Bakrid Tamil Nadu: तमिलनाडु में गुरुवार को मुस्लिम समुदाय ने इस्लाम के प्रमुख त्योहारों में से एक बकरीद को पूरे श्रद्धा भाव और उत्साह के साथ मनाया। ईद-उल-अजहा के नाम से पहचाने जाने वाले इस त्योहार पर लोगों ने नमाज अदा की, दान किया और सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह पर्व पैगंबर इब्राहिम की कुर्बानी और ईश्वर के प्रति उनकी अटूट आस्था की याद में मनाया जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, पैगंबर इब्राहिम अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे।
विशेष नमाज और कुर्बानी की परंपरा
इस्लामी कैलेंडर के जिलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाने वाली बकरीद पर मुस्लिम समुदाय विशेष नमाज अदा करता है। इसके साथ ही जानवरों की कुर्बानी देने की परंपरा भी निभाई जाती है। कुर्बानी के बाद मांस को रिश्तेदारों, पड़ोसियों और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है, ताकि सभी लोग त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकें।

Bakrid Tamil Nadu: मस्जिदों और मैदानों में उमड़ी भीड़
गुरुवार सुबह से ही राज्यभर में मुस्लिम समुदाय के लोग नए पारंपरिक कपड़े पहनकर मस्जिदों, खुले मैदानों और स्टेडियमों में नमाज अदा करने पहुंचे। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में त्योहार में हिस्सा लिया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की शुभकामनाएं दीं।
राजधानी चेन्नई के पेरंबूर, ओटेरी, रोयापुरम, पुरसावक्कम, अन्ना नगर, आइस हाउस, वाशरमेनपेट, टोंडियारपेट और कोडुंगैयूर समेत कई इलाकों में बकरीद का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। बड़ी संख्या में लोग विशेष नमाज में शामिल हुए और पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
सुरक्षा और ट्रैफिक के विशेष इंतजाम
त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की थी। हजारों लोगों ने मस्जिदों और तय किए गए नमाज स्थलों पर पहुंचकर नमाज अदा की। इस दौरान नेताओं और सामाजिक संगठनों ने लोगों से शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।
मेलापालयम और अन्य जिलों में भी रही रौनक
तिरुनेलवेली जिले के मुस्लिम बहुल मेलापालयम इलाके में भी बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए एकत्र हुए। पारंपरिक पोशाक पहने लोग सुबह से ही नमाज स्थलों पर पहुंचने लगे थे। तमिलनाडु के अन्य कई जिलों में भी इसी तरह के दृश्य देखने को मिले, जहां मस्जिदों और खुले स्टेडियमों में विशेष नमाज का आयोजन किया गया।
नमाज के बाद कई परिवारों ने पारंपरिक तरीके से बकरों, मवेशियों और अन्य अनुमत जानवरों की कुर्बानी दी। इस्लामी परंपरा के अनुसार, कुर्बानी के मांस का बड़ा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांटा गया, ताकि हर व्यक्ति त्योहार की खुशी महसूस कर सके।
धार्मिक विद्वानों ने दिया भाईचारे का संदेश
धार्मिक विद्वानों ने अपने संदेश में बकरीद से जुड़े त्याग, दया, दान और सामाजिक एकता के महत्व पर जोर दिया। लोगों से समाज में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई।
बकरीद के मौके पर देश में शांति, खुशहाली और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए विशेष दुआएं भी की गईं। तमिलनाडु प्रशासन ने पूरे राज्य में त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे।








