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AgustaWestland scam: कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई याचिका खारिज

AgustaWestland scam: कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई याचिका खारिज
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AgustaWestland scam: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाला मामले के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की रिहाई से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है। क्रिश्चियन मिशेल ने हाईकोर्ट से मांग की थी कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें भारत लाया गया था, उनकी अधिकतम सजा की अवधि वह पहले ही जेल में काट चुके हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जाए। हालांकि सीबीआई, ईडी और केंद्र सरकार ने इस मांग का कड़ा विरोध किया था।

मिशेल पर हैं ये गंभीर आरोप

क्रिश्चियन मिशेल ने अपनी याचिका में भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि के आर्टिकल 17 को भी चुनौती दी थी। क्रिश्चियन मिशेल को दिसंबर 2018 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत लाया गया था। उस समय 2017 की चार्जशीट में उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वत देने जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके बाद सितंबर 2020 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जालसाजी (फर्जीवाड़ा) का आरोप भी जोड़ा गया, जिसकी सजा उम्रकैद तक हो सकती है। केंद्र सरकार ने यह भी दलील दी कि प्रत्यर्पण संधि का आर्टिकल-17 भारत को उन अपराधों के साथ-साथ उनसे जुड़े अन्य अपराधों में भी मुकदमा चलाने की अनुमति देता है। इसी आधार पर जालसाजी के आरोप भी जोड़े गए हैं।
बता दें कि इससे पहले 17 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स की रिहाई से जुड़ी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था जबकि सितंबर 2020 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जालसाजी (फर्जीवाड़ा) का आरोप भी जोड़ा गया था, जिसकी सजा उम्रकैद तक हो सकती है। इसलिए यह कहना गलत है कि मिशेल ने अधिकतम सजा पूरी कर ली है।

AgustaWestland scam: मिशेल के वकील ने दी ये दलील

दिल्ली हाईकोर्ट में मिशेल के वकील अल्जो के. जोसेफ ने कहा था कि उनके मुवक्किल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े आरोपों के लिए पांच साल से अधिक समय जेल में बिताया है, इसलिए उन्हें रिहाई मिलनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट से उन्हें अलग-अलग मामलों में जमानत मिल चुकी है, लेकिन वह अब भी जेल में हैं। ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2025 में उनकी रिहाई की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं, जिनमें उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

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