Iran-US Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का भारत सरकार ने स्वागत किया है। तय समयसीमा से करीब डेढ़ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर की घोषणा कर दी थी। वहीं, ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय शर्तों को स्वीकार किए जाने के बाद दो सप्ताह के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देने पर सहमति जताई है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद भारत सरकार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इस कदम का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि मौजूदा संकट को खत्म करने के लिए तनाव कम करना, संवाद और कूटनीति ही सबसे कारगर उपाय हैं। अपने बयान में मंत्रालय ने कहा कि इस संघर्ष का आम लोगों पर गंभीर असर पड़ा है और इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी प्रभावित हुआ है। भारत ने उम्मीद जताई कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए समुद्री आवाजाही अब बिना किसी बाधा के जारी रहेगी और वैश्विक कारोबार सामान्य स्थिति में लौटेगा।
Statement on the recent development in West Asia ⬇️
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— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) April 8, 2026
सीजफायर के बाद होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फारस की खाड़ी में भारत के 16 जहाज फिलहाल लंगर डाले हुए थे, जिन पर कुल 433 भारतीय नाविक सवार थे। अब हालात बेहतर होने के साथ इन जहाजों के जल्द रवाना होने की तैयारी है। अनुमान है कि इन्हें भारत पहुंचने में करीब तीन दिन से लेकर एक सप्ताह तक का समय लग सकता है।
इससे पहले, तय समयसीमा से करीब डेढ़ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान कर दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि ईरान के साथ कई अहम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और आने वाले दो हफ्तों में अंतिम समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए तैयार हो गया है। उनका कहना है कि यह भरोसा उन्हें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ बातचीत के दौरान मिला। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और अब आगे की प्रक्रिया कूटनीतिक स्तर पर आगे बढ़ेगी।
लेखक: अरुण चौरसिया
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