Baisakhi Festival: भारत एक ऐसा देश है जहाँ अनेक प्रकार की विविधताएँ देखने को मिलती हैं और हर राज्य में अपनी अलग परंपराएँ और रीति-रिवाज निभाए जाते हैं। यही सांस्कृतिक खूबसूरती भारत को दुनिया के बाकी देशों से अलग पहचान देती है।
इस बार मंगलवार को पूरे देश में बैसाखी का त्योहार मनाया जाएगा, लेकिन अलग-अलग जगहों पर इसे अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कई क्षेत्रों में इसे नए साल की शुरुआत माना जाता है, जबकि कई जगह इसे फसल के पकने और कटाई के समय के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में बैसाखी कैसे मनाई जाती है।

उत्तर भारत में बैसाखी और मेष संक्रांति का महत्व
उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में इस त्योहार को बैसाखी और मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है, जिससे मौसम में बदलाव आता है और गर्मी बढ़ने लगती है। पंजाब और हरियाणा में इसे फसल पकने की खुशी के रूप में मनाया जाता है, साथ ही यह दिन सिख धर्म के लिए भी बहुत खास होता है क्योंकि इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी और धर्म की नई परंपरा की शुरुआत हुई थी। उत्तराखंड में इसे ‘बिखोती’ कहा जाता है, जबकि ओडिशा में इसे ‘महा विशुव संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है।

उत्तराखंड में ‘बिखोती’ पर्व और परंपराएं
उत्तराखंड में ‘बिखोती’ का पर्व 14 और 15 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस अवसर पर लाटू देवता की विशेष पूजा की जाती है। लोग देवताओं को अनाज से बने प्रसाद अर्पित करते हैं और मंदिरों के बाहर मेले तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।
Baisakhi Festival: असम में रंगाली बिहू और नववर्ष की शुरुआत
असम में 14 अप्रैल को रंगाली बिहू मनाया जाता है, जिसे असमिया नववर्ष की शुरुआत के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं और पारंपरिक मिठाइयाँ व पकवान बनाए जाते हैं।
बंगाल में पोइला बैसाख और मंगल शोभायात्रा
बंगाल में भी बैसाखी को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। बंगाली कैलेंडर के अनुसार 14 अप्रैल से नए साल की शुरुआत होती है, जिसे पोइला बैसाख कहा जाता है। इस दिन ‘मंगल शोभायात्रा’ निकाली जाती है, जिसे यूनेस्को द्वारा सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा प्राप्त है।

दक्षिण भारत में विशु और पुथांडु की परंपराएं
दक्षिण भारत में भी इस पर्व को अलग नामों से मनाया जाता है। केरल में इसे विशु यानी मलयाली नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान को ताजे पीले फूल अर्पित करते हैं और कई मंदिरों में पीले फूलों के साथ सोने से भगवान की प्रतिमा को सजाने की परंपरा भी होती है।
तमिलनाडु में पुथांडु और मंगा पचड़ी का विशेष महत्व
तमिलनाडु में बैसाखी को पुथांडु कहा जाता है। इस दिन घरों में खास व्यंजन ‘मंगा पचड़ी’ बनाई जाती है, जिसमें मौसम के फलों का उपयोग किया जाता है। इसे आम, इमली, गुड़ और नीम से तैयार किया जाता है, जिसका स्वाद जीवन के अलग-अलग अनुभवों को दर्शाता है।
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