Home » राजनीति » अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे से असहज क्यों है कांग्रेस? सीटों के तालमेल पर कौन लेगा फैसला

अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे से असहज क्यों है कांग्रेस? सीटों के तालमेल पर कौन लेगा फैसला

Akhilesh Yadav Raebareli visit:

Akhilesh Yadav Raebareli visit: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा की शुरुआत की। यह वही लोकसभा क्षेत्र है, जहां से कांग्रेस नेता राहुल गांधी सांसद हैं। अखिलेश के इस दौरे के बाद सपा और कांग्रेस के बीच आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अखिलेश यादव ने गठबंधन जारी रहने की बात कही है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर उनके ‘जीतने की क्षमता’ वाले बयान ने कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

Akhilesh Yadav Raebareli visit: रायबरेली से PDA यात्रा शुरू करने पर क्यों बढ़ी हलचल-

अखिलेश यादव ने रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत कर सपा के चुनावी अभियान को गति दी। रायबरेली को कांग्रेस का मजबूत क्षेत्र माना जाता है और यह राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र भी है। ऐसे में सपा प्रमुख का यहीं से अपनी यात्रा शुरू करना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया। सपा की ओर से कहा गया कि इस दौरे का उद्देश्य पार्टी संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाना है। वहीं, कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाओं से दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और राजनीतिक प्रभाव को लेकर मतभेद सामने आए हैं।

Akhilesh Yadav Raebareli visit: सीटों के बंटवारे पर क्या बोले अखिलेश यादव-

अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रहेगा, लेकिन विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा। उनका कहना था कि गठबंधन में वही सीट मिलनी चाहिए, जिस पर संबंधित दल जीतने की स्थिति में हो। इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सपा की सीट बंटवारे की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

कांग्रेस ने भी रखी अपनी बात-

कांग्रेस नेताओं ने भी गठबंधन में सम्मानजनक सीटों की मांग की है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि अगर अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं तो कांग्रेस भी कन्नौज, मैनपुरी और सैफई जा सकती है। उनके इस बयान को सपा के रायबरेली दौरे पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा गया। कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया है कि गठबंधन में पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त और सम्मानजनक सीटें मिलनी चाहिए।

रायबरेली में पहले भी दिखी है सपा-कांग्रेस की तनातनी-

रायबरेली में सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान पहले भी सामने आती रही है। अखिलेश यादव के दौरे के दौरान बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने रायबरेली को कांग्रेस का गढ़ बताए जाने पर सवाल उठाया और जिले में सपा के प्रदर्शन का हवाला दिया। अखिलेश यादव ने इस दौरान हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाकर मुलाकात भी की। इससे रायबरेली में सपा के संगठनात्मक विस्तार की कोशिशों की चर्चा और तेज हुई।

सीट बंटवारे पर कौन लेगा अंतिम फैसला-

सपा प्रवक्ता एमएच खान के मुताबिक, विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत से होगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी अन्य नेता के बयान को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।यानी फिलहाल सीटों का तालमेल दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत का विषय है। अखिलेश यादव ने जहां जीत की क्षमता को आधार बताया है, वहीं कांग्रेस सम्मानजनक सीटों की मांग कर रही है।

2022 में रायबरेली की विधानसभा सीटों का क्या रहा था गणित-

रायबरेली जिले में विधानसभा की छह सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने चार सीटें जीती थीं, जबकि दो सीटें बीजेपी के खाते में गई थीं। उस चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं था। वहीं 2017 में दोनों दलों ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इसलिए 2027 के चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच सीट बंटवारे की बातचीत रायबरेली समेत कई सीटों पर अहम रहने वाली है।

यह भी पढ़े- राजस्थान के तीन बड़े नगर निगमों में बीजेपी का दबदबा, जोधपुर में गहलोत की रणनीति नाकाम