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बिहार में शुरू हुआ सम्राट युग ! ऐसे नहीं फेंका BJP ने ये दांव, इसके पीछे हैं कई बड़े फैक्टर

बिहार में शुरू हुआ सम्राट युग ! ऐसे नहीं फेंका BJP ने ये दांव, इसके पीछे हैं कई बड़े फैक्टर
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Bihar News: बिहार की राजनीति में अब बड़ा उलटफेर हो चुका है। लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब राज्य की कमान सम्राट चौधरी के हाथों में जाती दिख रही है। बीजेपी विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि बिहार में अब नई सियासी पटकथा लिखी जाएगी।सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता के सपनों को साकार करने की जिम्मेदारी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बीजेपी ने इतनी बड़ी बाज़ी सम्राट चौधरी पर ही क्यों खेली? इसके पीछे कई ऐसे बड़े फैक्टर हैं, जिन्होंने दिल्ली से पटना तक पूरी रणनीति बदल दी।

पार्टी में तेजी से बढ़ा कद, हाईकमान का पूरा भरोसा

साल 2018 में बीजेपी में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी लगातार संगठन में मजबूत होते गए। पहले प्रदेश उपाध्यक्ष, फिर एमएलसी और बाद में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारियां उन्हें मिलीं।जब नीतीश कुमार ने आरजेडी के साथ सरकार बनाई थी, तब बीजेपी ने बिहार में बड़े बदलाव की रणनीति बनाई। दिल्ली में हुई हाईलेवल बैठक में अमित शाह, जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज नेताओं ने सम्राट चौधरी के नाम पर भरोसा जताया। यही भरोसा आज उन्हें मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे ले आया।

Bihar News: राजनीति का पुराना खिलाड़ी, हर चाल का जानकार

सम्राट चौधरी सिर्फ संगठन के नेता नहीं, बल्कि बिहार की जमीनी राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी भी हैं। उनकी शुरुआती राजनीतिक ट्रेनिंग लालू प्रसाद यादव के दौर में हुई थी। उनके पिता शकुनी चौधरी भी राज्य की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं।यानी सम्राट चौधरी सत्ता के गलियारों से लेकर जातीय समीकरण तक हर चाल को समझते हैं। यही अनुभव बीजेपी के लिए सबसे बड़ा हथियार बना। पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए था जो विपक्ष पर हमला भी कर सके और सरकार भी संभाल सके।

Bihar News: जातीय समीकरण पर मास्टरस्ट्रोक

बिहार की राजनीति सिर्फ भाषणों से नहीं, सामाजिक समीकरणों से चलती है। बीजेपी ने यही समझते हुए सम्राट चौधरी को आगे किया है। सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं, जबकि नीतीश कुमार कुर्मी समाज से जुड़े रहे हैं।इन दोनों समुदायों को जोड़कर बनने वाला लव-कुश  समीकरण बिहार का बड़ा वोट बैंक माना जाता है। बीजेपी ने सम्राट चौधरी को आगे कर साफ संकेत दे दिया है कि अब पार्टी सिर्फ सहयोगी दलों के भरोसे नहीं, बल्कि अपने दम पर सामाजिक समीकरण साधने उतरी है।

बिहार में अब बदलेगा पूरा खेल!

सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ चेहरा बदलना नहीं, बल्कि बिहार में बीजेपी के भविष्य की बड़ी रणनीति है। यह संदेश भी है कि पार्टी अब राज्य में अपनी जड़ें और मजबूत करना चाहती है।पटना की सत्ता में अब नया नाम गूंजेगा, नई शैली दिखेगी और नई लड़ाई शुरू होगी। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति में सचमुच नया युग लाएंगे, या यह दांव आने वाले चुनावों की तैयारी है? बिहार की निगाहें अब इसी जवाब पर टिकी हैं।

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