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भरत तिवारी मुठभेड़ में बड़ा मोड़, DSP सहित पांच पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज

Bharat Tiwari: भरत तिवारी केस: DSP सहित पाँच आरक्षकों पर FIR

Bharat Tiwari: बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर शाहपुर थाने में पुलिस उपाधीक्षक, तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की पुष्टि भोजपुर के पुलिस अधीक्षक ने की है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है तथा इसकी जांच पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

शिकायत के आधार पर दर्ज हुई FIR, जानकारी x पर साझा

जानकारी के अनुसार, भरत तिवारी की मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत आवेदन देकर मुठभेड़ की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए थे। इसी आवेदन के आधार पर संबंधित पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले मामले में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया जा चुका है। जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है, उनमें तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष, दो पुलिस अवर निरीक्षक, एक सहायक अवर निरीक्षक और एक महिला सिपाही शामिल हैं।

Bharat Tiwari: मां ने लगाए गंभीर आरोप

आशा देवी का आरोप है कि उनका बेटा प्रशासनिक मुद्दों और बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रिय था। उन्होंने दावा किया कि घटना वाले दिन भरत तिवारी सामाजिक माध्यम पर सीधा प्रसारण कर रहा था। उनके अनुसार, भरत ने अपने पास मौजूद हथियार फेंक दिया था और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद उसे पकड़कर गोली मारी गई। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि उसे कई गोलियां लगीं और पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई।

परिवार ने उठाए कई सवाल

परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें कई घंटों तक सही जानकारी नहीं दी गई। परिवार का कहना है कि शाम के समय उन्हें भरत तिवारी की मौत की सूचना मिली। उनका आरोप है कि पूरे घटनाक्रम में कई ऐसे तथ्य हैं जिनका अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। इसी वजह से परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

Bharat Tiwari: न्याय मिलने तक श्राद्ध नहीं करने का ऐलान

भरत तिवारी की मां ने कहा है कि जब तक उनके बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं मिलती, तब तक श्राद्ध कर्म नहीं किया जाएगा। उन्होंने पूरे अभियान में शामिल अधिकारियों और जवानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भरत के मोबाइल फोन को परिवार को सौंपने की मांग भी उठाई है। परिजनों का मानना है कि मोबाइल में मौजूद जानकारी और घटना से जुड़े संभावित साक्ष्य मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

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