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Bengal News: अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर को लेकर बंगाल में सियासी घमासान

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Kolkata: Trinamool Congress National General Secretary Abhishek Banerjee during an interaction with the party’s Legal Cell in Kolkata on Saturday, May 16, 2026. (Photo: IANS/X/@AITCofficial)

Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा और टीएमसी आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा नेताओं ने इसे कानून के तहत जरूरी कार्रवाई बताया है, जबकि टीएमसी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। मामले ने राज्य की सियासत को और गरमा दिया है।

भाजपा ने कहा- लोकतंत्र में ऐसी भाषा स्वीकार नहीं

एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को इस तरह की धमकी भरी भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए। भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने भी अभिषेक बनर्जी के भाषणों को भड़काऊ बताते हुए कहा कि लोकतंत्र बहस और संवाद पर चलता है, डर और धमकी पर नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा को लगातार बढ़ावा दिया गया है।

Bengal News: टीएमसी ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई

तृणमूल कांग्रेस ने एफआईआर को भाजपा की राजनीतिक रणनीति करार दिया है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान सभी दलों के नेता तीखे बयान देते हैं, लेकिन केवल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए कानूनी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने संविधान के दायरे में रहकर बयान दिए थे और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पूरी तरह निराधार है। उन्होंने इसे तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को कमजोर करने की साजिश बताया।

बयान को लेकर बढ़ा विवाद

भाजपा नेताओं का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा और धमकी से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हुआ। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि ऐसे बयान संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ माहौल बनाने वाले हैं और कानून के तहत उनकी जांच होनी चाहिए। इस पूरे मामले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है तथा इसका असर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।