Bankipur By Election: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य की बड़ी परीक्षा बन गया है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरे प्रशांत किशोर इस उपचुनाव को पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका और जन सुराज की दिशा तय कर सकता है।
पहली चुनावी परीक्षा में पूरी ताकत झोंक रहे पीके
प्रशांत किशोर पहली बार किसी चुनाव में उम्मीदवार बने हैं। वह लगातार डोर-टू-डोर जनसंपर्क कर रहे हैं और इस उपचुनाव को राज्य सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह के रूप में पेश कर रहे हैं। उनके सामने एनडीए और राष्ट्रीय जनता दल दोनों की चुनौती है। ऐसे में बांकीपुर में जीत उनके लिए राजनीतिक विश्वसनीयता साबित करने का अहम अवसर मानी जा रही है।
Bankipur By Election: उपचुनाव में हार से कई नेताओं का करियर हुआ प्रभावित
बिहार की राजनीति में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां उपचुनाव में हार के बाद नेताओं का राजनीतिक प्रभाव कम हो गया। पूर्व शिक्षा मंत्री पीके शाही 2013 के महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव में हारने के बाद सक्रिय राजनीति से लगभग बाहर हो गए। इसी तरह किशोरी सिन्हा, राम नरेश पांडे और पूर्व मंत्री बीमा भारती भी उपचुनाव में हार के बाद राजनीतिक तौर पर कमजोर पड़ गए। इन उदाहरणों को देखते हुए बांकीपुर का परिणाम प्रशांत किशोर के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हार की स्थिति में बढ़ सकती हैं राजनीतिक चुनौतियां
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर इस चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पाते, तो उनकी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है। हाल के दिनों में कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद यह चुनाव संगठन की मजबूती की भी परीक्षा माना जा रहा है। साथ ही, आरजेडी को पीछे छोड़कर तीसरे विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की उनकी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है।
Bankipur By Election: बांकीपुर में मुकाबला आसान नहीं
बांकीपुर सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। पिछला चुनाव भाजपा ने जीता था और इस बार भी पार्टी ने अपने कार्यकर्ता नीरज भारती को मैदान में उतारा है। वहीं, प्रशांत किशोर जन सुराज के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में जन सुराज को इस सीट पर सीमित वोट मिले थे। ऐसे में इस बार जीत हासिल करना प्रशांत किशोर के लिए केवल एक सीट जीतने का सवाल नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की चुनौती भी है।
ये भी पढे़ं…नशे के धंधे में शामिल 5 महिलाएं गिरफ्तार, लूट और चोरी जैसे अपराधों में भी रही हैं लिप्त








