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बांके बिहारी मंदिर विवाद पर SC की दोटूक: पुजारी पूजा करें, श्रद्धालुओं से जबरन वसूली नहीं चलेगी

Benke Bihari Mandir: वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को व्यापक विकास योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान पुजारियों की ओर से कहा गया कि “देवता एक सजीव बालक हैं” और उनके जागरण, अनुष्ठान और दोपहर के विश्राम के लिए समय सदियों पुरानी परंपराओं पर आधारित है। इसलिए इन धार्मिक समयों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि वृंदावन की संकरी गलियों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं के लिए ठोस योजना जरूरी है। अदालत ने सड़क चौड़ीकरण, पेयजल, शौचालय, धर्मशालाएं, आपातकालीन निकास और वरिष्ठ नागरिकों व बीमार श्रद्धालुओं के लिए ई-वाहन जैसी सुविधाओं को योजना में शामिल करने को कहा।

Benke Bihari Mandir: HPC में गोस्वामी प्रतिनिधियों को जगह

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने आदेश में कहा, ‘इसलिए हमने राज्य सरकार के साथ-साथ समिति से भी एक रिपोर्ट तैयार करने और उसे हमारे विचारार्थ प्रस्तुत करने का अनुरोध किया है.’ सेवायतों (पुजारियों) की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान और वकील तन्वी दुबे ने कहा कि अदालत की ओर से नियुक्त एचपीसी आवश्यक धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप कर रही है. उन्होंने विशेष रूप से एचपीसी के सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें ‘दर्शन’ के समय में बदलाव किया गया था.

चार सदस्यों की मनोनीत हुए  

गोस्वामी समुदाय और मौजूदा प्रशासन के बीच संवाद की कमी को दूर करने के लिए, बेंच ने पुजारियों की ओर से मनोनीत चार सदस्यों को समिति में शामिल करने का आदेश दिया. ‘सेवायतों’ के दो प्राथमिक समूहों में से, बेंच ने रजत गोस्वामी और शैलेन्द्र गोस्वामी (शयन भोग समूह), और गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी (राजभोग समूह) को नामित किया. मामले में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाने के लिए अदालत ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) में चार गोस्वामी प्रतिनिधियों को शामिल करने का निर्देश दिया है।

Benke Bihari Mandir: परंपरा बनाम व्यवस्था

वृंदावन की संकरी गलियों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘आपको लीक से हटकर सोचना होगा. तिरुपति के विपरीत, जहां स्थान की प्रचुरता है, बांके बिहारी संकरी गलियों में स्थित हैं.’ जस्टिस बागची ने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक अनुष्ठान जारी रहने चाहिए, लेकिन श्रद्धालुओं का शोषण समाप्त होना चाहिए.

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