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बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 21 घंटे दर्शन व्यवस्था पर विचार के निर्देश

Banke Bihari Mandir:

Banke Bihari Mandir: मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मंदिर प्रबंधन समिति से कहा कि मंदिर की पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं को बहाल करने, श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए गोस्वामियों के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए। अदालत ने विशेष रूप से मंदिर में दर्शन के समय को बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी ध्यान देने को कहा।

धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप का आरोप

मामले में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि मंदिर के सेवायतों, सेवादारों और गोस्वामियों का आरोप है कि प्रबंधन समिति धार्मिक गतिविधियों और पारंपरिक व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप कर रही है। हालांकि समिति की ओर से सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया गया कि किसी भी धार्मिक परंपरा में दखल नहीं दिया जा रहा है और सभी पूजा-पाठ एवं धार्मिक गतिविधियां पहले की तरह जारी हैं। समिति ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दर्शन का समय पहले से बढ़ाया गया है।

Banke Bihari Mandir: 21 घंटे दर्शन व्यवस्था की मांग

सुप्रीम कोर्ट में दलील देते हुए अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जब बांके बिहारी मंदिर की स्थापना हुई थी, तब देश की आबादी काफी कम थी, लेकिन अब करोड़ों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में गरीब, मजदूर और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उन्होंने सुझाव दिया कि तिरुपति बालाजी और वैष्णो देवी मंदिर की तरह यहां भी प्रतिदिन लगभग 21 घंटे दर्शन की व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने बांके बिहारी मंदिर को उत्तर भारत का तिरुपति बताते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में भक्तों को केवल कुछ सेकंड के लिए ही दर्शन मिल पाते हैं।

व्यापक विकास योजना बनाने के निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मंदिर और आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक योजना तैयार करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस योजना में अस्पताल, श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था, सड़कों का चौड़ीकरण और बुजुर्गों के लिए बेहतर आवागमन जैसी सुविधाएं शामिल की जाएं। वहीं अधिवक्ता तन्वी उपाध्याय ने मांग की कि मंदिर की आंतरिक धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न हो और गोस्वामियों के चुनाव से चुने गए प्रतिनिधियों को प्रबंधन समिति में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर सहमति जताते हुए कहा कि मंदिर की पारंपरिक व्यवस्थाओं और धार्मिक रीति-रिवाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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