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अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, स्वास्थ्य शिविर मामले में दर्ज की गई एफआईआर

Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं, हुई FIR

Abhishek Banerjee: तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सेवाश्रय स्वास्थ्य शिविर मामले में उनके खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है। बिष्णुपुर थाने में स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के नेता अभिजीत दास की शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कई कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत जांच शुरू कर दी है और पूरे मामले में वित्तीय स्रोतों से लेकर आयोजन प्रक्रिया तक की पड़ताल की जा रही है।

कई लोगों को बनाया गया आरोपी

पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में अभिषेक बनर्जी के अलावा उनके कार्यकारी सहायक सुमित रॉय, फाल्टा क्षेत्र से तृणमूल के उम्मीदवार जहांगीर खान, पूर्व विधायक दिलीप मंडल सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। इसके अलावा कुछ अज्ञात आयोजकों, चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस पूरे मामले में सभी की भूमिका की जांच कर रही है।

Abhishek Banerjee: स्वास्थ्य शिविर को लेकर उठे गंभीर सवाल

सेवाश्रय पहल की शुरुआत अभिषेक बनर्जी ने अपने डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र में लोगों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। बाद में इसका विस्तार राज्य के अन्य हिस्सों तक किया गया। हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई स्वास्थ्य शिविर बिना आवश्यक अनुमति के आयोजित किए गए और दवाइयों तथा चिकित्सीय उपकरणों के उपयोग के लिए भी निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया।

Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं, हुई FIR

निधि और आयोजन प्रक्रिया की होगी जांच

पुलिस के अनुसार, सेवाश्रय और सेवाश्रय-द्वितीय स्वास्थ्य शिविरों को लेकर कुल सोलह शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जांच एजेंसियां अब शिविरों के आयोजन में इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत, प्रशासनिक स्वीकृतियों और पूरी संचालन प्रक्रिया की विस्तृत जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।

Abhishek Banerjee: पहले भी दर्ज हो चुकी है FIR

इस मामले में पहली प्राथमिकी दो जुलाई को डायमंड हार्बर थाने में दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बिना आवश्यक अनुमति के चिकित्सा शिविर संचालित कर लोगों की सुरक्षा से समझौता किया गया। साथ ही बिना वैधानिक स्वीकृति के चिकित्सा सेवाएं देने, दवाइयों और चिकित्सीय उपकरणों के उपयोग तथा नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए हैं। अब दूसरी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले की जांच और तेज होने की संभावना है।