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‘गलती नहीं की तो SSR क्यों करा रहे हैं?’ SIR के बाद चुनाव आयोग पर भड़के इमरान मसूद

UP POLITICS: उत्तर प्रदेश में SIR के बाद SSR को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सवाल उठाया कि अगर मतदाता सूची में सब कुछ सही था, तो दोबारा संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच गठजोड़ का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी की ओर से पेश किए गए कथित सबूतों का भी जिक्र किया।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अब विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर पहले मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी नहीं थी, तो दोबारा संशोधन क्यों कराया जा रहा है? उन्होंने दावा किया कि 17 राज्यों में SSR कराने का फैसला मतदाता सूची से जुड़ी कथित खामियों को लेकर सवाल खड़े करता है।

इमरान मसूद ने यह बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से चुनावी प्रक्रिया और राहुल गांधी के आरोपों पर दिए गए बयान के संदर्भ में दिया। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह राजनाथ सिंह का सम्मान करते हैं, लेकिन राहुल गांधी की ओर से सार्वजनिक किए गए कथित सबूतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

‘गलती नहीं की तो SSR की जरूरत क्यों पड़ी?’

इमरान मसूद ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि SIR के बाद कुछ ही महीनों में दोबारा मतदाता सूची के संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी। उनके मुताबिक, अगर पहले की प्रक्रिया पूरी तरह सही थी, तो अब SSR कराने की वजह स्पष्ट की जानी चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने अपनी गलती स्वीकार की है और इसी वजह से 17 राज्यों में SSR कराया जा रहा है। उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग के बीच गठजोड़ होने का भी आरोप लगाया। हालांकि, SSR कराने का फैसला अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पहले की मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई थी। इस दावे की पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के आदेश, पुनरीक्षण के उद्देश्य और संबंधित आधिकारिक आंकड़ों को देखना जरूरी है।

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UP POLITICS: राहुल गांधी के सबूतों का किया जिक्र

इमरान मसूद ने दावा किया कि राहुल गांधी ने 25 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूत पेश किए थे। उन्होंने ऐसे मामलों का उल्लेख किया, जिनमें एक ही घर के पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम होने और मतदाता पहचान से जुड़ी तस्वीरों पर सवाल उठाए गए थे।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि इन आरोपों पर गंभीरता से जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे को लेकर भाजपा के नेता असहज हैं। यहां ध्यान देने वाली बात है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोप और उनकी आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग बातें हैं। संबंधित रिकॉर्ड और चुनाव आयोग के जवाब के आधार पर ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट और मतदाता सूची पर क्या बोले?

इमरान मसूद ने दावा किया कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मामला सुप्रीम कोर्ट में उठने पर संबंधित पक्षों को जवाब देना पड़ सकता है। उन्होंने फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां 92 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और 90 प्रतिशत से अधिक लोग अपील के लिए पहुंचे। मसूद ने कहा कि अगर अपील स्वीकार होने के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम बहाल होते हैं, तो नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे। हालांकि, इन आंकड़ों और अपीलों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। यह भी देखना होगा कि कितनी अपीलें स्वीकार हुईं, कितने नाम बहाल किए गए और चुनाव आयोग ने इस संबंध में क्या जानकारी दी है।

UP POLITICS: ‘2029 तय है’, सरकार पर भी साधा निशाना

कांग्रेस सांसद ने मतदाता सूची के विवाद को संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।

मसूद ने राजनीतिक बदलाव का दावा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं और मौजूदा सरकार को भी जनता के सामने जवाब देना होगा। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की विदाई तय है। यह उनका राजनीतिक दावा है, चुनावी नतीजे के बारे में कोई स्थापित तथ्य नहीं।

कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर भी उठाए सवाल

इमरान मसूद ने भाजपा सांसद साक्षी महाराज के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद के हालात पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर सरकार ने क्या प्रगति की है और कितने लोग अपने मूल स्थानों पर लौट पाए हैं। इस मुद्दे पर उनके बयान को भी राजनीतिक आरोप और सवाल के रूप में देखा जाना चाहिए। पुनर्वास की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सरकारी आंकड़ों और आधिकारिक रिपोर्टों की जांच जरूरी है।

UP POLITICS: CJP प्रदर्शन और पाकिस्तान पर भी बोले

इमरान मसूद ने CJP के तिरंगा मार्च से पहले सेंट्रल पार्क बंद किए जाने के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे राजनीतिक बदलाव से जोड़ते हुए राहुल गांधी का जिक्र किया और दावा किया कि देश में परिवर्तन का दौर चल रहा है। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के पाकिस्तान संबंधी बयान पर भी मसूद ने टिप्पणी की। उन्होंने पाकिस्तान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी की आलोचना की और कहा कि पड़ोसी देश के बारे में तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए।

SIR और SSR विवाद में आगे क्या अहम होगा?

इमरान मसूद के बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है। पार्टी का सवाल है कि SIR के बाद SSR की जरूरत क्यों पड़ी और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया किस आधार पर की गई।

इस विवाद में आगे तीन बातें महत्वपूर्ण होंगी- SSR कराने के लिए चुनाव आयोग की ओर से बताई गई वजह, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण और नाम हटाए जाने या बहाल किए जाने के आधिकारिक आंकड़े। फिलहाल, इमरान मसूद ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कई आरोप लगाए हैं।

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