Opinion: भारत दुनिया का एक सशक्त लोकतांत्रिक देश है।यहां न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं में जनता का दृढ़ विश्वास है।यहां जनता सरकार से किसी विषय पर असहमति की दशा में संविधान और कानून के दायरे में लोकतांत्रिक तरीके से संवाद कर सकती है।जनता के पास शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के विकल्प हैं।इसके बावजूद यदि कोई सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश की तर्ज पर अराजक और हिंसक रास्ते को जायज ठहराता है या उससे प्रेरणा लेने की बात करता है, तो उसे यही सलाह दी जा सकती है कि यह भारत है, इसे गहराई से समझें।यहां की जनता को किसी भी प्रकार के अराजक और हिंसक वातावरण के लिए उकसाया नहीं जा सकता है।
बांग्लादेश को अराजकता से क्या मिला?
बांग्लादेश में जिस तरीके से तख्ता तख्तापलट हुआ उससे प्रेरणा लेने की बात कोई अराजक और हिंसक मानसिकता ही कर सकती है। पूरी दुनिया ने देखा कि बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने के लिए जो अराजक और हिंसक माहौल बनाया गया उसकी मानवता को क्या कीमत चुकानी पड़ी। राजनीतिक अस्थिरता के कारण बांग्लादेश को क्या-क्या नहीं झेलना पड़ा? हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के कारण करीब 1500 लोगों की जानें चली गई। बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़, मॉब वॉयलेंस और राजनीतिक अस्थिरता के कारण बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगा। देश पर विदेशी कर्ज और वित्तीय दबाव बढ़ गया। देश के निर्यात विशेषकर गारमेंट या वस्त्र उद्योग में भारी गिरावट आई।सत्ता परिवर्तन के बाद साम्प्रदायिक तनाव और हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की जो डरावनी तस्वीरें सामने आई, उन्हें देख पूरी दुनिया के कलेजे हिल गए। यदि भारत में भी कुछ लोग यही स्थितियां देखना चाहते हैं, तो क्या इन लोगों को हीरो माना जाना चाहिए? इन्हें सिर पर बिठाया जाना चाहिए?
Opinion: भारत में बहुत गहरी हैं लोकतंत्र की जड़ें
भारत में बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन के मंसूबे रखने वालों को देखना चाहिए कि भारत और बांग्लादेश की राजनीतिक-सामाजिक स्थिति में बहुत बड़ा अंतर है।यहां विविधता में एकता का भाव बहुत गहरा है, जबकि बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता और नफरती मानसिकता की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हुए अत्याचारों से पता लग ही चुका है। बांग्लादेश जैसे मुल्कों से लोकतांत्रिक भावनाओं और मानवीय संवेदनाओं के सम्मान की अपेक्षा करना बड़ा मुश्किल है, जबकि भारत की व्यापक आबादी लोकतंत्र में गहरा विश्वास रखती है। भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं, उनके क्रियाकलापों से शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन जनता की स्पष्ट सोच है कि जनहित के किसी भी मुद्दे का समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही होना चाहिए। अराजकता और हिंसा के लिए भारत की धरती उर्वरा साबित नहीं हो सकती है।








