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पहली बार आमने-सामने आईं मेट्रो ट्रेनें, हुआ बड़ा परीक्षण

Bhopal Metro:

Bhopal Metro: भोपाल मेट्रो परियोजना में संचालन को अधिक तेज और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त की टीम गुरुवार को सिग्नलिंग प्रणाली की जांच के लिए भोपाल पहुंची। निरीक्षण के दौरान पहली बार रानी कमलापति स्टेशन और एमपी नगर स्टेशन के बीच एक ही पटरी पर दो मेट्रो ट्रेनें आमने-सामने लाई गईं। यह परीक्षण नई सिग्नलिंग व्यवस्था की क्षमता और सुरक्षा मानकों को परखने के लिए किया गया।

सुरक्षा और नियंत्रण प्रणाली की हुई जांच

निरीक्षण के दौरान दो अलग-अलग टीमें मेट्रो ट्रेनों में सवार होकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह देखा जा रहा है कि यदि दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाएं तो प्रणाली किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है। अचानक ब्रेक लगने, गति नियंत्रण और सुरक्षित दूरी बनाए रखने जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का परीक्षण किया गया। यह पूरी प्रक्रिया मेट्रो संचालन को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से की जा रही है।

Bhopal Metro: निरीक्षण के बाद बदलेगा संचालन का स्वरूप

मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि निरीक्षण पूरा होने के बाद सुरक्षा आयुक्त की मंजूरी मिलने पर सिग्नलिंग प्रणाली पूरी तरह सक्रिय कर दी जाएगी। इसके बाद मेट्रो का नया समय-सारिणी जारी किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, 26 जून से मेट्रो अपने निर्धारित समय पर संचालित होगी। जुलाई से नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक सेवा मिलने की उम्मीद है।

अभी एक ही पटरी पर चल रही हैं ट्रेनें

वर्तमान में भोपाल और इंदौर मेट्रो में सिग्नलिंग प्रणाली पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण ट्रेनों का संचालन केवल एक ही पटरी पर किया जा रहा है। यही वजह है कि यात्रियों को लंबे अंतराल तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। सुभाष नगर से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान तक जाने वाली ट्रेन उसी पटरी से वापस लौटती है। दूसरी पटरी का उपयोग अभी नहीं हो रहा है, जिससे पूरी क्षमता का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

Bhopal Metro: नई तकनीक से बढ़ेगी गति और सुविधा

विशेषज्ञों के अनुसार सिग्नलिंग प्रणाली किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ होती है। यह ट्रेनों की गति, दूरी और सुरक्षा को नियंत्रित करती है। भोपाल मेट्रो में वही आधुनिक तकनीक लागू की जा रही है जो देश की प्रमुख मेट्रो सेवाओं में उपयोग होती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद दोनों दिशाओं में ट्रेनें चल सकेंगी, फेरे बढ़ेंगे और यात्रियों को कम समय में मेट्रो उपलब्ध होगी। इससे कार्यालय समय के दौरान भी बेहतर और नियमित सेवा सुनिश्चित हो सकेगी।

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