Bangla News: पश्चिम बंगाल में खुले में नमाज और कुर्बानी को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने भाजपा और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। आईएएनएस से बातचीत करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि संविधान का सम्मान करना चाहिए, लेकिन कुर्बानी होगी। गाय की भी होगी, बकरे की भी होगी और ऊंट की भी होगी। कुर्बानी के लिए जो पशु जायज हैं, उनकी कुर्बानी होगी। मैं भाजपा सरकार को चेतावनी देता हूं। सुवेंदु अधिकारी से सीधे तौर पर कह रहा हूं कि आग से मत खेलो।
कुर्बानी के मामले में कोई समझौता नहीं
उन्होंने कहा कि अगर वे कुर्बानी पर रोक लगाने की कोशिश करते हैं, तो इससे उनके लिए ही मुश्किलें खड़ी होंगी। मुस्लिम समुदाय किसी भी हाल में कुर्बानी के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि 37 प्रतिशत से अधिक मुसलमान गाय का गोश्त खाते हैं। सबसे पहले स्लॉटर हाउस बंद करना चाहिए। उन्हें तो लाइसेंस दिया गया है। भारत सरकार तो बीफ बाहर भेजकर पैसे कमा रही है। क्या सरकार इसे बंद करेगी? उन्होंने कहा कि ईद की नमाज पढ़ने के लिए सरकार को हमें बड़ा मैदान देना चाहिए। अगर मैदान की व्यवस्था नहीं होगी, तो सड़क पर नमाज पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वहीं, सड़क पर नमाज के खिलाफ भाजपा नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि तुष्टीकरण के खिलाफ है। जब सड़कों पर नमाज पढ़ने की बात आती है, तो यूएई, सऊदी अरब या ईरान जैसे इस्लामिक देशों में भी सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक है।
हुमायूं कबीर का शुभेंदु अधिकारी को चैलेंज 🔥🔥
गाय का भी कुर्बानी होगा
सड़कों पर भी नमाज पढूंगा
हम मुसलमान हैं, रोक सकें तो रोक लेंमुझे लग रहा है, इसका समय नजदीक हैं इसलिए बंगाल के हिंदुत्ववादी मुख्यमंत्री को ललकार रहा है pic.twitter.com/JuKUnrNpLh
— Chandan Sharma (@ChandanSharmaG) May 20, 2026
इसलिए, इसे धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। बता दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने एक औपचारिक सार्वजनिक सूचना जारी की है। इसमें फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना गाय और भैंस के वध पर सख्त प्रतिबंध को दोहराया गया है। 27 मई को बकरीद से पहले सरकार ने यह नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि बिना प्रमाण पत्र के किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस का वध नहीं किया जा सकता। प्रमाण पत्र पर दो अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर होने चाहिए। उल्लंघन को संज्ञेय अपराध माना जाएगा, जिसके लिए छह महीने तक की कैद और एक हजार रुपए तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
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