Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कोशिश रही कि विश्व पर अमेरिका का डंका बजे या ना बजे, पर ऐसा इतिहास बने, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप को ही दुनिया जाने कि राष्ट्रपति ट्रंप ही विश्व पर राज कर सकता है। इसी प्रसंग में ग्रीनलैंड पर उनकी नजर लगी थी। इसके लिए उनके प्रयास सफल हो रहे हैं। हाल ही में ट्रंप ग्रीनलैंड और डेनमार्क के नेताओं के साथ समझौता करने में सफल हो गया है। इस समझौते में बड़ी धमकी थी कि यूरोप को रूस से सुरक्षा चाहिए, तो नाटो को जीवित रखने के लिए अमेरिका का साथ देना होगा।
अमेरिका अपना नेतृत्त्व मजबूत कर सकेगा
इसी काशिश में अमेरिका यूक्रेन को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता है। यूक्रेन को वेसे ही नाटो का सदस्य बना ही दिया। लेकिन रूस को यूक्रेन की यह नाटो सदस्यता पच नहीं रही है। सोवियत संध का एक हिस्सा अमेरिका हाइजैक करने पर तुला है। रूस और यूक्रेन की लड़ाई चल रही है। इस लड़ाई में आग लगाने का काम अमेरिका कर रहा है, इसी कारण रूस को घुटनों के बल चलने के लिए अमेरिका ने व्यापार पर सैंक्सन लगाये हैं। रूस का खनिज तेल यूरोप को जाता था, उसे रोककर अमेरिका की कोशिश है कि रूस का तेल कोई न ले। पिछले दिनों यूरोप के देशों पर ट्रंप के दबाव से अमेरिका को सफलता मिली। ग्रीनलैंड से रूस के साथ सीमा पास पड़ती है, इसलिए यदि कभी रूस के साथ युद्ध की संभावनाएं बढ़ी, तो नाटो सहित अमेरिका अपना नेतृत्त्व मजबूत कर सकेगा।
Washington: अपने उत्पादों को पूरी दुनिया में भेजने की क्षमता
दुनिया का अकूत तेल भंडार ग्रीनलैंड के पास है। इस संपदा को पाने के लिए ट्रंप जी-तोड़ कोशिश में जुटा था। इस उम्मीद में यह समझौता हुआ, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का दोहन अमेरिका आसानी से कर पाएगा। विश्व में अमेरिका एक बार दोबारा सबसे बड़ी विश्व शक्ति बनने के सपने देख रहा है। क्योंकि अभी विश्व बहु धु्रबीय शक्तियों में बंटने के रास्ते पर है। चीन ने अपने उत्पादों को पूरी दुनिया में भेजने की क्षमता प्राप्त कर ली है। इसको अकेले अमेरिका का रोक पाना संभव नहीं है। तीसरी शक्ति रूस भी अपनी तकनीकी में श्रेष्ठ है। वह भी अपने व्यापार को बढ़ाने में पहली पंक्ति में है। भारत की भी कोशिश है कि वह अपने उत्पादों को ज्यादा से ज्याद तैयार करे, और दुनिया के बाजार में अपने महत्त्व का ट्रंप को अहसास कराए। आज छोटा-सा छोटा देश भी अपने यहां पैदा किए उत्पादों से अपनी महत्ता को स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। ऐसी परिस्थितियों में विश्व व्यापार में हर देश भागी बन रहा है।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
ये भी पढ़े… दिल्ली में लगातार हो रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से व्यापारियों को 3,000 करोड़ का नुकसान








