Bargi Dam: मध्य प्रदेश के बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि न्यायिक जांच पूरी होने तक पूरे राज्य में क्रूज सेवाओं और बोटिंग क्लबों का संचालन बंद रहेगा। बरगी बांध हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
न्यायिक जांच समिति का गठन
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सर्राफ की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जबलपुर के पास बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए हादसे की जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में न्यायिक जांच समिति गठित की गई है। सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि समिति ने जांच शुरू कर दी है और तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एहतियात के तौर पर पूरे राज्य में क्रूज और बोटिंग गतिविधियां फिलहाल निलंबित कर दी गई हैं।
Bargi Dam: सुरक्षा मानकों की होगी व्यापक जांच
हाईकोर्ट ने जांच समिति को निर्देश दिया कि हादसे के सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जाए। अदालत ने विशेष रूप से यह पता लगाने को कहा कि क्या क्रूज संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों और संचालन नियमों का उल्लंघन हुआ था। अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी नागरिक, जिसके पास हादसे से जुड़ी जानकारी या सुझाव हों, वह जांच समिति के समक्ष अपनी बात रख सकता है। याचिकाकर्ता पुष्पा तिवारी की ओर से पेश अधिवक्ता गोपेश यश तिवारी ने बताया कि जनहित याचिका का उद्देश्य हादसे की निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि अदालत ने पूरे मामले में व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं।
तूफान के दौरान पलटा था क्रूज
गौरतलब है कि 30 अप्रैल को बरगी बांध जलाशय में संचालित एक क्रूज अचानक आए तूफान की चपेट में आकर पलट गया था। इस हादसे में आठ महिलाओं, चार बच्चों और एक पुरुष सहित कुल 13 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, लंबे बचाव अभियान के बाद 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस घटना के बाद राज्यभर में बोटिंग और क्रूज सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है।








