हों
यह याचिका की प्रमुख मांगों में से एक है। इसमें चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम बूथवार सार्वजनिक किए जाएं। इसके साथ ही प्रत्येक नाम हटाने का कारण, हटाए गए मतदाताओं का उम्र और लिंग के आधार पर वर्गीकरण तथा पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
आम मतदाता के लिए इसका क्या मतलब है? यदि अदालत यह राहत देती है, तो मतदाता सूची में हुए बदलावों की जांच करना और पात्र मतदाताओं के नाम हटने की स्थिति में सुधार की मांग करना अधिक आसान हो सकता है। हालांकि, यह राहत अभी याचिका में मांगी गई है; इसे लागू आदेश नहीं माना जाना चाहिए।
8. नोटिस और सुनवाई का मौका दिए बिना नाम न हटाए जाएं
याचिका में मांग की गई है कि किसी मतदाता का नाम कानून के अनुसार नोटिस दिए बिना और उचित सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना सूची से न हटाया जाए। इसके अलावा, पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में पात्र नागरिकों को कानून में तय अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति देने की मांग की गई है। इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में संबंधित नागरिक को अपनी बात रखने और पात्रता साबित करने का उचित अवसर मिले।
Rahul Gandhi SC Petition: 9. पूरे देश में SIR पर अंतरिम रोक लगे
राहुल गांधी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले में उठाए गए मुद्दों पर विचार और फैसला होने तक सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए। यह इस याचिका की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक है। लेकिन यहां अंतर समझना जरूरी है—SIR पर रोक लगाने की मांग करना और सुप्रीम कोर्ट का रोक लगा देना दो अलग बातें हैं। अदालत इस मांग पर क्या निर्णय लेती है, उससे आगे की प्रक्रिया तय होगी।
10. मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अन्य उचित आदेश दिए जाएं
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए वह अन्य आवश्यक आदेश जारी करे। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करना है। यह एक सामान्य राहत की मांग है, जिसके तहत अदालत मामले की सुनवाई के दौरान जरूरी समझे जाने वाले अतिरिक्त निर्देशों पर विचार कर सकती है।
Rahul Gandhi SC Petition: क्या सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगा दी है?
नहीं। याचिका में SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है, लेकिन मांग अपने आप में अदालत का आदेश नहीं होती। इसलिए जब तक अदालत का स्पष्ट आदेश सामने न आए, यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे देश में SIR रोक दिया गया है। इस मामले में एक और महत्वपूर्ण अपडेट है। 13 अक्टूबर की सुबह आई रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 प्रक्रियागत खामियां बताई थीं।
इनमें कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी, कुछ दस्तावेजों से जुड़ी आपत्तियां और नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं होने जैसी बातें शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों के दूर होने तक सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। रजिस्ट्री की आपत्तियां याचिका के मूल मुद्दों पर अदालत के अंतिम फैसले के समान नहीं हैं।
SIR का संबंध मतदाता सूची के पुनरीक्षण से है। इसका उद्देश्य सूची की जांच और उसमें जरूरी संशोधन करना है, लेकिन प्रक्रिया के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम छूटने या हटने की आशंका को लेकर विवाद उठ सकता है।
राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की याचिका में पारदर्शिता, रिकॉर्ड उपलब्ध कराने, नाम हटाने के कारण सार्वजनिक करने और पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। यदि अदालत इनमें से कोई राहत देती है, तो उससे मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। फिलहाल मतदाताओं के लिए व्यावहारिक कदम यही है कि वे अपनी जानकारी आधिकारिक मतदाता सेवाओं के माध्यम से जांचें और नाम या विवरण में गड़बड़ी होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार या शामिल करने के लिए आवेदन करें।
राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की याचिका में SIR पर रोक लगाने से लेकर चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच, स्वतंत्र ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तक कई मांगें रखी गई हैं। इन मांगों का केंद्र मतदाता सूची में पारदर्शिता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की सुरक्षा है। अब इस मामले में आगे की दिशा अदालत की प्रक्रिया, रजिस्ट्री की आपत्तियों के समाधान और याचिका पर होने वाली सुनवाई से तय होगी। इसलिए फिलहाल इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका के रूप में देखना चाहिए, न कि SIR पर रोक लगने या आरोपों के सही साबित होने के रूप में।
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